राफेल, बोफोर्स और नगर सेठ का हार्ट अटैक

 बस ऐसे ही नीयत पर थोड़ा सा संदेह 


''एयर स्ट्राइक के बाद पीएम मोदी ने कहा कि अगर आज राफेल होता तो परिणाम कुछ और होते.''

एक नगर सेठ को गंभीर हार्ट अटैक आने पर देश के सबसे अच्छे अस्पताल में इलाज कराने का फैसला किया गया. एक बेटे ने पूछताछ की तो सबसे अच्छी सुविधाओ, सबसे अच्छे इलाज और बायपास सर्जरी सहित पूरे इलाज का खर्च 10 लाख रुपए बताया गया. लेकिन इलाज के समय किन्हीं कारणों से पहले बेटे की बजाय दूसरे बेटे को सेठ जी के साथ जाना पड़ा. वहां से वापस आने पर उसने परिवार के सामने 30 लाख रुपए खर्च होने के बिल प्रस्तुत कर दिए. 

जब उसी अस्पताल में पहले से तय खर्च से 3 गुना खर्च होने पर सवाल पूछे गए तो उसने कहा "पिताजी की जान को खतरा था इसीलिए अच्छे से अच्छे इलाज की जरूरत थी, खर्च हों गया. मैंने पिताजी की जान बचाई और सब लोग मेरी नीयत पर संदेह कर रहे हैं."

क्या आपको लगता है कि जान के जोखिम का डर दिखाकर दूसरा बेटा सच बोल रहा है? और परिवार के दूसरे लोगों को उससे सवाल नहीं पूछने चाहिए? ऐसा करना क्या अपराध है? और सच का पता लगाना सिर्फ इसीलिए छोड़ देना चाहिये क्योंकि उस वक्त सेठ जी का अच्छे से अच्छा इलाज परिवार की जरूरत थी.

बस ऐसे ही राफेल के बारे में विचार करिये. राफेल अच्छा नहीं बहुत अच्छा है तो क्या इस वजह से देश की सुरक्षा के नाम पर इमोशनल ब्लैकमेल करके उसमें हो रही कमीशन खोरी को जायज ठहराएंगे? बोफोर्स तोप भी बहुत अच्छी थी कारगिल की लड़ाई में तो उसने अपने जौहर भी दिखा दिए, तो क्या उसकी कमीशन खोरी जायज थी? अगर कुछ हुई थी तो.

अनिल जैन जी की फेसबुक वाल से 


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News Digital India 18

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