सेना के नाम पर राजनीति करने में बीजेपी सबसे आगे





पुलवामा हमले के बाद से ही हमारे देश की राजनीति भारत-पाक युद्ध की चर्चाएँ और इससे पार्टी के लिये क्या नफ़ा नुकसान हो सकता है पर केन्द्रित होकर रह गई है. केंद्र की मोदी सरकार का विपक्ष के बारे में कहना रहा कि सेना के नाम पर राजनीत न करे और मोदी विरोध में देश के खिलाफ न हो जाये, लेकिन सेना के नाम पर राजनीति नहीं करें कहने वाली बीजेपी खुद ही सबसे ज्यादा राजनीति करती नजर आई.  



सर्जिकल स्ट्राइकर और सेना के नाम पर राजनीति न करें. यह अधिकार केवल भाजपा के लिए सुरक्षित है.  

असली देशभक्त सेना के साथ खड़े थे और खड़े हैं, क्योंकि देशभक्त जानते हैं कि नेता तो 5, 10 सालों में बदलते रहते हैं. सेना तब तक है, जब तक देश है और देश तब तक है, जबतक सेना है, पर बीजेपी वालों का भरोसा नहीं हैं. ये कल नहीं थे, पर आज हैं, फिर कल रहें या न रहें, इस लिहाज से उनके लिए हर मुददे का प्रचार-प्रसार जरूरी है और आप भक्त नहीं देशभक्त बनो. 

इस प्रकार से बताते हुए सभी चित्र एक सोशल मीडिया यूजर RP विशाल ने फेसबुक पर शेयर किये हैं. देखिये होर्डिंग्स और ख़बरें - 



















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News Digital India 18

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