'संत सियाराम' बाबाजी, ये सन्यासी वास्तव में 'सच्चे संत' हैं


''कुछ बाबा, सन्यासी इन के नाम पर कलंक होते हैं. दूसरों को ज्ञान देने वाले इन्हें खुद नहीं पता होता कि सब यहीं रह जाना है. मंत्री पद और गाड़ियों का शौक पाल लेते हैं, उनके पीछे भागते रहते हैं, और एक यह हैं, जिम्हें नमन करने को हर किसी का जी चाहता है. जी हाँ, ये सन्यासी वास्तव में 'सच्चे संत' हैं.''
 - गिरधारी यादव     

मध्यप्रदेश के खरगौन के पास ही ग्राम भट्टयान के 'संत सियाराम' बाबाजी हैं, जहाँ माँ नर्मदा नदी भी निर्मल जल की अविरल धारा के रूप में बहती है. वर्तमान में जहाँ बाबा का निवास है, वह क्षेत्र डूब में जाने वाला है. सरकार ने इन्हें मुवावजे के 2 करोड़ 51 लाख दिए थे तो इन्होंने सारा पैसा खरगौन के समीप ही ग्राम नांगलवाड़ी में नाग देवता के मंदिर में दान कर दिया, ताकि वहां भव्य मंदिर, गौशाला आदि बन सके.

'संत सियाराम' बाबाजी बहुत ही पहुंचे हुये सन्त हैं. आप लाखों रुपये दान में दो, पर नहीं लेते. 'संत सियाराम' बाबाजी केवल 10 रुपये लेते हैं और रजिस्टर में देने वाले का नाम लिखते हैं, साथ ही नर्मदा परिक्रमा वालों का खाना और रहने की व्यवस्था कई सालों से अनवरत करते आ रहे हैं. 'संत सियाराम' बाबाजी के स्थान पर सारे दिन दर्शन करने वालों के लिए चाय बनाई जाती है. 'संत सियाराम' बाबाजी अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे कर चुके हैं 

ऐसे ही सन्तों का सम्मान होना चाहिए. निमाड़ के गौरव 'बाबा जी' का वैभव पूरे विश्व में फैले. चरण वंदन..



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