'जन आवाज' हम निभाएंगे, चुनाव जीतने के कांग्रेस के वादे-इरादे, बबाल क्यों?




''जैसा कि हम सब कोई भी आसानी से सोच सकते हैं कि कोई भी पार्टी हो चुनाव से पहले अपना घोषणा पत्र जारी करती है, उसमें जनता से बड़े-बड़े और लोक लुभावन वादे किये जाते हैं. बाद में चाहे वह पूरे न किये जा सकें, सत्ता सुख तो पा ही लेते हैं. हाल में कांग्रेस ने भी लोकसभा चुनाव के लिए अपना लोक लुभावन घोषणा पत्र जारी किया है. बजट की तरह जैसे सत्ता पक्ष अच्छा बताता है, वहीं विपक्ष बुरा, कांग्रेस के इस घोषणा पत्र पर भी कुछ इसी तरह की प्रतिक्रिया है. घोषणा पत्र की बातों, वादों-इरादों का सब अपने-अपने अनुसार अलग-अलग मतलब निकाल कर देख रहे हैं.'' 



पांच साल से केन्द्र की सत्ता से दूर रही कांग्रेस ने इन लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार को मात देने के लिए 'जन आवाज' हम निभाएंगे, शीर्षक के साथ अपना घोषणा पत्र जारी कर लोकलुभावन योजनाओं की झड़ी लगा दी है. घोषणा पत्र में आम जन को न्याय, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार के साथ बेरोजगार युवाओं, किसानों, कारोबारियों और महिलाओं समेत सभी वर्गों के लिए कुछ न कुछ देने का वादा किया गया है. 

और इसी के साथ पार्टी ने 'जन आवाज' हम निभाएंगे, घोषणा पत्र में 2 ऐसे वायदे शामिल कर दिए गए हैं, जिनको लेकर देश भर में बबाल मचा हुआ है. कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया है कि उनकी सरकार बनने पर AFSPA कानून में संशोधन किया जायेगा और देशद्रोह का मुकद्दमा चलाने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A को खत्म किया जायेगा. घोषणा पत्र में जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग बताते हुए, वहां से अनुच्छेद 370 हटाने का भरपूर विरोध किया है और समस्या के हल के लिए बातचीत को ही एकमात्र रास्ता बताया है.

घोषणा पत्र पर राहुल गांधी का कहना है कि यह घोषणा पत्र बंद कमरे में बैठकर नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने में बैठे लाखों लोगों से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है. राहुल गाँधी का कहना है कोई जुमलेबाजी नहीं, जो कर सकते हो वही कहो, को हमने आधार बनाया है. हमने लोगों की उम्मीद और भविष्य से जुड़ा घोषणापत्र जारी किया है. 

'न्याय' से दूर होगी गरीबों की गरीबी
कांग्रेस ने गरीबी को दूर करने के लिए सबसे पहले अपनी महत्वाकांक्षी योजना 'न्याय' का घोषणा पत्र में जिक्र किया है. कांग्रेस का कहना है कि इस योजना के तहत देश के 5 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपए की आर्थिक मदद की जाएगी. इस मदद के मिलने के बाद इन 5 करोड़ परिवारों की मासिक आय कम से कम 12 हजार रुपए हो जाएगी. इससे करीब 25 करोड़ लोगों को फायदा होगा. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पहले भी इस योजना का ऐलान कर चुके हैं. इस योजना के क्रियान्वयन पर हर साल करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए का खर्च आएगा. 'गरीबी पर वार, 72 हजार' के नारे को आम जन को न्याय की दिशा में पहला कदम बताया गया है. 
पक्ष - कांग्रेस पक्ष का दावा है गरीबों के हित में एक बेहतर सोच बेहतर योजना अहै. इससे गरीबों का जीवन स्तर ऊंचा उठेगा, जिसका कि उन्हें भी हक़ है. 

विपक्ष - वहीं विपक्ष का कहना है कांग्रेस जिन सबसे गरीब 20% लोगों को 6000/- रूपया महीना देगी, जिसके लिए देश में अलग से एक नया टैक्स लगाया जाएगा. ये 20% "सबसे गरीब" कौन हैं? रोहिंग्या, बांग्लादेशी देशी ही न. यह अब इसी देश के नागरिक हैं और उनसे ज्यादा गरीब कोई नहीं. 



