14 फरवरी अब वेलेंटाइन नहीं, शहीद दिवस मनाया जाये ''देश सेवा से बड़ा कुछ भी नहीं..'''


''हम शांति प्रिय हैं, हमे प्रेम से रहना आता है. इसका मतलब ये कतई नहीं कि हमारा खून नहीं खौलता...आज एक बार फिर आवश्यकता महसूस की जा रही है कि 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे की जगह शहीद दिवस के रूप में मनाया जाये, क्योंकि देश सेवा से बड़ा कुछ भी नहीं..''




अहमदाबाद, गुजरात से  संध्या चतुर्वेदी 
      
दु:खी हूँ आज, जब से दिल दहला देने वाली खबर को सुना है, तब से कलम बहुत कुछ लिखने को झटपटा रही हैं. कल जो हुआ असहनीय था. फब से वो चित्र को मिटा दिया गया, उन्हें वॉइलेंस बता कर.

क्या कुछ फोटो मिटा कर जनता का रोश शांत हो जायेगा. जिन घरों के चिराग बुझ गए, वो शांति का संदेश देंगे. देश को या दुश्मन को मार गिराने का आश्वासन मांगेंगे सरकार से.

मोदी जी कहते हैं, जितना दिया है, सूत समेत लौटाऊंगा. जी हाँ, हमे देश के जवानों के सर सूत समेत ही वापस चाहिए. जब सेना में भर्ती होती है, ये सरकार इंच इंच नाप कर सेना में जवानों की भर्ती करती हैं. 300 किलों बारूद और किसी को भनक नहीं लगी.

यहाँ दीवाली पर पटाखे चलाने से प्रदूषण हो जाता है. सरकार पटाखों पर पाबंदी लगा देती है. हम दिल मसोस के पटाखे नहीं खरीद कर लाते हैं. हम शांति प्रिय हैं, हमे प्रेम से रहना आता है. इसका मतलब ये कतई नहीं कि हमारा खून नहीं खौलता. हम शेर का जिगर रखने वालों से पूछना चाहते हैं कि छत्तीस इंच की छाती को क्या दर्द नहीं होता? जब सेना का काफिला गुजरने वाला था तो कुत्तों के लिए रास्ता क्यूं खोला गया? क्या सरकार ने जिम्मेदारी ली थी और अगर ली थी, तो अब हमें हमारे लहू का बदला चाहिए. 

हमे बदले में दुश्मन के सर चाहिए और सूत समेत ही चाहिए. जो hows the josh पर हँस रहे हैं, उनके जोश को अपना जोश दिखाना है. प्रेम दिवस पर गद्दारों ने जो प्रेम जताया, उसका जोश अभी दिखाना है. हमे अब प्रेम दिवस नहीं शहीद दिवस मनाना है..

महाराष्ट्र के सोलापुर जिला परिषद में स्कूलों द्वारा 14 फरवरी को 'शहीद दिवस' के रूप में मानए जाने के लिए 2 वर्ष पूर्व सर्कुलर जारी किया गया था. सर्कुलर एजुकेशन ऑफिसर तनजी गडके ने जारी किया था. इस पर श्री गडके का कहना रहा है कि '14 फरवरी' को भी कुछ देशभक्त शहीद हुए थे, जिनकी याद में स्कूल में प्रतिमा पूजा का कार्यक्रम रखने के निर्देश जारी किए गए हैं. सर्कुलर में श्री गडके ने कहा कि 'विद्यार्थियों को शहीदों की शहादत याद रखनी चाहिए.' इसमें वैलंटाइंस डे पर स्कूल में शहीद भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर की प्रतिमा के पूजन बारे में कहा गया था. बाद में श्री गडके द्वारा जारी सर्कुलर पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य शिक्षा मंत्री ने इसे पूरी तरह मूर्खतापूर्ण बताया और केवल सरकार ही सर्कुलर जारी कर सकती है, बताकर सर्कुलर को कैंसल कर दिया गया.

वैसे वर्तमान में शहीद दिवस के रूप में हमारे देश में कई तिथियाँ शहीद दिवस (सर्वोदय दिवस) के रूप में मनायी जातीं हैं, जिनमें मुख्य हैं- 30 जनवरी, 23 मार्च, 18 जून को शहीद दिवस के रूप में औपचारिक मनाया जाता है, जो कि गलत है. हरेक व्यक्ति को अपने देश के शहीदों के प्रति आदर सम्मान रख कर उनके शहीदी का पूरा आदर करते हुए दिल से मनाना चाहिए और अपने देश के प्रति जागरूक, निष्ठावान रहना चाहिए. 

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या हुई थी.
23 मार्च 1931 के दिन अंग्रेजों ने शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी पर लटका दिया गया था.
18 जून 1858 को मराठा शासित झाँसी राज्य की रानी और 1857 के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं. उन्होंने सिर्फ़ 29 साल की उम्र में अंग्रेज़ साम्राज्य की सेना से जद्दोजहद की.

14 फरवरी को हम वेलेंटाइन डे, जिसे हम प्रेम दिवस के रूप में मनाने लग गए हैं, आज एक बार फिर आवश्यकता महसूस की जा रही है कि 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे की जगह शहीद दिवस के रूप में मनाया जाये, क्योंकि ''देश सेवा से बड़ा कुछ भी नहीं..''


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