न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने दी भ्रमित सलाह, शाकाहार परिषद् के अरविन्द जैन का दावा 'अंडा, मीट-मछली प्राकृतिक भोजन नहीं, विषाहार हैं'




भोपाल के प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक भास्कर के सिटी भास्कर के आज 29 अप्रैल के अंक में सेलिब्रिटी सुप्रसिद्ध खाद्य विशेषज्ञ न्यूट्रिशनिस्ट  Nutritionist पूजा मखीजा का साक्षात्कार प्रकाशित हुआ है. इसमें उन्होंने खान-पान को लेकर सलाह दी है. सलाह पर भोपाल की संस्था शाकाहार परिषद् के संरक्षक अरविन्द जैन ने दावा किया है कि 'अंडा, मीट-मछली पर उनके द्वारा दी गई सलाह भर्मित करती है, ये प्राकृतिक भोजन नहीं, विषाहार हैं' 
सोचने वाली बात तो है कि जब हम बीमार होते हैं, तब हम फल fruit दाल-रोटी सब्जी खाते हैं या अंडा, मीट-मछली खाते हैं?
इसके साथ उन्होंने सलाह दी है कि शरीर की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाने विटामिन बी 12 और जिंक के साथ मीट, अंडे, मछली और दूध से मिलता है, वहीं मीट और अंडे-मछली के अलावा काजू-बादाम, चना, मटर सोया प्रॉडक्ट्स में जिंक मिलता है. इसके साथ पूजा ने इस बात की वकालत की कि संतुलित आहार दाल रोटी सब्जी से ही शक्ति मिलती है. इसके अलावा साक्षात्कार में उन्होंने कोर्बोहड्रेट पर भी योग्य प्रकाश डाला. आपने ऑर्गनिक सब्जी अन्न का उपयोग करने की सलाह दी. 



न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा ने साक्षात्कार पर भोपाल से शाकाहार परिषद् के संरक्षक डॉ. अरविन्द जैन ने कहा है वीगन फ़ूड, सलाद और सब्जियों का रस, यहाँ तक की बात बहुत हद तक ठीक और अनुकरणीय, मान्य है, लेकिन उन्होंने बच्चों के लिए नाश्ता में प्रोटीन के लिए अंकुरित अन्न, पोहा आदि के साथ अंडे का उपयोग करने की जो सलाह दी है, वह उन पर प्रश्न चिन्ह लगाती है. 

श्री जैन का दावा है कि साक्षात्कार में न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा के द्वारा अंडा, मीट-मछली के उपयोग के बारे में जो सलाह दी और प्रेरित किया गया है, यह अवैज्ञानिक है और दोनों विपरीत धुर्व हैं. उन्होंने कहा है कि मेरे द्वारा वर्ष 1985 से शाकाहार, अहिंसा, जीव दया के क्षेत्र में काम किया जा रहा है और मेरे पास दस्तावेजी साक्ष्य हैं, जिनमें स्पष्ट इंगित किया गया है कि अंडा, मीट-मछली प्राकृतिक भोजन नहीं हैं, ये स्वास्थ्य के लिए पूर्णतः हानिकारक हैं. इन्हें विषाहार कहा जाता है. ये स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते है और कैंसर, हृदय, किडनी आदि गंभीर बीमारियों को जन्म देते हैं.  



100% प्रोटीन अधिक और सस्ते में    
हमारे पास प्रोटीन के लिए जैसा डॉ. अरविन्द जैन ने बताया सोया और चना के साथ मूंगफली से आपको 100% प्रोटीन अधिक और सस्ते में मिलेगा. इसे एक उदाहरण से देखिये- 
100 ग्राम सोयाबीन में 45.2 ग्राम प्रोटीन मिलता है. मूंगफली में 32.5 ग्राम प्रोटीन और चना में 23.5 ग्राम प्रोटीन मिलता है. इसी प्रकार 300 ग्राम में आपको 100 ग्राम प्रोटीन मिलेगा, इसके अलावा आर्थिक रूप से देखें तो 100 ग्राम सोयाबीन 5 रुपये, मूंगफली 15 रुपये और चना 15 रुपये, इस प्रकार 35 रुपये में आपको 100 ग्राम शुद्ध प्रोटीन के अलावा अन्य खनिज तत्व मिलते हैं, जबकि अंडा 100 ग्राम में 14.3 ग्राम प्रोटीन, एक अंडा का वजन 25 ग्राम तो 4 अण्डों में 14.3 ग्राम प्रोटीन और सौ ग्राम अंडे से प्रोटीन पाने के लिए लगभग 30 अंडे लगेंगे, जिनकी कीमत 6 रुपये के हिसाब से 180 रुपये खर्च करने पड़ेंगे और अशुद्ध, हानिकारक तत्व मिलेंगे, इसी प्रकार मछली और मांस में भी प्रोटीन नगण्य होता है और महंगा के साथ मौत का आमंत्रण होता है.

डॉ. अरविन्द जैन बताते हैं इस विषय पर बहुत शोध और साहित्य उपलब्ध है, जिससे सिद्ध होता है कि अंडा, मछली और अंडा सामान्यतः स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं, जबकि उनके विकल्प हमारे पास बहुत प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं. 

श्री जैन कहते हैं वैसे भी जब हम अहिंसा प्रधान देश के निवासी हैं, तो हमें अधिकतम शाकाहार का प्रयोग करना चाहिए. वैसे खान-पान व्यक्तिगत विषय हैं, पर जन सामान्य को ऐसी बातों के लिए प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए, जिनसे असाध्य बीमारियां ही फैलती हैं और जिनका इलाज मौत है. विचार करें, जब हम बीमार होते हैं, तब हम फल fruit, दाल-रोटी, सब्जी खाते हैं या अंडा, मीट-मछली खाते हैं!

* डॉ. अरविन्द जैन उपन्यासकार होकर शाकाहार परिषद् भोपाल के संरक्षक हैं. उनके इस दावे पर आप कुछ कहना चाहें, अपने कोई विचार रखना चाहें तो नीचे कमेन्ट बॉक्स में कमेन्ट करके या हमें 
digitalindia18news@gmail.com या सीधे लेखक को drarvindkumarjain1951@gmail.com पर मेल कर सकते हैं.







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