देश की राजनीति पार्टी के नफ़ा नुकसान पर केन्द्रित, मुद्दा कोई भी हो, राजनेता हैं तो राजनीति करेंगे ही, क्या सेना के दम पर सत्ता में वापिसी का मार्ग खोज रही भाजपा





''पुलवामा हमले के बाद से ही हमारे देश की राजनीति भारत-पाक युद्ध की चर्चाएँ और इससे पार्टी के लिये क्या नफ़ा नुकसान हो सकता है पर केन्द्रित होकर रह गई है. विपक्ष ने बहुत धीर रखा कि भैया इस मुद्दे पर चुप रहना है, लेकिन आखिर कब तक रहता? सो अब सबूत मांगे जाने लगे हैं. अमित शाह कहते हैं वोट बैंक की राजनीति आपको मुबारक. कहा जा सकता है मुद्दा कोई भी हो, राजनेता हैं तो राजनीति करने से कैसे रह सकते हैं? बीजेपी की रैली के बाद और आज धिक्कार सभाओं के बाद माना जा रहा है यह राजनीति और तेज होगी...'' 
- राकेश तिवारी    

अभिनन्दन की वापिसी के बाद कल बीजेपी द्वारा लोकसभा चुनाव में एक बार पुनः सरकार बनाने के संकल्प के साथ देश भर में विजय संकल्प रैली निकाली गई. रैली में भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा पार्टी ध्वज लहरा कर जीत का संकल्प लिया गया. रैली में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुनः प्रधानमंत्री बनाने को लेकर गगनभेदी नारे भी लगाए. रैली में लगभग सभी जगहों पर जैसा कि होता आया है यातायात नियमों का जमकर उल्लंघन भी हुआ. 


हेलमेट नहीं के पीछे बजह बता रहे 'खुद की रक्षा से ज्यादा जरूरी देश की रक्षा है'
लोकसभा चुनाव में मिशन 25 को हासिल करने के लिए आज शनिवार को देश भर में बीजेपी की ओर से निकाली गई विजय संकल्प रैली में जमकर यातायात नियमों का उल्लघंन किया गया. रैलियों में कई दुपहिया वाहन चालक ऐसे थे, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहने थे. जब इस मसले पर उनसे पूछा गया तो उनके जवाब काफी रोचक और हैरान करने वाले थे. किसी ने कहा कि खुद की रक्षा से ज्यादा जरूरी देश की रक्षा है तो किसी ने कहा कि यह छोटा मुद्दा है. इस प्रकार रैली को हाल की सेना की जीत से जोड़कर बता दिया गया. 

बीजेपी के अपने कार्यकर्ता भी दबे स्वर में मानते हैं कि ऐसे वक्त में यह रैली नहीं होनी चाहिए थी, बेहतर होता कि हम राष्ट्रीय ध्वज के साथ राष्ट्रीय सम्मान, गौरव, राष्ट्रीय भावना पैदा करने, राष्ट्र भक्ति के लिए यह करते. कहा जा सकता है सेना के दम पर सत्ता में वापिसी का मार्ग खोज रही बीजेपी के लिए यही बजह घाटे का सौदा भी साबित हो सकती है.



आबिद फ़ातिमी की इस पोस्ट पर Seema Rai Dwivedi लिखती हैं 'ऐसे लाखों पिक पड़ी हैं सोशल साइट्स पर... भारत का वोटर अपना लक्ष्य जानता हैं वो इन चोचलों में नहीं आने वाला''

असल में पुलवामा हमले के बाद से ही हमारे देश की राजनीति भारत-पाक युद्ध की चर्चाएँ और इससे पार्टी के लिये क्या नफ़ा नुकसान हो सकता है पर केन्द्रित होकर रह गई है. विपक्ष ने बहुत धीर रखा कि भैया इस मुद्दे पर चुप रहना है, लेकिन आखिर कब तक रहता? सो अब सबूत मांगे जाने लगे हैं. बंगाल की ममता बनर्जी के बाद अब मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा है कि सबूत देकर सरकार मुंह पर तमाचा क्यों नहीं मार देती? वहीं बीजेपी चुनाव से ज्यादा देश की सुरक्षा जरूरी जैसी बात कर रही है. 


एयर स्ट्राइक पर विपक्ष के नेताओं के सवाल उठाने पर अमित शाह कहते हैं वोट बैंक की राजनीति आपको मुबारक. इसी के साथ आज बीजेपी विपक्ष के नेताओं के सवाल उठाने पर धिक्कार सभाएं करने का एलान किये है. कुल मिला कर कहा जा सकता है हमारे राजनेता मुद्दा कोई भी हो, राजनेता हैं तो राजनीति करने से कैसे रह सकते हैं? बीजेपी की रैली के बाद और आज धिक्कार सभाओं के बाद माना जा रहा है यह राजनीति और तेज होगी...


सोशल मीडिया पर भी लोग रैली की पोस्टों पर प्रतिक्रिया में रैली को हाल की घटना से जोड़कर देख रहे हैं.. देखिये - 


Krishnapal Singh Chandrawat हम कमल का बटन ऐसे दबाएंगे, जैसे आतंकवादियों का गला दबा रहे हैं..

Aayush Vijayvargiya पाकिस्तान की जिसने ठोकी, उसका नाम नरेंद्र मोदी 💪💪💪

Ajay Tiwari नरेंद्र मोदी कमल निशान, मांग रहा है हिंदुस्तान


और अंत में     
अबके विभीषण लाया संजीवनी!

बिल्ली के भाग्य से छींका नहीं टूटा, बल्कि सीधे चूहों को सुपारी दी गई रस्सी कुतरने के लिए। उधर धड़ाम..! और इधर मन में लड्डू फूट रहे। अब चिंटुओं की सैल अभियान चलायेगी । 'एक वोट = एक पाकिस्तानी का सिर'। बीस करोड़ वोट में पूरा पाकिस्तान साफ। कहीं देखा है ऐसा 'पूर्ण स्वदेशी राष्ट्रवाद' ।

'दामन में कोई दाग न खंजर पे कोई छींट

तुम क़त्ल करे हो कि करामात करे हो'



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