चलो आज कुछ तूफानी करते हैं



चलो आज कुछ तूफानी करते हैं
कुछ तो मनमानी करते हैं
चलो आज इबारतें कुछ
आसमानी लिखते हैं।


सूरज को देकर शिकस्त 
शाम की आगवानी करते हैं
तिमिर ज्यों हुआ घना तो क्या
शमा जो आंधियों में न जले तो क्या
हम तो जुगनुओं से अपनी राह
आसान करते हैं।।
चलो एक बार फिर नादानी करते हैं
कागज की नाव बना कर,
सागर से लड़ने का हौसला
तूफानी करते हैं।

चाँदनी की छोर पकड़कर
चाँद -तारों के पास पहुँचकर
कुछ उनकी सुनते हैं
कुछ अपनी कहते हैं
मिल कर रंग और नूर
की बारिश करते हैं।।

शव को शिव बनाकर ,
यूँ ही धूनी रमाकर
व्याघ्र चर्म पहनाकर
चाँद माथे पर सजाकर
साथ आज हलाहल पीते हैं
चलो आज शिव बनते हैं।।

हे राम तुमने क्यों न की रक्षा?
 रश्मि रानी, पटना

सीता अब न देगी अग्निपरीक्षा
अब अहिल्या न श्रापित होगी
क्योंकर वो शिला बनेगी
चलो आज दोष गौतम पर मढ़ते हैं।।


उठ अर्जुन गांडीव उठा
कोई कृष्ण न आ पाएंगे
भरी सभा में दुःशासन का
चल आज वध करते हैं।

चलो आज कुछ तूफानी करते हैं,
कुछ मनमानी करते हैं
आज इबारतें आसमानी लिखते हैं।।


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