यह कैसी दुनिया बना दी है हमने, मोहब्बतों के देश में नफरत की पहली आंधी


''मेरे लिए न्यूजीलैंड मोहब्बतों का देश है. क्राइसचर्च इस देश के दिल की धड़कन. यहां की मस्जिद में हुआ हमला मोहब्बतों के देश में नफरत की पहली आंधी है.'' 


श्रुति अग्रवाल 

सोच सकते हैं कैसी दुनिया बना दी है हमने. यदि एक तरफ उग्रवाद-आतंकवाद है तो इसी का बायप्रोडक्ट चरमपंथ भी है. चरमपंथी ने क्राइसचर्च में मस्जिद पर हमला बोला और खुले में गोलाबारी कर कई लोगों को मार दिया. नफरत के बीज बोने वाले अब तो संभल जाएं. ये नफरत विषबेल है, जिसके ऊपर पनपती है, उसको भी नहीं बख्शती. हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती है. अकसर क्रिया से ज्यादा भयावह.



किसी भी हद पर जाकर माओरी कल्चर को बचाने की कोशिश न्यूजीलैंड में जारी है. बिना भेदभाव के सारे बच्चे माओरी सीखते हैं. हाका में तो जान बसती है.

न्यूजीलैंड के क्राइसचर्च की मस्जिद में हुआ हमला, दिल दहलाने वाला है. हम दुनिया के किसी भी हिस्से को अपने बच्चों के रहने के लिए नहीं छोड़ेंगे. रही हूं इस देश में चार-पांच साल हमेशा अपने आस-पास हंसते-मुस्कुराते चेहरे देखे हैं. सड़क पर घूमते समय अंजान भी आपको स्नेहसिक्त मुस्कान देते हैं. वे आपकी वेषभूषा पर कभी कमेंट नहीं करते. वे आपको अपने अंदर दूध में चीनी की तरह मिलाना जानते हैं. 

रगबी के बाद न्यूजीलैंड के लोग क्रिकेट के दिवाने है. आज उसी खेल को निशाना बनाया गया. आयुष और उसके दोस्त..

वहां के स्कूलों में बच्चों को सिर्फ स्नेह और सम्मान सिखाया जाता है. मेरी दोनों माँओं के लिए वहां रहना बेहद सहज-सहल था, इतना खुश मैंने उन्हें कभी लंदन में नहीं देखा. मेरे लिए न्यूजीलैंड एक ऐसा देश है जहां के बच्चों की रगों में अब तक नफरत का जहर नहीं घुला है. उन्हें बाइबल या माओरी भाषा भी उनकी इच्छा के अनुसार पढ़ाई जाती है अन्यथा बच्चों पर - बचपन पर कोई दबाव नहीं. वे स्कूल में साइकिल के पहिए चला सकते हैं. तितलियां पकड़ सकते हैं, कीचड़ में खेल सकते हैं. न्यूजीलैंड का एतिहासिक शहर क्राइसचर्च इससे पहले भूकंप में बरबाद हुआ था उसके पुरातत्विक महत्व का चर्च और इमारतों को नुकसान पहुंचा था आज उसकी आत्मा को नुकसान पहुंचा है.

सड़क के किनारे बच्चे अपनी प्रतियोगिता के लिए पैसे जमा करते या अपनी कला का प्रदर्शन करते मिल जाएंगे. मजाल है कोई बच्चों को चिढ़ा दे या भद्दे कमेंट कर दे.

दिनदहाड़े पागलपन से ग्रस्त 28 साल के युवा ने मस्जिद पर हमला किया है यह हमला लोगों पर नहीं न्यू जील से बने लैंड ( ( नए उत्साह से बनी जमीन) की आत्मा पर हुआ है. इस देश को द्वतीय विश्वयुद्ध से तंग आ चुके लोगों ने प्रेम और स्नेह के बीज बोकर बनाया है. जितनी भी देशों में भटकी हूं उनमें से न्यूजीलैंड ही ऐसा है जहां मैं अपने भारत के अलावा बसने का सोच सकती हूं. 



यहां का बचपन देख मैं हमेशा कहती थी. मेरी बेटी होती तो कुछ भी हो जाता मैं न्यूजीलैंड में ही रहती. यहां का बचपन सच बेहद सुंदर है.

यहां बच्चे आराम से अपना बचपना जी सकते हैं.बड़े इज्जत से काम कर सकते हैं और बुढ़ापा  वो सबसे सुखद है. सरकारी अस्पताल हमारे प्राइवेट अस्पतालों से कहीं बेहतर हैं. आपको यहां बुजुर्ग भी DIY ( डू इट बाय योर सैल्फ ) करते हुए दिख जाएंगें. मैं कई बुजुर्गों के घर ब्रेड एंड ब्रेकफास्ट में रही हूं मार्था जैसी बुजुर्ग महिलाएं भी मिली हैं. जो 80 वे वसंत में भी हमसे जवान है. बच्चे अपने अपने अलग घरोंदे बसा चुके हैं, लेकिन मार्था पति के बनाए घर में रहती हैं. रोज मेहमानों की आवभगत करती हैं, उससे मिले पैसों से अपने जैसे अन्य बुजुर्गों का ध्यान रखती हैं किस्सों से भरा है न्यूजीलैंड और उसका क्राइसचर्च. 

न्यूजीलैंड में आप बुजुर्ग जोड़ों को भी एडवेंचर की जगह पर आराम से घूमते-सुस्सताते देख सकेत हैं. इस देश में कहीं भी टेंट लगा लीजिए. खतरा नहीं. आज राक्षस ने घर देख लिया. 
इस देश में इतना प्यार और अपनापन है कि यहां के शीर्ष पद पर विराजित प्रधानमंत्री जान-की सिर्फ बच्चों और परिवार के लिए अपना पद छोड़ सकते हैं. देखा है उन्हें भूकंप के समय क्राइसचर्च में काम करते हुए. बलमूड़ा पहने बेहद आम इंसान की तरह, अपने लोगों का ख्याल रखते हुए. कोई मिस्टर प्राइममिनिस्टर का टशन नहीं ना आगे-पीछे घूमने वाली फौज. 

यहां के स्कूल में सिर्फ प्यार ही सिखाया गया है. बच्चों की रगों में सिर्फ प्यार बहता है यहां.
हाल ही मैं वहां की प्रधानमंत्री जेसिंदा आरड्रेन मीटिंग्स में अपने नवजात को साथ लेकर जाती हैं, दूध पिलाती हैं. इस देश में रहकर आप समझ सकते हैं जीवन सिर्फ और सिर्फ सुंदर और मुस्कुराता होता है. आज इस देश को राक्षस की नजर लगी है मैं तो काला टीका भी नहीं कह सकती क्योंकि नफरत का जहर बोने वाले भूल रहे हैं, इस जहर का पान दुनिया के साथ-साथ उनकी अपनी पीढ़ियां भी करेंगी.

सही तो कह रही हैं प्रधानमंत्री जेसिंदा आरड्रेन इस तरह की नफरत के जहर के साथ जीने वाले लोगों के लिए न्यूजीलैंड में कोई जगह नहीं, ऐसे लोगों के लिए पूरी दुनिया में कोई जगह नहीं.  





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