न्यायालय को 'चौकीदार चोर है', कहने में कोई आपत्ति नहीं, लो इन वकील साहब ने लिख दिया 'चौकीदार चोर है'


'चौकीदार चोर था, है और आगे भी यदि मौका दिया तो चोर ही रहेगा'. सुप्रीम कोर्ट ने यह नहीं कहा कि चौकीदार चोर नहीं है, बल्कि यह कहा कि न्यायालय की कार्यवाही का हवाला देकर यह नहीं कहना चाहिए था कि अब तो न्यायालय भी कह रही है कि चौकीदार चोर है'. यह बताते हुए भोपाल से एडवोकेट प्रियनाथ पाठक ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है. पोस्ट में बताया अगया है कि इसका कारण यह है कि अभी राफेल का मामला न्यायालय में विचाराधीन है और जब तक निर्णय नहीं होता. तब तक ऐसी टिप्पणी नहीं करना चाहिए. 

पोस्ट में उन्होंने लिखा है न्यायालय में चलने वाले प्रकरण का हवाला दिए बिना तो सभी बोल सकते हैं कि 'चौकीदार चोर है', जिस मामले में शपथपत्र दिया गया वो न्यायालय की अवमानना का केस है न कि मोदी जी की मानहानि का केस. और भक्त लोग ऐसा माहौल बना रहे हैं कि जैसे न्यायालय ने मोदी जी के पक्ष में यह फैसला दे दिया है कि 'चौकीदार चोर नहीं है'. 

उन्होंने लिखा है कुछ भक्त तो इस सीमा तक चले गए कि राहुल गांधी ने हाथ जोड़कर माफी मांगी. भैया पहले न्यायालय की प्रक्रिया तो समझ लो फिर कुछ लिखो. मैं कह रहा हूँ कि 'चौकीदार चोर है', तो क्या मेरे खिलाफ भी प्रकरण दर्ज हो जाएगा? यदि हो सके तो कराने की कोशिश करो. 

राहुल गांधी तो कई साल से कह रहे हैं कि 'चौकीदार चोर है' और आम आदमी उनकी बात मान भी रहा है, जिसका परिणाम है 3 प्रदेशों के विधानसभा के नतीजे और यह कंटेंप्ट की कार्यवाही अभी कुछ दिन पुरानी ही है. राहुल गांधी ने न्यायालय से माफी मांगी है, मोदी जी से नहीं. यह बात जरा समझो. न्यायालय को 'चौकीदार चोर है', कहने में कोई आपत्ति नहीं है. उसे आपत्ति केवल इस बात से है कि न्यायालय का जिक्र इसके साथ न किया जाए. 


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