बाबा लोग बेवकूफ बना कर ठग रहे हैं या हमें खुद ठगे जाने में आनन्द आने लगा है





पिछले वर्ष नोटबंदी में भी इन्ही क्रिसमस की छुट्टियों के बीच 4 करोड का चढावा आया था. इस वर्ष 1 करोड की बढोत्तरी ही हुई है. तो किस बाबा ने सांई बाबा को चढावा चढाने की अपील की थी? 

बोलते हैं कि "बाबा लोग भोली भाली जनता को बेवकूफ बना कर ठगते हैं.", लेकिन ये क्या, पिछले क्रिसमस की छुट्टी के दिन से तीन दिन के भीतर ही शिर्डी के सांई बाबा के यहाँ 5 करोड की नकदी का चढावा आया. अब किसने कहा था सांई बाबा पर करेंसी नोट व गोल्ड चढाने को? 


जहाँ तक मुझे याद है कि पिछले तीन चार वर्षों से कुछ साधू संतों ने अपील भी की थी कि सांई पूजन बंद करें. ऐसे अपील कर्ताओं में शंकराचार्य स्वरूपानंद भी थे. लेकिन क्या प्रभाव पडा अपील का? चढावा तो बढता ही गया. 

पिछले वर्ष नोटबंदी में भी इन्ही क्रिसमस की छुट्टियों के बीच 4 करोड का चढावा आया था. इस वर्ष 1 करोड की बढोत्तरी ही हुई है. तो किस बाबा ने सांई बाबा को चढावा चढाने की अपील की थी?

सनातन साधूओं ने जो अपील की थी, उसका तो उल्टा असर हुआ. अरे दान वहाँ किया जाता है, जहाँ धर्म रक्षा, धर्म शिक्षा व संस्कृति का पोषण हो,  साई बाबा क्या करेंगे? पिछले हफ्ते किसी अखाडे के साधू आये थे, तीस किलों के लगभग चावल थे. बाबा जी को दान कर दिया. कम से कम पाँच दिन अखाडे के साधुओ का भोजन होगा.


लेकिन साई बाबा, तो अब हैं नहीं तो.. ?
वैसे सांई बाबा काफी अमीर हो चुके हैं. 1800 करोड का फिक्स डिपाँजिट है. देखते हैं किस संस्कृति का विकास होता है?

कुमार पवन 

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