भीख मांगना देश के लिए शर्मनाक बात, रोक लगाने संसद में उठी सख्त कानून बनाने की मांग



भीख मांगना देश में एक गंभीर सामाजिक समस्या बन चुकी है। आज जहां देखो, वहां भिखारियों की लाइन सी लगी रहती है, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा के पास भिखारियों की अच्छी खासी संख्या नजर आती है। अब संसद में यह मामला उठा है। मंगलवार 2 जनवरी को राज्यसभा में बीजेपी के एक सदस्य ने भिक्षावृत्ति पर रोक लगाने के लिए एक सख्त कानून बनाने की मांग की। 

बीजेपी सदस्य श्वेत मलिक ने शून्यकाल में यह मुद्दा उठाया और कहा कि इस धंधे में आसानी से पैसा मिल जाने के कारण स्वस्थ लोग भी भिक्षावृत्ति में लिप्त होते हैं। उन्होंने कहा कि इस सामाजिक बुराई को समाप्त करने के लिए सख्त कानून बनाए जाने की जरूरत है। स्वस्थ लोगों को इस धंधे के स्थान पर विभिन्न प्रकार का काम करना चाहिए, वहीं दिव्यांगों को ऐसा रोजगार दिया जाना चाहिए जो वे आसानी से कर सकें।

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में सड़कों पर भीख मांगने वाले लगभग 78 हजार भिखारी शिक्षित हैं और उनमें से कुछ के पास प्रोफेशनल डिग्री भी है। यह चौकाने वाली बात सरकारी आंकड़ों में सामने आई है। 2011 की जनगणना रिपोर्ट में "कोई रोजगार ना करने वाले और उनके शैक्षिक स्तर" का आंकड़ा जारी किया गया है। इसके अनुसार देश में कुल 3.72 लाख भिखारी हैं। इनमें से लगभग 79 हजार यानि 21 फीसदी साक्षर हैं। हाई स्कूल या उससे अधिक पढ़े लिखे भिखारियों की संख्या भी कम नहीं है। यही नहीं इनमें से करीब 3000 ऐसे हैं जिनके पास कोई न कोई टेक्निकल या प्रोफेशनल कोर्स का डिप्लोमा है और इनमें से ही कुछ के पास डिग्री है और कुछ भिखारी तो पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं। 


भिखारियों की बड़ी संख्या में मौजूदगी के चलते भारत के शहर बदनाम हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में सिर्फ एक लाख पैंतीस हजार लोग ही भीख मांग कर अपना गुजारा चलाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भीख मांग कर जीवनयापन करने वालों की संख्या लगभग दो लाख सैंतीस हजार है। भारत की विशाल आबादी को देखते हुए भिखारियों की यह संख्या कम ही कही जाएगी। एक अन्य सरकारी आंकड़े के अनुसार भीख मांगने वालों में 40 हजार से ज्यादा बच्चे भी शामिल हैं। वैसे देश के कई राज्यों में भीख मांगने पर प्रतिबंध भी है। 
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