मैंने तो मन की लिख डाली, अब शब्दों की जिम्मेदारी !

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सतीश चन्द्र सक्सेना   



रचनाकारों की नगरी में 
मैंने कुछ रंग सजाये हैं 
अंतर्मन पर ही नज़र पड़े 
ऐसे अरमान जगाये हैं !
मानवता गौरवशाली हो 
तो झूम उठे, दुनिया सारी !
मैंने तो मन की लिख डाली, 
अब शब्दों की जिम्मेदारी!

जो शब्द ह्रदय से निकले हैं 
उन पर न कोई संशय आये
वाक्यों के अर्थ बहुत से हैं,
मन के भावों से पहचानें !
मैंने तो अपनी रचना की , 
हर पंक्ति तुम्हारे नाम लिखी !
जाने क्या अर्थ निकालेगी, 
इन छंदों का, दुनिया सारी!
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