VIDEO गैस ख़त्म जिन्दगी ख़त्म, कोरोना मरीज को संजीवनी ने ही दे दी मौत



छतरपुर जिला अस्पताल प्रबंधन का भी असली दिखने वाला नकली चेहरा सामने आया,पूरी दाल काली, भविष्य में लापरवाही तो FIR


मध्यप्रदेश सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं की ठेकेदारी मरीजों की अप्रत्यक्ष रूप से हत्या कर रही है. गुजरात की कम्पनी के पास 108 एम्बुलेंस का ठेका है, जिसके कारण छतरपुर जिले में एक कोरोना मरीज को मौत नसीब हुई. असल में जिस 108 से मरीज को सागर मेडिकल कालेज ले जाया जा रहा था, उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर ख़त्म हो गया और मरीज की सांसें थम गई. 




धीरज चतुर्वेदी

गंभीर मामले छतरपुर जिला अस्पताल प्रबंधन का भी असली दिखने वाला नकली चेहरा सामने आया है जो पूरी दाल को काला दर्शाता है. सिविल सर्जन ने अपनी जिम्मेदारी को साफगोई साबित करते जिगित्सा हेल्थ केयर कंपनी के स्थानीय प्रबंधन को पत्र जारी किया है, जिसमें भविष्य में लापरवाही पर एफआईआर कराने का जिक्र किया है, लेकिन सिविल सर्जन यह बताये कि कोरोना मरीज की मुश्ताक अली पप्पू की सांस थाम कर की जाने वाली मानवीय हत्या में क्या कार्यवाही की. अगर नहीं एक्शन लिया तो क्यो नहीं? 
 

26 जुलाई रविवार को 45 वर्षीय मुश्ताक अली ( पप्पू मुंशी ) की कोरोना से पीड़ित होकर मृत्यु हो गई. पप्पू की इसी दिन कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसे जिला अस्पताल लाया गया पर चिंताजनक हालात के कारण उसे सागर मेडिकल कालेज भेजा गया. छतरपुर जिला मुख्यालय से महज दस किमी दूर रास्ते में ही पप्पू की मौत हो गई. 


पप्पू की मृत्यु का कारण जो सामने आया है वह मानवीय हत्या से कम नहीं है. मृतक के पुत्र लकी अली ने बताया कि जिस एम्बुलेंस से पिता को ले जाया जा रहा था, उसमें रखे सिलेंडर का ऑक्सीजन ख़त्म हो गया था. जिस कारण पिता पप्पू की मृत्यु हो गई. लकी अली ने पिता की मौत के कारणों के पीछे दोषियों पर कार्यवाही की मांग को लेकर जिला कलेक्टर छतरपुर को आवेदन सौपा है. यह मामला सरकारी तंत्र के द्वारा मानवीय हत्या का इस कारण है कि क्योकि जिस 108 एम्बुलेंस से कोरोना मरीज को ले जाया जा रहा था उसमें ऑक्सीजन सिलेंडर भरा हुआ होने का दावा किया जा रहा है. किसी भी मरीज को ले जाने से पहले सिलेंडर में ऑक्सीजन भरी जाती है जिससे मरीज को कृत्रिम सांस दी जा सके. शर्मनाक है कि जब साँसो को थामने वाली ऑक्सीजन ही ख़त्म हो जायेगी तो बदले में मरीज को मौत मिलना स्वाभाविक है. 



एक बड़ा खुलासा यह भी है कि पूरे मध्यप्रदेश में 108 एम्बुलेंस को ठेके पर चलाया जा रहा है. गुजरात की जिगित्सा कम्पनी के पास जीवन की डोर माने जाने वाली 108 एम्बुलेंस का ठेका है. किसी भी मरीज को जब रिफर किया जाता है तो जिला अस्पताल प्रबंधन को कम्पनी के भोपाल ऑफिस को सूचित किया जाता है. जिगित्सा कम्पनी के भोपाल ऑफिस से पूरा नियंत्रण होने से एम्बुलेंस में मिलने वाली पूरी सुविधाओं की जिम्मेदारी भी कंपनी की होती है. सरकार का खेल दिखाने वाला पूरा सिस्टम है कि कोरोना जैसे मरीज को जिस एम्बुलेंस में ले जाया जाता है उसमें कोई भी मेडिकल स्टॉफ नहीं होता बल्कि एम्बुलेंस का चालक और हेल्पर ही विशेषज्ञ बन मरीज की देखभाल करते है. 



कोरोना मरीज पप्पू की जिस 108 एम्बुलेंस में मौत ऑक्सीजन सिलेंडर ख़त्म होने के कारण हुई. उसमें सीधे तौर पर कंपनी की जिम्मेदार लक्षित होती है. अब सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक श्री त्रिपाठी ने कंपनी को पत्र लिखा है. जिसमें भविष्य में लापरवाही करने पर एफआईआर करने की धमकी दी गई लेकिन वर्तमान में कोरोना मरीज पप्पू की मौत की असली वज़ह में कम्पनी पर क्या कार्यवाही की जा रही है, इसका कोई जिक्र नहीं किया है.




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