पुलवामा हमले की खबर के बावजूद प्रधानमंत्री शूटिंग में व्यस्त रहे या.. झूठ कौन बोल रहा, मोदी या मीडिया?





Half truth is more dangerous than the lie.....

''बात 14 फरवरी की है। इस दिन देश में तीन घटनाए घटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रुद्रपुर में रैली, कार्बेट पार्क में मोदी की शुटिंग और पुलवामा में देश के 44 जवानों की शहादत। तीनों घटनाओं के केंद्र में मोदी रहे। संयोग से उस दिन मैं उत्तराखंड के रुद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली कवरेज कर रहा था।''

दि संडे पोस्ट से आकाश नागर          

दृश्य नंबर एक...
12:00 बजे से ही लोग रुद्रपुर में भारी तादात में इकट्ठा होने लगे थे। बरसात आ रही थी। लोग अपने कंधों पर और सिर के ऊपर कुर्सियां रख रख कर किसी तरह भीगने से बच रहे थे। बावजूद इसके लोगों में देर शाम तक मोदी के आने का बेसब्री से इंतजार हो रहा था। आखिर में 5:10 बजे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत द्वारा प्रधानमंत्री के नहीं आने की घोषणा की जाती है और नरेंद्र मोदी का फोन से संबोधन जनता को सुनाया जाता है। जनता मोदी के मन की बात सुने बिना ही रैली से उठ खड़ी होती है।



दृश्य नंबर दो ...
कॉर्बेट पार्क के कालागढ का वह इलाका जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शूटिंग में व्यस्त थे। कभी वह वोटिंग के दृश्य दे रहे थे तो कभी बीहड़ जंगलों के। इस दौरान पूरा प्रशासनिक अमला उनकी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त रहा। उधर लोग रैली में उनके आने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। मौसम खराब का बहाना बनाकर शूटिंग से रुद्रपुर जनता के बीच समय नहीं निकाला जा रहा था। यहां तक की फोन की कवरेज नहीं होने की बात कही जा रही थी। वह दूसरी बात है कि रुद्रपुर रैली को प्रधानमंत्री ने शूटिंग के दौरान ही फोन से संबोधित किया था। 


दृश्य नंबर 3 ...
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हमारे 44 जवान शहीद हो गए थे। पूरे देश में शोक की लहर डूब चुकी थी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हमारे देश के 44 जवानों के शहीद होने की पता तक नहीं चल सका। कहा गया कि कॉर्बेट पार्क के जिस इलाके में वह शुटिंग में व्यस्त थे वहां मोबाइल टावर नहीं पहुंच सकते थे। जबकि उसी कॉर्बेट पार्क इलाके से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रुद्रपुर रैली को फोन से संबंधित किया था।

कॉर्बेट पार्क इलाके में शुटिंग के वक्त मोदी जी नौकायन करते हुए

बात यह भी है कि सूचना के इस युग में यदि देश पर आक्रमण हुआ हो और माँ भारती के 40 से ज्यादा सपूत वीर गति को प्राप्त हो गए हों और प्रधानमंत्री को सूचना न मिले या विलम्ब से मिले ये अच्छे संकेत नहीं हैं। यह कहना है श्री कल्याण मनकोटी जी का. 

श्री मनकोटी जी कहते हैं कि यदि सूचना मिल गयी थी, तो इतने बड़े हमले के बावजूद प्रधानमंत्री शूटिंग में व्यस्त रहें तो ये और भी निराशाजनक है! कम से कम अपने पुराने भाषणों को ही एक बार फिर सुन लेते, उसी से काफी कुछ समझ आ जाता, लेकिन क्या कहें. झूंठ, झूंठ होता है साहेब.

इसी के साथ अब देखिये सोशल मीडिया पर और क्या प्रतिक्रिया आ रही है-  

श्री दीप भट्ट जी मैं ‌अभी उसी जगह से लौटा हूं। जमकर बात की मैंने मोबाइल से। दरअसल मोदी साहब पूरे परिदृश्य से वाकिफ थे। इस देश की जनता को अनपढ़ बनाकर रखा है इस देश के शासकों ने। सवाल क्या करेगी वह इन शासकों से। लंबी लड़ाई है यह अंग्रेजों को भगाने जैसे। तब नब्बे बरस लगे। अब काले अंग्रेजों को भगाने में इतना वक्त नहीं लगेगा। वक्त आ रहा है इनका। अपना वक्त खुद ही ला रहे हैं।

सुश्री रेखा भण्डारी जी लिखती हैं अन्ध भक्तों को बहुत मिर्ची लगनी है इस खबर से.. 

श्री Lalit Kaira जी Half truth is more dangerous than the lie.....


सदियों से हमें आदत पड़ी है गुलामी की। हम सभी ने अपने अपने मालिक स्वयं चुन लिए है और उनकी वंदना और दूसरों की आलोचना हमारा फ़र्ज़ है। सच दिखाने के नाम पर सच के सिपाही अपने अपने स्वामियों का प्रचार कर रहे होते हैं। अपवाद भी समाज मे अपवाद हो चले हैं।


श्री नरेन्द्र सिंह नेगी जी लिखते हैं सच लिखने वालों को कब तक देश द्रोही या फिर कांग्रेस का ऐजेंट करार दिया जाता रहेगा??





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