निरंकुश मीडिया बर्बाद कर देगा इस शानदार देश को, समाज को




''आज भारत, पाक के बीच यद्ध जैसे हालात बन गये हैं. चारों ओर से 'मारो, सबक सिखा दो' के नारे गूँज रहे हैं. और इसी के साथ जम कर राजनीति भी हो रही है. इस सब में मीडिया का अहम् रोल सामने आ रहा है, क्योंकि वह यदि सोच समझ कर परोसे कि क्या देश के लिए बेहतर होगा तो गलत राजनीति करने वाले भी सुधर जाएँ, लेकिन क्या करें मीडिया भी तो इन्हीं लोगों में से बना है.'' 



सतीश सक्सेना 



आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक वृद्ध मां को उसका बेटा निर्दयता पूर्वक जमीन पर घसीटता हुआ ट्रेक्टर के आगे ले जा रहा है, ताकि उसे कुचल कर मार सके और यह घटना महाराष्ट्र 21 जून की है, जहाँ राष्ट्र गौरव की बातें सबसे अधिक की जाती हैं.

पिछले कुछ वर्षों में, हमारे देश में नफरत की खेती खूब की गयी है और उसका नतीजा भी नजर आने लगा है, मेरे अपने सर्किल में कई सरल ह्रदय व्यक्तियों के व्यवहार में फर्क आया साफ़ महसूस हो रहा है. पडोसी देश के प्रति उत्पन्न की गयी यह नफरत अब मोहल्ले, घर और ट्रैफिक में भी नजर आ रही है. सोशल मीडिया पर जिनके विचार हमसे न मिलें, उन्हें अमित्र करना आम है. अफ़सोस यह है कि नफरत फ़ैलाने वाले अधिकतर भोले लोग, यहाँ तक कि छोटे बच्चे तक हैं, जिनके मानस में, टीवी पर चीखते एंकरों की बाते, अमिट निशान छोड़ रही हैं.

सीधे साधे शांत देश को, जिसमें समस्त जाति, कौम के लोग आराम से रह रहे थे, इन लोगों ने, घरों के बच्चों को भी झाग उगलते हुए गाली देना सिखा दिया है, जिसे सब जोश के साथ, आसानी से आत्मसात भी कर रहे हैं. इन जाहिलों को यह नहीं मालुम कि स्नेह और प्यार की जगह अनजाने में तुम अपने घर में जहर बो रहे हो, जिसकी आग में, सबसे पहले तुम्हारे बच्चे ही झुलसेंगे, जिन्हें इसी माहौल में पूरी उम्र जीना है. मानव की मानव के प्रति बढती हुई गुस्सा इन्हें जानवर बना देने में सक्षम है और शीघ्र यह सड़कों पर नजर आयेगी.



'मारो, सबक सिखा दो' के नारे लगाते, इन बेवकूफों को यह भी नहीं मालुम कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों में युद्ध का अर्थ, घना अन्धेरा होगा, जिसमें दोनों ओर कोई नाम लेवा नहीं बचेगा. भारत पाकिस्तान में ताकत की तुलना सिर्फ पारम्परिक युद्ध होने तक ही संभव है. परमाणु शक्ति संपन्न देशों में यह तुलना सिर्फ मूर्खतापूर्ण विचार है. दोनों अपार जीव संहार और मानवता विनाश में सक्षम हैं. यहाँ एक पक्ष के धन और जनशक्ति का कोई मूल्य नहीं, परमाणु युद्ध होने पर लाखों सैनिक, भरपूर हथियार, हवाई जहाज, और अरबों डॉलर का रिज़र्व धन एक क्षण में नष्ट हो जाएगा और दो जाहिल शासकों के मनहूस स्मारक के रूप में, आसमान की जगह सिर्फ घना अन्धेरा बचेगा, जो सैकड़ों बरसों तक मानव की मूर्खता का अवशेष होगा.

यही कारण था कि विश्व का सबसे ताकतवर राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति आज वियतनाम आकर एक गरीब देश नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति से हाथ मिलाने को विवश हो रहा है और यही समय की पुकार भी है कि परमाणुशक्ति संपन्न देश आपस में युद्ध की सोच भी न सकें.

आज मैंने अपने घर से ललकारने वाले समस्त चैनल विदा कर दिए. सौम्यता से बात करने वाले चैनल ही देखना है. इस हेतु न्यूज़ चैनल कम से कम देखूंगा. देखना है कि इस युद्ध यूफोरिया पर लगाम लगाने के लिए हमारी सरकार कब कदम उठाती है. दुआ करूंगा कि भारत, पाकिस्तान, नेपाल, बंगलादेश एक साथ मिलकर, एक संघ राष्ट्र का निर्माण करें और हम ईद पर होली के उत्साह से, गले मिलकर, नफरत की करवटें लेना छोड़, आराम की नींद सो सकें. 



एक प्रतिक्रिया 
हरिद्वार से Sudesh Arya जी ने लिखा है 'सियासी भेड़ियों थोड़ी बहुत ग़ैरत ज़रूरी है, तवायफ़ भी किसी मौक़े पर घुँघरू तोड़ देती है..' 


भोपाल से Kusum Sharma जी ने लिखा 'जोश में होश आम जनता को रखना होगा. लकीर के फकीरों को दिखाई नहीं दे रहा, आम जनता और सिपाही ही टारगेट हैं. बहुत से घरों की मांग खून से भरी है. शान्ति से ही सुलह का रास्ता साफ होगा, जिद से नहीं...'






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