असली देश भक्त मुर्तज़ा अली, ज्ञान बघारने वाले अपने आप से पूछें, सैनिक को बैठने कभी अपनी सीट भी दी?



''किसी में आंख की शर्म भी बची है! जितना ज्ञान लोग बांट रहें हैं उनसे पूछो ज़रा कि सैनिक को अपनी सीट भी बैठने को भी दी क्या?''
- मदनकुमार 
असली देश भक्त मुर्तज़ा अली है, जो मुद्दों पर काम कर रहें हैं और आज 110 करोड़ दान भी दे रहें हैं और देश से पलायन भी नहीं किया, अमेरिका भी नहीं गए कहीं गुलामी करने. 

कोई संख्या नहीं पूछ रहे, ना शवयात्रा में जाने पर टसुए बहा रहें ना ही चैनल्स की भीड़ और एंकर्स के साथ इश्क मुहब्बत कर विशेषज्ञ बन रहे, बस काम और जुनून अपनी कमजोरी के साथ. 

कोई बताएँ किसी अम्बानी, अडानी, टाटा-बिड़ला या गोदरेज ने दिए क्या एक रुपया भी. 

और देख लें कि वे आंखों से भी कमज़ोर हैं और मेहनतकश हैं और धीर गम्भीर भी. भद्दा मजाक नहीं करते, ना किसी का मजाक उड़ाते हैं.  

किसी में आंख की शर्म भी बची है! जितना ज्ञान लोग बांट रहें हैं उनसे पूछो ज़रा कि सैनिक को अपनी सीट भी बैठने को भी दी क्या?

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News Digital India 18

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