रोजगार के लिए कांग्रेस की योजना
राहुल गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो एक साल के अंदर देश में खाली पड़े 22 लाख सरकारी पद भरे जाएंगे. उन्होंने कहा कि 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायतों में रोजगार दिया जाएगा. देश में नया बिजनेस खोलने के लिए पहले तीन सालों तक किसी प्रकार की परमिशन की जरूरत नहीं होगी. रोजगार देने वाले लोगों के लिए सरकार बैंक के दरवाजे खोलेगी.

पक्ष - अगले एक साल में 22 लाख लोगों को रोजगार देने की बात की गई है. जीडीपी का छह प्रतिशत शिक्षा पर खर्च करने की घोषणा सराहनीय है, इससे देश में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा. इनके अलावा स्वास्थ्य, राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति, उद्योग, बैंकिंग व्यवस्था, शहरीकरण आदि का जिक्र घोषणापत्र में है कि कांग्रेस अगर सत्ता में आई, तो वह किस तरह इनमें सुधार करेगी. 

विपक्ष - ये कैसे होगा, यह संभव नहीं है. चुनावी वादा है. 

मनरेगा में 150 दिन का रोजगार देने का ऐलान
कांग्रेस के घोषणा पत्र पर राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मनरेगा का मजाक उड़ाया था, लेकिन कांग्रेस सत्ता में आने पर मनरेगा में काम के दिनों में बढ़ोतरी करेगी. उनका कहना है कि कांग्रेस मनरेगा के तहत 150 दिन की रोजगार गारंटी देगी.

पक्ष - स्वागत करता है. 

विपक्ष - मौन, इस विषय पर कोई बात सामने नहीं आई है.  



शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में होंगे ये बदलाव
कांग्रेस के घोषणा पत्र में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा ऐलान किया गया है. देश की GDP का छह प्रतिशत पैसा शिक्षा पर खर्च किया जायेगा. IIT और IIM जैसे संस्थान देशभर में खोले जाएंगे.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में बात करें तो कांग्रेस पब्लिक हेल्थकेयर को मजबूत करेगी. गरीबों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले अस्पताल बनाए जाएंगे. राहुल गांधी का कहना है कांग्रेस मोदी सरकार की तरह इलाज के लिए प्राइवेट सेक्टर पर निर्भर नहीं रहेगी.

पक्ष - जोरदार स्वागत किया है. 

विपक्ष - वोट के लिए लोलीपॉप बताया जा रहा है. 



किसानों के लिए दो बड़े ऐलान
किसानों के लिए अलग बजट पेश किया जाएगा. अगर कोई किसान लोन नहीं चुका पाता है तो इसे दंडनीय अपराध नहीं माना जाएगा.

पक्ष - जोरदार स्वागत किया है. 

विपक्ष - किसानों के लिए अलग बजट एक बड़ी पहल होगी, जिसमें उनकी जरूरतों को सीधे लक्षित किया जा सकेगा. इसके साथ ही कर्जअदायगी से जुड़ी अहम घोषणा की गई है कि किसान का कर्ज न चुकाना आपराधिक नहीं, बल्कि सिविल मामला बनेगा. मगर सवाल यह है कि क्या यह फैसला किसानों को उनका खोया आत्मसम्मान दिलाएगा और उन्हें आत्महत्या जैसे कदम उठाने से रोक पायेगा?

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न्यायपालिका के ढांचे में बदलाव  
न्यायपालिका के क्षेत्र में कांग्रेस का घोषणा पत्र नई बहस छेड़ता है. कांग्रेस ने कहा है कि वह देश भर में छह अपील कोर्ट की स्थापना करेगी. राज्यों के हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने के लिए देश भर से सभी को दिल्ली नहीं आना होगा. बीच में ही मौजूद इन अपील कोर्ट से उसके मामले का निपटारा हो सकता है. इससे सुप्रीम कोर्ट का इंसाफ और सामान्य लोगों तक पहुंचेगा. 


