विश्वविद्यालय पढ़ने के लिए ही होते हैं फिर छात्र राजनीति क्यों?


स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है छात्र राजनीति

कुछ लोगों का कहना है कि विश्वविद्यालयों के छात्र राजनीति क्यों करते हैं? विश्वविद्यालय तो पढ़ने के लिए होते हैं. यह सही है कि विश्वविद्यालय पढ़ने के लिए ही होते हैं, लेकिन क्या पढ़ने के लिए? 




डॉ रमेश यादवेंद्र अमेठी  

राजनीति देश चलाती है। वह आपकी जीवनचर्या, खाना पीना, पहनावा, सोच विचार सब तय करती है? आप रोज पौष्टिक आहार खाना चाहते हैं, लेकिन राजनीति आपको सड़ा गला खिलाना चाहती है, जिससे आप अपाहिज हो सकते हैं।

छात्रों को इस राजनीति के बारे में क्यों नहीं जानना चाहिए? हजारों छात्रों में कुछ को निकलकर राजनीति में क्यों नहीं आना चाहिए? छात्र पढ़कर कलेक्टर बनें फिर रामशंकर कठेरिया जैसे लोगों के मातहत काम करें जो मंच से दंगे का आह्वन करते है? उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीति घनघोर अपराधियों के हवाले है। छात्रों को आगे क्यों नहीं आना चाहिए? 

विपक्ष सिर्फ संसद में नहीं होना चाहिए। विपक्ष जनता के बीच भी होना चाहिए। छात्र आंदोलनों ने ही देश में कांग्रेस का वर्चस्व ध्वस्त किया और तमाम पार्टियां उभरीं। यह उभार दलितों और पिछड़ों का था। छात्र आंदोलन होंगे तो राजनीतिक विविधता आएगी । जिससे लोकतंत्र मजबूत होगा।

मेरी इच्छा है कि छात्र राजनीति से निकलें व पढ़े लिखे तमाम युवा सामने आएं, हर पार्टी में आएं. हमें स्वस्थ लोकतंत्र के लिए तार्किक बहसबाजों का हुजूम चाहिए.

यह दुखद है कि जो नेता और पार्टियां खुद छात्र आंदोलन से निकलीं, वे छात्र राजनीति पर प्रतिबंध लगाए हुए हैं. जेएनयू में मजबूत छात्रसंघ का नतीजा है कि उसने निर्भया, यूजीसी, रोहित वेमुला आदि मसलों पर बहुत जरूरी हस्तक्षेप किया. छात्र इस देश का नागरिक भी है और कल का भविष्य भी. उसे सिर्फ पोथी पढ़ने का समर्थन मत कीजिए, वरना आपकी संसद अपराधियों और जाहिलों से भरी होगी।

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a Comment

abc abc