पटवारी जी ने लिखा 'जनता भरत की मीत नहीं हुई, आप तो शिवराज सिंह हैं'





'सरकार द्वारा कर्मचारियों को अकर्मण्य बताया जाकर अपनी अकर्मण्यता को छिपाया जा रहा है.' और  'जनता भरत की मीत नहीं हुई, आप तो शिवराज सिंह हैं' इस प्रकार की बातें एक पटवारी जी द्वारा फेसबुक पर शेयर की गयी पोस्ट में कही गई है.


शेयर पोस्ट में कहा गया है कि लगभग 14 वर्ष पहले की श्री दिग्विजयी सरकार ने एक से बढ कर एक कर्मचारी विरोधी कार्य किये एवं योजनायें बनायी जिसका परिणाम था कि कांग्रेस का वजूद म. प्र. में खत्म जैसी स्थिति बन गई. अब वही स्थिति भाजपा के मुखिया श्री शिवराज सिंह द्वारा निर्मित की जा रही है, कर्मचारी को गली के कुत्ते से भी बदतर बना दिया गया है. शायद उनका ऐसा सोचना है कि कर्मचारी को जितना परेशान करेंगे जनता उतना उनके पक्ष में होगी, लेकिन मेरी नजर में और अनुभव के अनुसार ये सोचना गलत है क्योंकि नं. 1 पक्की बात जिसको रामायण काल से माना जाता है कि जनता भरत की मीत नहीं हुई, आप तो शिवराज सिंह हैं. नं. 2 आप और आप के कार्यकर्ता जनता तक आपकी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंचाते न प्रचार करते हैं, यह काम कर्मचारी करता है. जो जनता के नजदीक होता है और जनता का आपके कार्यकर्ताओं की अपेक्षा वास्तविक रूप से हितैषी भी होता है. आपके कार्यकर्ताओं से अधिक जनता का विश्वास कर्मचारी पर अभी भी है, और इसका प्रभाव कांग्रेस देख चुकी है, अब भाजपा की बारी है. 


जनता को सुविधा देने के नाम पर वर्तमान में शिकायतों के निराकरण के लिए 100 प्रकार की विभिन्न नामों से योजनायें चलायी जा रही हैं, जिनमें 181 कर्मचारियों को सबसे अधिक परेशान कर रही, बेतुकतान की नियम विरूद्ध और अनर्गल बात और शिकायत फोन पर फ्री में कभी होश में कभी बहकावे और नशे में की जाती है, और फिर जबाव और शिकायतकर्ता की असंतुष्टि का अंतहीन सिलसिला शुरू हो जाता है, जिसमें बिना अपराध के भी कर्मचारी प्रताणित होता रहता है. 


लोकसेवा केन्द्र चलाकर कर्मचारी को समयावधि में बांधा गया है, जल्द ही समाधान एक दिवस योजना में एक दिन क्या साढे चार घंटे में कुछ सेवाओं को देने की योजना बनाई गई है, आप डेढ बजे दिन तक आवेदन करते हैं तो उसी दिन आपको सेवा मिलने का नियम बनाया गया है, यानी न कर्मचारी और न ही उसके परिवार का कोई सदस्य जिसकी उस पर जिम्मेदारी हो बीमार हो सकता है, न उसका कोई समाज होगा, न शादी व्याह, मरग-मौत या किसी भी प्रकार छुट्टी की पात्रता वास्तविक रूप से नहीं होगी, छुट्टियाँ केवल कहने के लिए ही रह गयी हैं.

पोस्ट में कहा गया है लगभग सभी विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं, लेकिन सरकार द्वारा इस कमी की पूर्ति न करते हुए कर्मचारियों को अकर्मण्य माना जा रहा है. और अपनी अकर्मण्यता को छिपाया जा रहा है. 

पोस्ट में यह भी साफ़ कर दिया गया है कि 'मेरे द्वारा इस पोस्ट को लिखे जाने का परिणाम भी मैं जानता हूँ, लेकिन कब तक सहे और खामोश रहें हम.' पोस्ट में कहा गया है कि वैसे सरकार को इसे पोजीटिव मानना चाहिए कि मैंने उन्हें उनके प्रति कर्मचारियों के असंतोष से अवगत कराया है, बाकी हमारी और माननीय श्री शिवराज सिंह जी की किस्मत में जो लिखा होगा, मिलेगा ही?





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