सफाई कर्मियों के पैर धोते मोदी का फोटो वायरल, लोगों ने बताया नोटंकी, कहा 'शोफ़ा पे बैठाया जाता तो छू जाने से वो अशुद्ध हो जाता'





''प्रधानमंत्री जी एक सफाई कर्मी के पैर धो रहे हैं सफाई कर्मी जिस कुर्सी पे बैठी है, वो प्लास्टिक का पुराना कुर्सी है और प्राधनमंत्री जी जिस पे पैठे हैं, वो आलीशान शोफ़ा है. यह सम्मान नहीं बहुजनों की क्या औकात है?, यह दिखाना है, क्योंकि अगर सफाई कर्मी को शोफ़ा पे बैठाया जाता तो छू जाने से वो अशुद्ध हो जाता.''
- मदन कुमार     



प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को कुम्भ में स्नान किया और स्नान के साथ-साथ वे  सफाई कर्मियों से मिले. उन्होंने सफाई कर्मियों से मिलने के बाद उनमे से कुछ सफाई कर्मियों के पैर भी धोये और उनके पैरों को पोछा भी. उनसे आशीर्वाद भी लिया और उन्हें अंग बस्त्र भी भेट किया. 
  


प्रधानमन्त्री मोदी का यह अंदाज काबिले तारीफ हो सकता था, अगर हाल में 2019 के चुनाव सर पर नहीं होते. जैसा कि माना जा रहा था मोदी का यह अंदाज विपक्ष को शायद ही रास आये. मोदी के इस अंदाज को राजनैतिक रंग दिया ही जाना था, सो दे दिया गया है. 

जहाँ बीजेपी के लोग कह रहे हैं आज प्रधानमंत्री मोदी ने यह सिद्ध कर दिया कि उनका दिल कितना बड़ा है. उन्होंने देश की 130 करोड़ जनता और विश्व को भी यह बता दिया कि एक सफाई कर्मचारी को भी हम इस तरीके से इज्जत दे सकते हैं. हम किसी भी इन्सान को उसके कर्म से छोटा नहीं कह सकते. उसे भी समाज में इज्जत और प्यार की जरुरत है. 

वहीं विपक्ष इसे केवल एक नोटंकी के रूप में देख रहा है. कहा जा रहा है प्रधानमंत्री जी एक सफाई कर्मी के पैर धो रहे हैं सफाई कर्मी जिस कुर्सी पे बैठी है, वो प्लास्टिक का पुराना कुर्सी है और प्राधनमंत्री जी जिस पे पैठे हैं, वो आलीशान शोफ़ा है. यह सम्मान नहीं बहुजनों की क्या औकात है?, यह दिखाना है.  सेवक को तो जमीन पे बैठना चाहिए ना? ये कुर्सी ये दिखा रही है कि बहुजनों की क्या औकात है? क्योंकि अगर सफाई कर्मी को शोफ़ा पे बैठाया जाता तो छू जाने से वो अशुद्ध हो जाता. 

मामले में सफाई कर्मचारी आंदोलन के संस्थापक और रमन मैग्सेसे अवॉर्ड विजेता बेजवाड़ा विल्सन का कहना है कि कुम्भ में सफाईकर्मियों के पैर धोना असंवैधानिक है. यह उन्हें तुच्छ दिखाकर खुद को महिमामंडित करने जैसा है. विल्सन पिछले कई दशकों से मैला उठाने के काम में लगे लोगों के बीच काम कर रहे हैं और इसके लिये उन्हें देश विदेश में सम्मानित किया जा चुका है.

विल्सन कहते हैं कि पैर पकड़ने जैसी नेताओं की ये हरकतें बहुत ग़लत और असंवैधानिक हैं. यह बराबरी के फलसफे के खिलाफ हैं। विल्सन ने कहा कि राहुल गांधी हों या नरेंद्र मोदी दोनों को अम्बेडकर का अध्ययन करना चाहिये. 'संविधान कहता है कि सब बराबर हैं लेकिन जब कोई इस तरह सफाईकर्मियों के पैर धोता है तो यह एक बिल्कुल ग़लत है. यह ड्रामेबाज़ी बन्द होनी चाहिये.' उनके मुताबिक यह दलितों को मैला उठाने के काम में लगाये रखने को ही प्रोत्साहित करने जैसा है.

एक प्रतिक्रिया 
हाई क्लास नौटंकी की स्क्रिप्ट लिखने वाले को मेरा शत शत नमन करते हुए इलाहाबाद से श्री प्रकाश गोविन्द जी लिख रहे हैं ''इससे भी अगर काम नहीं बना तो देख लेना, ये जल्दी ही सफाई कर्मचारियों के साथ गटर के अंदर भी उतरेंगे... पक्का...''




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