बेरोजगारी का एक बड़ा कारण, रोजगार पाने की व्यवस्था का अभाव है?



''हमारे छात्रों की पढ़ने, समझने और सीखने के मौकों में बरती गयी भीषण गैरजिम्मेदारी है तो यही आरोप उन्हें पढ़ाने सिखाने और समझाने वालों पर भी लगाया जा सकता है..''
- लोकमित्र गौतम 

एक तरफ बेरोजगारी अपनी चरम सीमा पर है तो दूसरी तरफ कम्पनियों को योग्य और उपयोगी कर्मचारी नहीं मिल रहे, क्योंकि बेरोजगार अपनी जरूरत और योग्यता को समझे बिना जहां आँख मूंदकर कहीं भी आवेदन कर दे रहे हैं, वहीँ छोटी कम्पनियों के पास इतना बजट नहीं है कि वे अपना एचआर डिपार्टमेंट खोल सकें, नतीजतन उन्हें हर गली कूचे में खुल गयी कंसल्टेंट कम्पनियां बेवकूफ बना रही हैं. वह इन कम्पनियों को कुशल कर्मचारियों के नाम पर ऐसे कर्मचारी उपलब्ध करा रही हैं, जिन्हें पता ही नहीं होता कि उन्होंने जिस नौकरी के लिए आवेदन किया है, वे उनके लायक हैं भी या नहीं.

नतीजा यह होता है कि एक स्थिति के बाद दोनों को निराशा हाथ लगती है एम्प्लाई को भी और एम्पलायर को भी. देश में जहाँ कई करोड़ लोग बेरोजगार हैं वहीँ कम से कम 1 करोड़ से ज्यादा योग्य और कुशल कर्मचारियों का अभाव है. इसमें हमारे छात्रों की पढ़ने, समझने और सीखने के मौकों में बरती गयी भीषण गैरजिम्मेदारी है तो यही आरोप उन्हें पढ़ाने सिखाने और समझाने वालों पर भी लगाया जा सकता है, सिर्फ सरकार दोषी नहीं, नागरिक चेतना की ईमानदारी का अभाव भी इसके लिए जिम्मेदार है.  

    

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