अलमारी में बंद और मंदिर की सीढ़ी पर छोड़ी गईं चप्पलों की बातचीत

Most Important Things To Remember When Doing Puja - मंदिर में जूते-चप्पल  उतारते समय कभी न पलटें, इन बातों का रखें विशेष ध्यान | Patrika News

अरे क्या हमें कभी भी भगवान के दर्शन नहीं होगें? हमेशा यही सीढ़ी पर हमें छोड़ दिया जाता है.

निधि श्रीवास्तव   


सच में क्या हम इतने अपवित्र है कि हमें मंदिर और बहुत बार घर के अंदर ही नहीं ले जाते हैं ये लोग.. जबकि सारी कीचड़ और गंदगी से सह कर भी हम इन्हें साफ़ रखते हैं. 

जूते चप्पल खोलेंगे किस्मत का ताला घर में पधारेगी लक्ष्मी करे ये छोटे से  उपाय, जानिए

तेरा तो तब भी ठीक है.. मुझसे पूछ, मुझे कितनी बार सिलवाया गया और कील ठोंकी गई. सीना चाक चाक हुआ पड़ा है.. पर मुझे अभी भी आराम नहीं, दिन भर सड़कों पर घिसती रहती हूँ. 

और मुझसे पूछ मैं तो कभी कभी ही पैरों में आती हूं, वरना तो अलमारी में बंद मेरा दम घुटता रहता है. काश उसके पास भी एक ही चप्पल होती तो, मैं भी रोज़ बाहर घूमती सड़कें नापती खुली हवा में साँस लेती. 

अच्छा और मैं तो ये सोचती हूँ काश़ ये दूसरी चप्पल ले पाता, तो मैं कुछ आराम पाती रोज़ चलते चलते थक गई हूँ. और सिलते सिलते छिल गई हूँ. 

शायद यही अपना अपना नसीब है. तू ग़रीब के पैर में दु:खी, मैं अमीर के पैर में. कोई भी अपनी अपनी जगह संतुष्ट नहीं है, जो नहीं है, वही चाहिए. तुझे आराम से घर में रहना है, मुझे रोज़ बाहर निकलकर घूमना घर में बंद नहीं रहना. 

सही कहा, पर कुछ भी कर लो, हमें भगवान तक पहुँचना नसीब नहीं. चाहे ग़रीब की चप्पल हो या अमीर की. 

Share on Google Plus

News Digital India 18

पाठकों के सुझाव सदा हमारे लिए महत्वपूर्ण है ..

0 comments:

Post a comment

abc abc