राफेल पर सरकार का यू-टर्न, अब कहा 'चोरी नहीं हुए राफेल के दस्तावेज'


''राफेल के 'पेपर चोरी' मामले में सरकार ने यू-टर्न ले लिया है. अब अटॉर्नी जनरल कह रहे हैं कि कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने जिन तीन दस्तावेजों को पेश किया, वे वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी थे, राफेल के  कोई दस्तावेज चोरी नहीं हुए हैं.''

देश मजबूत हाथों में है और सुरक्षित है, लेकिन रक्षा मत्रालय से ही राफेल के 'पेपर चोरी' हो जाएँ तो कैसी सुरक्षा? विपक्ष सरकार पर हावी होने लगा. सवाल उठे कि रक्षा मंत्रालय से पेपर ही चोरी हो गए फिर देश कैसे सुरक्षित हाथों में है? सारे विपक्ष सहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और पीएम मोदी को जम कर घेरा. आखिरकार सरकार ने भी चोरी की अपनी बात से यू-टर्न ले लिया. अब अटॉर्नी जनरल कह रहे हैं कि कोर्ट में याचिकाकर्ताओं ने जिन तीन दस्तावेजों को पेश किया, वे वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी थे, राफेल के दस्तावेज कोई चोरी नहीं हुए हैं.

अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने आज शुक्रवार को दावा किया कि राफेल से संबंधित दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चोरी नहीं हुए हैं, और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए अपने जवाब में उनका मतलब था कि याचिकाकर्ताओं ने अपनी ऐप्लिकेशन में 'वास्तविक कागजातों की फोटोकॉपी' का इस्तेमाल किया। 

उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में वेणुगोपाल के 'पेपर चोरी' होने संबंधी बयान के बाद से विपक्ष सरकार पर हावी हो गया है। इस बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला। राहुल ने मांग की कि इतने महत्वपूर्ण संवेदनशील कागजात पेपर के चोरी होने की आपराधिक जांच होनी चाहिए। 

अब अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कहा 'विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट में बहस के दौरान कहा गया था कि राफेल से संबंधित पेपर रक्षा मंत्रालय से चोरी हुए हैं। यह पूरी तरह गलत है। कागजात चोरी होने संबंधित बयान पूरी तरह गलत हैं।' 

अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पुनर्विचार याचिका में राफेल डील से संबंधित तीन दस्तावेज पेश किए, जो वास्तविक दस्तावेजों की फोटोकॉपी थे. लेकिन अटॉर्नी जनरल द्वारा इन्हें असली मानकर चोरी जैसी बात कर देने से विपक्ष सरकार पर हावी हुआ और इस गलती के लिए सरकार को परेशानी का सामना करना पड़ा है.  अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि अटॉर्नी जनरल द्वारा 'चोरी' शब्द के इस्तेमाल से बचा जा सकता था। 

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