सुप्रीम कोर्ट को संवैधानिक कोर्ट का दर्जा देने की बात है. अलग अलग बेंचों से गुज़रते हुए संवैधानिक मामले बहुत समय लेते हैं. मौलिक अधिकार की व्याख्या हो या राम मंदिर का ही मामला ले लें, मामला छोटी बेंच से बड़ी बेंच और उससे भी बड़ी बेंच में घूमते रहता है और अलग अलग व्याख्याएं सामने आती रहती हैं. आपने देखा होगा कि अमरीका के सुप्रीम कोर्ट में सारे जज एक साथ बैठते हैं और सामूहिक रूप से मामले को सुनकर निपटाते हैं. संवैधानिक मामलों का फैसला इसी तरह से होना चाहिए. यह बहस पुरानी है मगर कांग्रेस ने वादा कर यह संकेत दिया है कि वह राज्य और न्यायपालिका के ढांचे में बदलाव करना चाहती है.



इन मुद्दों को लेकर है ख़ास चर्चा में, देश भर में मच रहा बबाल  
अनुच्छेद 370 कांग्रेस ने कश्मीर को लेकर किए ये वादे   
कांग्रेस ने घोषणा पत्र में लिखा कि पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. पार्टी ने कहा कि हम राज्य के अनुपम इतिहास और उन परिस्थितियों का सम्मान करते हैं, जिनके तहत राज्य ने भारत में विलय को स्वीकार किया, जिसकी वजह से भारत के संविधान में अनुच्छेद 370 को शामिल किया गया. इस संवैधानिक स्थिति को बदलने की न तो अनुमति दी जायेगी, न ही ऐसा कुछ भी प्रयास किया जायेगा.

कांग्रेस के मुताबिक जम्मू-कश्मीर के तीनों क्षेत्रों के लोगों की आकांक्षाओं को समझने और उनके मुद्दों का सम्मानजनक समाधान खोजने के लिए, बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. हम इसी रास्ते को अपनायेंगे.

कांग्रेस के मुताबिक, वो सीमा पर पूरी दृढ़ता के साथ घुसपैठ की कोशिशों को खत्म करेगी और लोगों की मांगों को पूरा करने तथा उनके दिलों को जीतने के लिए हर संभव कोशिश करेगी.

सेना तैनाती और अफस्पा (AFSPA) को लेकर किया ये वादा
कांग्रेस ने राज्य में सशस्त्र बलों की तैनाती की समीक्षा करने की बात कही है. साथ ही घुसपैठ रोकने के लिए सीमा पर ज्यादा सैनिकों को तैनात करने, कश्मीर घाटी में सेना और CAPF की मौजूदगी को कम करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस को और अधिक जिम्मेदारी सौंपने का वादा किया है.

पार्टी ने जम्मू-कश्मीर में सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (अफस्पा (AFSPA)) और अशांत क्षेत्र अधिनियम की समीक्षा करने का वादा किया है. साथ ही सुरक्षा की जरूरतों और मानवाधिकारों के संरक्षण में संतुलन के लिए कानूनी प्रावधानों में बदलाव करने की बात भी कही है.

कांग्रेस ने राज्य के सभी पक्षों के साथ धैर्यपूर्वक बातचीत के माध्यम से स्थाई समाधान खोजने का वादा किया है. साथ ही जम्मू-कश्मीर के लोगों से बिना शर्त बातचीत का वादा भी किया. पार्टी ने इसके लिए नागरिक समाज से चुने हुए 3 वार्ताकारों की नियुक्ति करने की बात भी कही है.

पार्टी ने यूपीए सरकार द्वारा कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए शरू किए कार्यक्रम उड़ान, हिमायत और उम्मीद को नये सिर से शुरू करेंगे और जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए आर्थिक अवसर पैदा करने हेतु नए अवसर पैदा करने की बात कही है.

इसके अलावा पार्टी ने राज्य विधानसभा के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव तुरंत कराने की बात कही है. साथ ही देश के बाकी हिस्सों में जम्मू-कश्मीर के छात्रों, व्यापारियों और अन्य लोगों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया है. 

कांग्रेस के घोषणा पत्र में कहा गया है कि उनकी सरकार बनने पर AFSPA कानून का संशोधन होगा और भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A को खत्म किया जाएगा.



