पाकिस्तान की तबाही सारी दुनिया के लिए बड़ी राहत होगी, बधाई देश की सेना को




''पुलवामा के शहीदों की आत्मा को आज निश्चित ही शांति मिली होगी. अब आगे देश की छाती में ठंडक पड़ने का कदम उठाया जाना चाहिए. पाकिस्तान को न सुधरना था और न ही वह सुधरेगा. पाकिस्तान की भविष्य में की जाने वाली हरकतों को काबू करने का जतन अभी से करना होगा. इसके लिए न केवल उसकी ओर जाने वाले नदियों का पानी रोकने की घोषणा को पूरा किया जाना चाहिए, बल्कि इससे भी एक कदम आगे जाकर प्रयास करने होंगे. अगले अधिकांश कदम इस कदर तगड़ी कूटनीति वाले हों कि पाकिस्तान सहित उसके गिने-चुने समर्थक देश हाथ मलते रह जाएं.''



प्रकाश भटनागर     




इसकी सबसे बड़ी बधाई उन जांबाज वायुसैनिकों को, जो जानते थे कि वे मौत के मुंह में जा रहे हैं. जहां से सुरक्षित लौटकर आना बहुत बड़ी चुनौती है. फिर भी उन्होंने इतना बड़ा जोखिम लिया. अपने चालीस साथियों की मौत का बदला लेने के लिए अपनी जान पर खेल गये. मुबारकबाद, सेना के उस एक-एक शख्स को, जिसने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस कार्रवाई के सफल संपादन में योगदान दिया. वह पेशानी तो यकीनन चूमे जाने लायक है, जिसके भीतर बसे दिमाग ने दुश्मन को यूं सबक सिखाने की योजना तैयार की. कमाल उन नरेंद्र मोदी का, जिन्होंने सेना को बदला लेने के लिए पूरी छूट दी और वह माहौल बना दिया, जिसके बाद सारी दुनिया आज भारतीय सेना का लोहा मान रही है. 

पाकिस्तान इस झन्नाटेदार तमाचे के बाद मुंह छिपाता फिर रहा है. जाहिर है कि वह अपने गाल पर छपे भारतीय सेना के पराक्रम को दुनिया के सामने लाने से शरमा रहा है. खबर है कि बालाकोट में पाकिस्तान की सेना भारतीय कार्रवाई के बाद हुई व्यापक हानि के सबूत मिटाने में जुट गयी है. ताकि वह यह जता सके कि भारत ने जो कुछ भी हुआ, उससे उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. हालांकि उसके यह षड़यंत्र शुरू हो गये हैं कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में हुए इस हमले को नियंत्रण रेखा के पार का बताकर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की सहानुभूति हासिल कर सके. 



पाकिस्तान लातों का नहीं, बंदूकों का भूत    
सच कहें तो पाकिस्तान लातों का नहीं, बल्कि बंदूकों का भूत है. उसे सुधारे रखने का एक ही तरीका है कि उसकी एक भी हरकत पर व्यापक तबाही वाला जवाब दिया जाए. पुलवामा हमले के बाद देश से अपेक्षा की गयी थी कि वह इजरायल की तर्ज पर एक-एक दोषी को घर में घुसकर मारेगा. ऐसा तो नहीं हुआ, लेकिन अमेरिका की तर्ज पर की गई इस कार्रवाई ने जता दिया है कि विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र किस कदर आक्रामक होकर भी जवाब दे सकता है. 

मोदी ने एक बात बहुत सही कही थी. वह यह कि पुलवामा के जरिए पाकिस्तान बहुत बड़ी भूल कर गया है. उनका कथन सही साबित हुआ. चालीस सैनिकों की मौत के बाद दुनिया के बहुत बड़े हिस्से ने पाकिस्तान के लिए आक्रामक रवैया अपनाया. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान से साफ कहा कि वह हमले के दोषियों को कानूनी कार्रवाई की जद में लाए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तो पहले ही कह चुके थे कि भारत बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, हालांकि भारत की चुनौतियां अभी शेष हैं. 



चुनौतियां अभी शेष हैं, अगले कदम तगड़ी कूटनीति वाले हों
पहली यह कि पाकिस्तान को न सुधरना था और न ही वह सुधरेगा. दूसरी, इस आरोप को निराधार साबित करना है कि यह सारी कार्रवाई नियंत्रण रेखा से दूर की गयी थी. निश्चित ही भारत ने इसके लिए पहले से तैयारी करके रखी होगी. लेकिन पाकिस्तान की भविष्य में की जाने वाली हरकतों को काबू करने का जतन अभी से करना होगा. उसकी ओर जाने वाले नदियों का पानी रोकने की घोषणा को पूरा किया जाना इस दिशा में एक अवश्यंभावी कदम बन गया है. भारत को इससे भी एक कदम आगे जाकर प्रयास करने होंगे. पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव बनाना होगा. अमेरिका पहले ही इस देश की मदद में कटौती कर चुका है. हालांकि अपने हितों के चलते चीन ने भारत के इस दुश्मन की मदद जारी रखी है. इसलिए देश के कर्णधारों को चाहिए कि अगले अधिकांश कदम इस कदर तगड़ी कूटनीति वाले हों कि पाकिस्तान सहित उसके गिने-चुने समर्थक देश हाथ मलते रह जाएं. 

पुलवामा के शहीदों की आत्मा को आज निश्चित ही शांति मिली होगी. अब आगे देश की छाती में ठंडक पड़ने का कदम उठाया जाना चाहिए. उस ठंडक का प्रबंध नियंत्रण रेखा के पार है. वह इस्लामाबाद में है. जिसकी तबाही सारी दुनिया के लिए बड़ी राहत वाली बात साबित होगी, यह तय है.

(श्री प्रकाश भटनागर  जी की फेसबुक वाल से साभार)




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