भोपाल के लिए BJP से एक नाम, जो निश्चित रूप से जिताऊ था, लेकिन भुला दिया, यह राजनीति है यहाँ वह होता है जो आप सोच नहीं सकते




क्या जबरदस्ती कांग्रेस की झोली में डाल दी भोपाल संसदीय सीट? लोग कह रहे हैं "कौन प्रज्ञा ठाकुर? जब विवाद था तो स्थानियों में बेहतर और अनुभवी विश्वास सारंग या रमेश शर्मा (गुट्टू भैया ) को भी टिकिट दिया जा सकता था..

''भोपाल सीट से साध्‍वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को प्रत्‍याशी बना कर BJP ने इस सीट को देश की चर्चित लोकसभा सीटों में शामिल कर दिया है. जैसे जैसे टिकिट देने में BJP देरी करती गई, यह सीट पार्टी के लिए कठिन बनती चली गई. साथ ही असमंजस की स्थिति बनी तो जो जीत सके, ऐसा नाम भी पार्टी भूल गई. प्रारम्भ से ही BJP में एक नाम था, जो निश्चित रूप से जीत करा सकता था, लेकिन यह राजनीति है यहाँ वह होता है जो आप सोच नहीं सकते. भोपाल के पटियों पर यह हो रही है आज चर्चा ..'' 




बलभद्र मिश्रा     


प्रारम्भ से ही BJP में एक नाम था, जो निश्चित रूप से जीत करा सकता था, लेकिन यह राजनीति है यहाँ वह होता है जो आप सोच नहीं सकते. भोपाल सीट से पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री उमा भारती, मौजूदा सांसद आलोक संजर, विष्‍णुदत्‍त शर्मा और भोपाल महापौर आलोक शर्मा का नाम भी चर्चाओं में रहा. शिवराज-उमा ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि वे लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते. जानकारों की मानें तो वे भांप चुके हैं कि यहाँ से जीत संभव नहीं. विष्‍णुदत्‍त शर्मा खजुराहो से टिकिट लेने में कामयाब हो गए. 




कहा जा रहा है प्रज्ञा सिंह को अमित शाह नहीं चाहते थे, इस कारण चयन में देरी हुई, लेकिन जब कोई विकल्प ही नहीं बचा तो वह चुप हो गए. बाद में जब भगवा आतंकवाद की बात सामने आई तो अमित शाह ने ट्वीट किया, "राहुल गांधी और कांग्रेस देश को सुरक्षित नहीं कर सकते, वो तो बस हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद बोलकर पूरी दुनिया में हिंदू धर्म को बदनाम कर सकते हैं. भाजपा ने तय किया है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को भगवा आतंकवाद शब्द के जन्मदाता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारेगी." और तय हो गया. 


शिवराज सिंह और उमा भारती के इंकार के बाद एक मात्र विकल्प प्रज्ञा सिंह ही रह गया था. और भोपाल सीट से लोकसभा चुनाव के लिए प्रज्ञा सिंह को टिकट मिल गया. इस सबके बीच पार्टी में एक नाम और था, जो निश्चित रूप से जीत करा सकता था, लेकिन यह राजनीति है, यहाँ वह होता है, जो आप सोच नहीं सकते, किसी ने एक बार नाम तक नहीं लिया. भोपाल के पटियों पर आज ऐसे ही नाम विश्वास सारंग की चर्चा हो रही है. 

विश्वास सारंग स्थानीय नेता हैं. उनकी अल्पसंख्यक मतदाताओं, जिनकी सीट पर एक बड़ी संख्या है, पर पकड़ मजबूत है. वे हाल में भोपाल के नरेला से विधायक भी चुने गए हैं. कहा जा रहा है एक मात्र विश्वास सारंग पार्टी के लिए जिताऊ चेहरा थे, लेकिन उनका एक बार नाम तक नहीं लिया गया. इसी प्रकार से एक और नाम रमेश शर्मा (गुट्टू भैया) का भी आता है, जिन्हें टिकिट दिया जा सकता था, लेकिन यह राजनीति है, पता नहीं अन्दर की क्या बात है कि सीट जबरदस्ती कांग्रेस की झोली में डाल दी? लोग कह रहे हैं "कौन प्रज्ञा ठाकुर? यही कहा जाएगा यह राजनीति है दोस्त, यहाँ वह होता है, जो आप सोच नहीं सकते? 





प्रज्ञा सिंह को जहां प्रखर प्रवक्ता के तौर पर जाना जाता है वहीं राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ में भी उनकी खासी पकड़ है. प्रज्ञा सिंह पार्टी का हिन्दुत्व चेहरा भी हैं. इस चुनाव के जरिए उनका सक्रिय राजनीति में पहली बार प्रवेश होगा. इससे पहले वे मतदाताओं के बीच नहीं रहीं हैं. टिकिट देना तय हो गया तब उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई गई है.  


टिकिट में देरी का नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ सकता है. अब तक यहाँ से कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता दिग्विजय सिंह काफी पकड़ बना चुके हैं. सीट पर अल्पसंख्यक मतदाताओं की भी बड़ी संख्या है. इन पर कांग्रेस, दिग्विजय सिंह की पकड़ मजबूत है. जानकारों का कहना है कि अब BJP भोपाल सीट पर हिन्दू मतदाता के ध्रुवीकरण की कोशिश करेगी. कुल मिला कर भोपाल में धर्म जाति को लेकर गंदे एराज्नीति का मैदान बना दिया गया है. इस पर कांग्रेस के दिग्विजय सिंह ने भी शान्ति बनाये रखने के लिए सन्देश दिया है. उन्होंने प्रज्ञा का भोपाल में स्वागत की बात भी कही है. 




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