ये नाम हैं सूची में, 'अमृत' पी गये 'सिंधिया', 'शिव' के हिस्से आया 'विष'




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यह तय हो गया कि मध्य प्रदेश में भले ही शिव का राज कहलाता हो, पर बीजेपी के असली मुख्तयार वो सिंधिया हो चुके हैं, जिन पर गद्दारी का कलंक कांग्रेस लगा रही है. शिवराज सिंह चौहान के पारिवारिक रामपाल सिंह को अगर मंत्रिमण्डल में स्थान ना मिले तो इसे राजनैतिक परिभाषा में यही कहा जायेगा कि बीजेपी के मंथन में जो अमृत निकला, उसे सिंधिया पी गये और जो विष बचा, उसे शिवराज को पीना पड़ा. 





धीरज चतुर्वेदी 

केडर बेस पार्टी का दावा करने वाली भाजपा सत्ता के लिये किस हद तक असहाय हो सकती है. अगर बीजेपी कि आत्मगाथा लिखी जायेगी तो मध्यप्रदेश का मंत्रिमंडल विस्तार का परिदृश्य अवश्य लेखनीबद्ध होगा. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लेकिन उन्हें अधिकार नहीं कि वह सरकार चलाने के लिये अपने मंत्रियो को चुन सके. लोकतंत्र के लिये पीड़ादायक ओर क्या होगा कि बीजेपी का मूल केडर किनारे पर है ओर उन ज्योतिरादित्य सिंधिया को सम्मान मिल रहा है जो अभी तक बीजेपी को भरे मंचों से कोसते रहे. यहाँ तक कि एक मुख्यमंत्री को यह तक स्वतंत्रता नहीं मिली कि वह उनके पूर्व कार्यकाल में अनुभवी मंत्रियो को फिर मौका दे सके. 

जब शिवराज सिंह कि अंतर मन व्यथा उन शब्दों में उतर व्यक्त हुई कि मंथन से अमृत निकलता है,  विष तो शिव पी जाते है. सियासी मायने में यह बीजेपी के उन कर्मठ, विश्वनीय, जमीनी विधायकों का दर्द है, जिन्होंने भाजपा को सींच कर वटवृक्ष बनाया है. एक अकेला शिव तो विष पी रहा है ओर कमजोर होकर सहन कर रहा है. बीजेपी के सिद्धांत और नारों के मायने बदलते जा रहे है. केडर तो कहाँ  का केडर, बस सत्ता के लिये कुछ भी करेगा, चाहे अपनों की सियासी बलि मंजूर है. 



खबरे सूत्रों की हैं कि हमसफ़र बने सिंधिया के बीजेपी गुट को मलाईदार पद से सम्मानित कर बीजेपी के मूल केडर पर नासूर बनने वाली चोट पंहुचा सकती है. महेंद्रसिंह चौहान को नगरीय प्रशासन, प्रदुम्न तोमर को राजस्व और उस इमरती देवी को महिला बाल विकास मंत्रालय का जिम्मा सौपा जा सकता है, जिस पर खुली दुकान के आरोप लगते रहे हैं. सिंधिया खेमे के सिक्के में बिकती बीजेपी के आरोपों में उनके 10 मंत्रियो का बनना तय माना जा रहा है. अब जिनका पत्ता कटना है उनमें पारस जैन, रामपाल सिंह, राजेन्द्र शुक्ला, गौरीशंकर बिसेन जैसे के नाम है. 

