सिस्टम हमें लड़ना सिखाता है


जी हाँ, हमारा सिस्टम ही कुछ ऐसा बन गया है कि कोई भी काम में आगे बढ़ो, अटकाने वाले हजारों मिलेंगे. समस्तीपुर, बिहार का यह एक अकेला मामला नहीं है, बल्कि अक्सर इस तरह की घटनाएं लगभग रोज ही हमारे सामने आती रहती हैं. कभी कोई सामना कर जाता है तो कहानी बन जाती है कभी कोई सामना नहीं कर पाता तो टूट जाता है. 

समस्तीपुर, बिहार का एक परिवार, जो कि ऑटो ड्राइवर है, अपने बच्चे का EWS कोटे के तहत निजी स्कूल में दाखिला के लिए आया. फॉर्म भरा गया और चयन हुआ एरिया के एक बड़े स्कूल में, फिर स्कूल वाले तरह-तरह के कागज मांग कर परेशान करने लगे और देखने लगे कि फॉर्म में कहाँ कमी है. 

लेकिन फार्म भरने वाला भी कहाँ कम था? मामला बाल आयोग तक पहुंचा और स्कूल को दाखिला देना पड़ा. 


श्री अमर पहाड़ी जी बताते हैं, आज बच्चे के माता-पिता मिठाई लेकर आफिस तक पहुचे. उम्मीद है कि आगे बच्चे को कोई परेशानी नहीं होगी.

हम उम्मीद करते हैं सिस्टम के लोग आम जन की समस्याएं समझें, सिस्टम का जनहित में उपयोग करें न कि लोगों के विकास में रुकावट बनें. क्योंकि अन्यथा आप भी कहीं न कहीं सिस्टम के शिकार बनोगे... यही कहा जाएगा, हमारा यह सिस्टम हमें लड़ना सिखाता है. 

- चित्रांश 


Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc