उपचुनाव में कुछ बड़े मंत्रियों को हार के बाद खोना पड़ सकता है मंत्री पद, लेकिन इससे सरकार नहीं गिर जायेगी


Jyotiraditya Scindia का नया रोल बदलने जा रहा ...

20 सीट आसानी से ले जायेगी बीजेपी, सिंधिया और उनके साथियों को गद्दार कहते रहो, और बीजेपी में अन्दर के शत्रुओं असंतुष्ट नेताओं के भरोसे बैठे रहना, पड़ जाएगा कांग्रेस को महंगा


जैसे तैसे मंत्रिमंडल बन गया तो अब विभाग वितरण में पेंच फंसा, जैसी ख़बरें आप सुन रहे होंगे. बीजेपी और सिंधिया में खींचातानी चल रही है, बीजेपी और सिंधिया की जोड़ी अनमेल है देखते हैं कब तक चलेगी और बैसाखियों पर टिकी सरकार जल्दी ही गिर जायेगी, जैसी बातों के साथ सिंधिया को गद्दार गद्दार बार बार शोर मचाकर, इन दिनों कांग्रेस केवल इन्हीं बातों के भरोसे दोबारा सरकार बनने की गलतफहमी पाल बैठी है.

अंदरखाने और फील्ड में भी चल रही चर्चाओं के अनुसार उपचुनाव में कुछ बड़े मंत्रियों को भी हार का सामना कर मंत्री पद खोना पड़ सकता है. इनमें सागर, रायसेन सीटें प्रमुख हैं, लेकिन इस भर से सरकार गिर जायेगी, ऐसा कतई नहीं लगता. अभी के हालात में कहा जा सकता है कि 24 में से 20 सीट बीजेपी आसानी से ले जायेगी. 


इसकी सबसे बड़ी बजह है कांग्रेस का केवल सिंधिया और उनके साथियों को गद्दार कहते रहो और बीजेपी में अन्दर के शत्रुओं असंतुष्ट नेताओं के भरोसे बैठे रहना. 15 माह तक सरकार में रहने के बाद जिनसे सरकार ही नहीं संभली, वे इतने जल्दी वापिस सत्ता मिल जाए, के लिए प्रयास के नाम पर बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसी उम्मीद के भरोसे बैठे हैं. 

हाल के एक बयान का ख़ास उल्लेख करना चाहूंगा, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बयान दिया है कि जो विधायक ही नहीं हैं, ऐसे लोगों को बीजेपी ने मंत्री बना दिया. इस बात को लेकर वे उंगली उठा रहे हैं, जबकि वे खुद विधायक नहीं होते हुए मुख्यमंत्री बने थे. आज हरेक के हाथ में मोबाइल है, कैमरा है, वह वीडियो बना रहे हैं, अब कोई बात छुपाई नहीं जा सकती, न ही जनता को बेबकूफ बनाया जा सकता. जनता अब वह सब समझने लगी है. यह बात राजनेता भी जान लें तो यह उनके लिए अच्छा होगा.  




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