जुमले फेंकना आवश्यक नहीं, लोगों को खुश करने वाली बातों के बिना भी जीता जा सकता है


''चुनाव जीतने के लिए जुमले फेंकना आवश्यक नहीं, जैसा कि हमारे देश में माननीय फरमाते हैं. लोगों को खुश करने वाली बातें किए बिना भी चुनाव जीता जा सकता है. सच कहकर, बिना आक्रामक हुए और किसी पर निजी हमला किए बिना भी लोगों का सपोर्ट हासिल किया जा सकता है.''



यह कहना है हाल ही में स्लोवाकिया की पहली महिला राष्ट्रपति जुजाना कापुतोवा का. हमारे देश भारत में चुनाव चल रहे हैं, इस सन्दर्भ में ये जानना हम सब आम जनता के लिए बेहतर होगा, वजह समझें और हमारे राजनेता भी इस तरफ ध्यान दें, तो यह हम सबके लिए बेहतर होगा.
  
हाल ही में स्लोवाकिया की पहली महिला राष्ट्रपति जुजाना कापुतोवा चुनी गयी हैं. पेशे से वकील 45 वर्षीय जुजाना को कोई राजनीतिक अनुभव नहीं है. वे केवल भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता रही हैं. उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के सेफकोविक को मात दी. वे तलाक शुदा हैं और दो बच्चों की माँ है. आखिर ऐसी क्या विशेषता रही ज़ुजेना में कि वे अनुभवी उम्मीदवार को पराजित कर सकीं? 

उनके चुनावी मुद्दे ज़मीनी और ज़रूरी थे   
उनके चुनावी मुद्दे ज़मीनी और ज़रूरी थे, जैसे उन्होंने भ्रष्टाचार और राजनेताओं के अपराधों को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया था.

फरवरी 2018 में दो पत्रकारों 26 वर्षीय जेन कोसियाक और उसकी दोस्त मार्टिना कुस्निरोवा की हत्या कर दी गयी थी. इस हत्या से जुजाना कापुतोवा इस कदर विचलित हो गईं कि उन्होंने इस डबल मर्डर को एक मॉस मूवमेंट में तब्दील कर दिया. उनके साथ बड़ी तादाद में लोग सडक पर उतर आये. तब उन्हें लगा कि उन्हें राजनीति में आना चाहिए.

जिस पत्रकार जोड़ी की हत्या हुई वे एक बड़ी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट पर काम कर रहे थे. यहाँ हमें याद करना होगा मुंबई के वरिष्ठ और जाने माने पत्रकार ज्योतिर्मय डे को जो एक ऐसे ही मामले की तफ्तीश कर रहे थे और उन्हें सरे आम गोलियों से भून दिया गया था. कोई नागरिक सामने नहीं आया. हालाकि पत्रकारों ने काली पट्टियां बांधकर इस घटना का विरोध किया था लेकिन क्या उतना पर्याप्त था? किसी एक्टीविस्ट अथवा तथाकथित नेता (यदि वे स्वयं को वास्तव में मानवतावादी और राष्ट्रवादी कहते हैं) तो उन्हें बाकायदा इस दुर्घटना को एक मुहीम के रूप में नहीं चलाना चाहिए था? हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग नहीं करनी चाहिए थी? खैर इफरात ऐसे इमानदार और जुझारू पत्रकार हैं जिनकी ह्त्या ऐसे ही की गयी है लेकिन हमारे राजनेताओं की चिंताएं अलग हैं. और हमारे संविधान और क़ानून की प्राथमिकताएं और विवशताएँ अलग.

स्लोवाकिया की हाल ही में चुनी गयी राष्ट्रपति जुज़ेना एक एक्टीविस्ट, ऐनवॉयरमेंटल वकील हैं तथा देश की एक जागरूक और निर्भीक नागरिक हैं. उन्होंने कई वर्षों तक प्रदूषण पर विषैले पर्यावरण के खिलाफ लम्बी मुहीम चलाई. उनका कहना था कि जहाँ लोग रहते हैं वहां जहरीली गैस निकलने वाले कारखाने. शहर का कूड़ा फेंकने का स्थान या किसी भी प्रकार का वायु, जल , ध्वनी आदि प्रदूषण नहीं होना चाहिए. और जब तक उनके इस आन्दोलन पर उचित कार्यवाही नहीं हुई, वे आन्दोलन करती रहीं. 

उन्होंने एक भाषण में कहा आप अपने विरोधी पर हमलावर हुए बिना भी जीत सकते हैं. शायद लोगों ने सोचा था कि राजनीति में न्याय और निष्पक्षता की बात करना कमज़ोरी की निशानी है. आज हम देख रहे हैं कि असल में ये चीजें हमारी ताकत हैं.

चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा   
उन चीजों पर ध्यान दीजिए, जो हमें आपस में जोड़ती हैं. निजी हितों से ऊपर उठकर आपसी सहयोग और भागीदारी पर जोर दीजिए. मैं न केवल चुनाव के नतीजों से खुश हूं, बल्कि मुझे इस बात की ज्यादा खुशी है कि बिना लोगों को खुश करने वाली बातें किए बिना भी चुनाव जीता जा सकता है. सच कहकर, बिना आक्रामक हुए और किसी पर निजी हमला किए बिना भी लोगों का सपोर्ट हासिल किया जा सकता है''.

जुजाना को राजनीति का कोई अनुभव नहीं, किसी दल में शामिल नहीं, लेकिन एक दिन वो देश के सर्वोच्च पद पर चुनी जाती हैं? वजह समझें और हमारे राजनेता भी इस तरफ ध्यान दें...
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News Digital India 18

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