मौजूदा समय में केंद्र सरकार ने AFSPA एक्ट जम्मू-कश्मीर में लागू किया हुआ है और इस एक्ट की वजह से जम्मू-कश्मीर में सेना को कार्रवाई के विशेष अधिकार मिले हुए हैं. कांग्रेस पार्टी ने कहा कि वह सुरक्षा बलों और नागरिकों के मानव अधिकारों की शक्तियों को संतुलित करने के लिए इस कानून में संशोधन करेगी.

भारतीय दंड संहिता की धारा 124 A के तहत देशद्रोह का मुकद्दमा चलता है और मौजूदा समय में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में देश विरोधी नारे लगाए जाने के आरोप में छात्र नेता कन्हैया कुमार और उमर खालिद पर इसी धारा के तहत मकद्दमा दर्ज हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में कहा है कि वह इस कानून को खत्म कर देगी, क्योंकि इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है और बाद में आए कानूनों की वजह से यह बेकार भी हो गया है.  

पक्ष - इन जगहों के लोगों का तर्क है कि सेना और अर्धसैनिक बलों के जवान जबरन और बिना किसी कारण के लोगों पर इस कानून की आड़ में बल प्रयोग करते हैं. लोगों का आरोप है कि इस कानून का दुरुपयोग कर सेना भेदभाव और दमन करती रही है, अब वह रुक सकेगा. 

विपक्ष - वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल यह अधिनियम जीवन को अधिक हानि पहुंचाए बिना आतंकवाद को रोकने में कारगर है. सेना के जवानों को आतंकवाद रोधी कार्रवाई में उनकी मदद करने के लिए उनके पास अफस्पा (AFSPA) नामक का यह एक कवच है. इस अधिनियम के द्वारा आंतकवाद से होने वाली हानियों को रोका जा सकता है. घोषणापत्र में देशद्रोह और AFSPA पर जो नजरिया कांग्रेस ने जाहिर किया वो शायद किसी देशभक्त नागरिक का नहीं हो सकता. इस पर वोट मांगना समझदारी नहीं हो सकती. 

विपक्ष का कहना है 'देशद्रोह' की धारा खत्म करने और AFSPA में संशोधन की बातें काफी महत्वपूर्ण हैं, क्या इससे नागरिकों के अधिकार मजबूत होंगे? यह एक बड़ा सवाल है, इसके परिणाम दूरगामी हैं. इससे कांग्रेस किसे मजबूत करना चाहती है, स्पष्ट नहीं है. पर देश के लिए एक बड़ी जोखिम दिख रही है. AFSPA हटाने से सेना का मनोबल गिरेगा. इसके हटने से सेना की ताकत आधी हो जाएगी. आतंकवादियों, पत्थरबाजों के खिलाफ सेना के हाथ पूरी तरह बंध जाएंगे. कश्मीर से सेना को हटाएगी. मतलब कि अब तो कांग्रेस खुलकर देश-विरोध में आ गयी है.

सोचने वाली बात यह है कि बस इतनी सी बात क्या कांग्रेस को समझ नहीं आई?   
अब सोचने वाली बात यह है कि कांग्रेस भारत में चुनाव लड़ रही है. यदि वह देश के खिलाफ ही ऐसी बात करेगी, तो कैसे कोई उसे वोट करेगा? और क्या इतनी सी बात कांग्रेस ने घोषणा पत्र बनाते वक्त नहीं सोची होगी? इन मामलों के पीछे कांग्रेस के गहरे सोच को मोदी सरकार में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी माना है. उनका कहना है कि 'कांग्रेस की दलीलें सुनकर कोई भी कहेगा कि ये अच्छी बात है.' मतलब मोदी सरकार में रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस के कश्मीर पर राष्ट्रवाद पर सेना पर की गई घोषणाओं को अच्छा माना है, लेकिन चूंकि वह विपक्ष में हैं तो तारीफ़ कैसे कर दें, सो उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारे अनुसार पर इसका लाभ सेना को निशाना बनाने वालों को होगा.' 

सबसे ख़ास बात 
घोषणा पत्र पर राहुल गांधी ने कहा है यह सब करने के लिए दिल्ली में सरकार और उसमें इच्छा शक्ति होना चाहिए. अब यह जनता पर निर्भर है कि वह किस्में इच्छा शक्ति देखती है और किसकी दिल्ली में सरकार बनबाती है?





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