वाह! शिवराज जी, क्या कहने, जवाब नहीं आपका


''मंजिलें उन्हें नहीं मिलतीं, जिनके ख्वाब बड़े होते हैं,
मंजिलें उन्हें मिलती हैं, जो ज़िद पर अड़े होते हैं''

वैश्विक महामारी कोरोना से जूझते हुए भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान "साहस और हिम्मत" का अद्भुत परिचय दे रहे हैं. यह बड़ी बात है कि चिरायु में भर्ती रहकर भी प्रदेशहित की चिंता उनके लिए सर्वोपरि है. शिवराज जी ने कोरोना पॉजिटिव रहते हुए भी सरकार की पहली वर्चुअल कैबीनेट कर, यह साबित कर दिया कि एक मुख्यमंत्री का दायित्व किस तरह पूरा किया जाता है. इसलिए, कहना चाहूँगा कि " वाह, क्या कहने. "शिवराज जी आपका जवाब नहीं." 

सलीम तन्हा, संपादक, दैनिक अक्षर सम्राट, भोपाल


शिवराज जी चिरायु में रहकर कोरोना से जंग लड़ते हुए अपने कामों को बखूबी अंजाम दे रहे हैं, उससे साफ़ है कि बीमार होने के बाद भी उनकी सक्रियता में कोई कमी नहीं आई है. खास और महत्वपूर्ण बात यह है कि शिवराज जी "प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए प्रदेश का हित भी उनसे जुड़ा हुआ है. कोरोना पॉजिटिव रहते हुए उनका काम करते रहना सराहनीय है. यूँ कहने को तो कुछ भी कहा जा सकता है, लेकिन शिवराज जी का कोरोना जैसी भयावह बीमारी को भूल कर, अपने को व्यस्त रखना, उनके स्वस्थ रहने के लिए बहुत ज़रूरी है. 



कहा जाता है कि चिंता, चिता के समान होती है, और अगर एक बीमार व्यक़्ति यही सोचता रहे कि "मैं बीमार हूँ" तब उसकी बीमारी बढ़ने का खतरा और भी अधिक बढ़ जाता है. चूँकि, शिवराज, सिर्फ शिवराज सिंह चौहान ही नहीं हैं, बल्कि प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, इसलिए प्रदेश का सारा दारोमदार उन्हीं पर निर्भर है. उनका जल्दी स्वस्थ्य होना बहुत ज़रूरी है. अगर, शिवराज जी, यह सोचने लगें कि "वह कोरोना पॉजिटिव हैं, अब क्या होगा'', इस तरह की चिंता में डूब जाएँ तो उनके स्वास्थ्य के लिए यह हितकर कतई नहीं होगा. 


शिवराज जी की मेहनत, लगन, हौसला और उनकी हिम्मत को दाद देना ही पड़ेगी. शिवराज जी एक समझदार मुख्यमंत्री ही नहीं बल्कि ज़मीन से जुड़े बेहतरीन इंसान भी हैं, एक कुशल राजनीतिक हैं, किस काम को किस तरह अंजाम देना है, कब क्या करना है, यह वह बखूबी जानते हैं. शिवराज जी कोरोना पॉजिटिव होते हुए भी काम में व्यस्त हैं, यह संदेश जनता को राहत पहुँचाने वाला है, इस संदेश ने जन सामान्य में अपने मामा की छबि को और अधिक निखारा है. वाकई में शिवराज जी एक सफल और कामयाब मुख्यमंत्री हैं, मैं उनके स्वास्थ लाभ की कामना करता हूँ. और अंत में यह शेर अर्ज़ है.
''मुश्क़िलें ही मुश्क़िलें हैं, राहे- मंज़िल में तमाम.
हौसले ही हौसले हैं आज़माने के लिए..''





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