नये चेहरों में सत्ता की तिकड़म भिड़ाने के सहयोगी अरविन्द भदौरिया सहित अन्य है. पारस जैन को काट क्षिप्रा नदी की अस्मत लूटने के आरोप में फंसे मोहन यादव का नाम है. वहीं वो नये चेहरे हैं, जो अब बीजेपी की नैया के खेवनहार हो जायेंगे. आडवाणीजी की तर्ज पर अब बीजेपी को अनुभव कि कोई दरकार नहीं है. सभी लाइन पास होकर केवल यह चिल्लायेंगे कि मैं बीजेपी का हूं. कहेंगे कि मैंने दरिया बिछा कर भाजपा को खड़ा किया है, पर आधुनिक बीजेपी में कोई उनकी व्यथा सुनने वाला नहीं रहेगा. चूकि भाजपा बदल चुकी है, ऐसे में यही जाएगा कि यहाँ तो जो सत्ता लेकर सिंधिया आये हैं, सिक्का उन्हीं का चलेगा. जो बीजेपी का मूल केडर है, वो केडर बस चाल चरित्र में बदलते चेहरे भाजपा का झंडा उठाते घूमेगा कि मैं भाजपा हूं.


'शिवराज' का सॉरी 'सिंधिया' का संभावित मंत्रिमंडल ये रहा 
काफी मशक्कत के बाद कल मध्यप्रदेश मंत्रीमंडल का विस्तार हो रहा है. सब जानना चाहते हैं आखिर कौन ले रहा है शपथ? हमने अपने स्तर से सूत्रों के हवाले से संभावित मंत्रियों की सूची तैयार की है. ये रही - 

केबिनेट मंत्री 
  1. गोपाल भार्गव
  2. भूपेंद्र सिंह
  3. विजय शाह 
  4. यशोधरा राजे सिंधिया
  5. विश्वास सारंग 
  6. संजय पाठक 
  7. अरविंद सिंह भदोरिया 
  8. केदारनाथ शुक्ल  
  9. प्रदुम सिंह तोमर (सिंधिया समर्थक)
  10. इमरती देवी  (सिंधिया समर्थक)
  11. महेंद्र सिंह सिसोदिया  (सिंधिया समर्थक)
  12. प्रभुराम चौधरी   (सिंधिया समर्थक)
  13. एदल सिंह कंसाना   (सिंधिया समर्थक)
  14. बिसाहूलाल सिंह  (सिंधिया समर्थक)

राज्य मंत्री 
  1. उषा ठाकुर  
  2. विष्णु खत्री   
  3. चैतन्य कश्यप  
  4. मोहन यादव  
  5. रमेश मेंदोला 
  6. प्रेम सिंह पटेल  
  7. गिरीश गौतम  
  8. नागेन्द्र सिंह गुड़  
  9. हरदीप सिंह डंग  (सिंधिया समर्थक)
  10. राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव  (सिंधिया समर्थक)

फिलहाल सूची में नहीं, लगभग काट दिए गए हैं ये नाम    
  1. रामपाल सिंह
  2. राजेंद्र शुक्ला
  3. हरिशंकर खटीक
  4. अजय विश्नोई
  5. सुरेंद्र पटवा 
  6. पारस जैन 
  7. ओमप्रकाश धुर्वे 
  8. गौरीशंकर बिसेन
के नाम फिलहाल सूची में नहीं रखे जाने की खबर मिल रही है. 

इनके अलावा अनिल जैन, सिंधिया समर्थक रणवीर सिंह जाटव का नाम भी कुछ सूत्र सूची में बता रहे हैं. कुछ सूत्र गौरीशंकर बिसेन का नाम नहीं काटा गया, बता रहे हैं. जहाँ तक हम समझते हैं इसमें बहुत कम फेरबदल होगा. 

ये नाम और जोड़े गए 
  1. ओमप्रकाश सकलेचा 
  2. जगदीश देवड़ा 
  3. भारत सिंह कुशवाह 
  4. राम किशोर कांवरे 
  5. राम खेलावन पटेल
  6. वृजेन्द्र प्रताप यादव 
  7. सुरेश धाकड़
  8. इन्दर सिंह  परमार 
 


और अंत में 
इतिहास दोहराता है
रामेश्वर शर्मा ने वी डी शर्मा का विधानसभा का टिकट कटवाया था हुजूर से, आज वी डी शर्मा प्रदेश अध्यक्ष हैं, इनका मंत्री पद का टिकट कटवा दिया...









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