कहाँ खो गईं दादी और नानी की बच्चों को प्रेरित करने वाली वह कहानियां





''संयुक्त परिवार में दादी-नानी की कहानियां बच्चे के लिए बहुत महत्वपूर्ण थीं, जो आज एकल परिवार में कहीं ना कहीं विलुप्त हो गई हैं. यह कमी बच्चों में समस्याओं के लिए काफी हद तक जिम्मेवार है. दादी और नानी हमेशा खाली समय में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कहानियां सुनाती रहती थीं. वह कहानियां परियों की और राजकुमार की और बहादुर राजाओं की होती थीं, जिनसे बच्चे हमेशा प्रेरित रहते थे और उन्हें कुछ नया करने का प्रोत्साहन और साहस मिलता था।'' 




- संध्या चतुर्वेदी
   अहमदाबाद, गुजरात


आजकल के आधुनिक युग में जहां एक समाज में ज्वाइंट फैमिली यानी संयुक्त परिवार लुप्त हो गए हैं और सिर्फ एकल परिवार रह गए हैं। एकल परिवार में पति, पत्नी और बच्चे शामिल होते हैं। पहले जब परिवार को परिभाषित किया जाता था तो परिवार में दादी, दादा जी, चाची और चाचा जी और ताऊ जी, ताई जी शामिल होते थे, तो वहाँ अक्सर बच्चों को संभालना दादी और नानी की जिम्मेदारी होती थी। तो वह हमेशा खाली समय में बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए कहानियां सुनाती रहती थी। वह कहानियां परियों की और राजकुमार की और बहादुर राजाओं की होती थीं, जिनसे बच्चे हमेशा प्रेरित रहते थे और उन्हें कुछ नया करने का प्रोत्साहन और साहस मिलता था। 

आज कल जहां एक ओर समाज में संयुक्त परिवार लुप्त हो गए हैं। उसका गलत प्रभाव बच्चों पर इस तरह से पड़ रहा है। वह अकेले पड़ जाते हैं। पति-पत्नी दोनों अपनी जिंदगी में इतना व्यस्त होते हैं कि उनके पास बच्चों को देने के लिए समय नहीं। दोनों ही अपनी-अपनी जॉब पर जाते हैं और आप वापस आ कर थक कर सो जाते हैं। ऐसे में बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है और परिणामस्वरूप  हतोत्साहित हो जाता है, फिर जरूरत पड़ती है, उसे उत्साहित करने के लिए जागरूक बनाने के लिए, नई ऊर्जा भरने के लिए मोटिवेशनल क्लास की। 


क्या आपने कभी किसी ने सोचा है कि जब हम संयुक्त परिवार में रहते थे तो हम में से किसी को भी मोटिवेशन क्लासेस की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि वह मोटिवेशन का काम, हमें अपनी दादी की कहानियां करती थी और आज  दादी मां के पास बैठने का समय में के अभाव के कारण बच्चे को मोटिवेशनल वीडियो देखने पड़ते हैं। उसे मोटिवेशन क्लास में पढ़ती है और क्या होता है इन क्लासेस में, एक कहानी सुनाई जाती है। 

आपको बताते हैं कि आपको किस तरह से लड़ना है अपने जीवन में। कहानियों की जरूरत पड़ती है क्योंकि दादी नानी की कहानियां नहीं है। वो कहीं गुम हो गई हैं। बच्चे स्कूल जाते हैं, फिर एक्स्ट्रा क्लासेस रहती हैं। उन सब में कहीं ना कहीं उनकी ऊर्जा खो जाती है और वह छोटी सी उम्र में डिप्रेशन यानी तनाव के शिकार हो जाते हैं और उनका कॉन्फिडेंस लेवल गिर जाता है। वह अपनी स्वयं की शक्तियों को नहीं समझ पाते और इसलिए छोटी उम्र में ही  हतोत्साहित हो, कई बार गलत कदम उठा लेते हैं। कुछ तो सुसाइड तक कर लेते हैं। 

संयुक्त परिवार में दादी-नानी की कहानियां बच्चे के लिए बहुत महत्वपूर्ण थीं, जो आज एकल परिवार में कहीं ना कहीं विलुप्त हो गई हैं. यह कमी बच्चों में समस्याओं के लिए काफी हद तक जिम्मेवार है.   




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