अश्रुओं से मना वेलेंटाइन आज


आज हुआ जो उससे
दिनकर का भी ह्रदय 
भी विचलित हुआ होगा।
देख कर ये खूनी होली,
उस का भी दिल रोया होगा।
कैसे फिर दुश्मन ने घात लगाई है।
जब प्रेम में डूबी थी दुनियां,
मातृ -प्रेमियों ने अपनी जान गवाई हैं।

हद हो गयी इस हिंसा की,
जो गीदड़ की भांति
पीठ पर आघात करें।
अब कौन सा जोश दिल
में फिर आवाज करें।

कितनों के घर उजड़ गए आज
कितनों की मांग सुनी हुई।
कौन दे जवाब अब इस का।
दुःखी हो गया हर दिल आज।
अश्रुओं से मना वेलेंटाइन आज।।

- संध्या चतुर्वेदी    
अहमदाबाद, गुजरात
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