VIDEO टूट गईं TIK TOK की बेड़ियां, अब खुलकर सांस लीजिये



यार तुम चाइनीज न होते तो, थे मियाँ कमाल के. मात्र तीस सेकेंड में तुम कितनी फनी वीडियोज, कितने मोटिवेशनल थॉट्स, ब्यूटी टिप्स, एरोबिक्स, योगा, तरह तरह की डिशेज, ईजी मैथेमैटिकल टिप्स, पिक्चर मेकिंग, मेडिकल टिप्स, ब्रह्माकुमारी सिस्टर्स की बातें किस किस का लिखूं सब दिखा देते थे, टिकटोक क्या बला है ये तब जाना जब अनुगूँज की फन्नी वीडियोज देखी, कसम से मज़ा आ गया मुझे लगा बहुत मुश्किल काम है मुझसे नही होगा. पर एक दिन Ramesh Muskan जी की पीहू को देखा कमाल की एक्टिंग.. बस झट से हमने भी टिकटोक डाउनलोड कर लिया.  

वत्सला पाण्डेय 

शुरू शुरू में तो समझ ही नही आया कि वीडियो बनाते कैसे है? बॉलीवुड के सेवेंटीज के सुपर डुपर हिट्स पर लोगो के वीडियोज देख कर कसम से दिल डोल जाता था. एक दिन की पैड की खटर पटर में वीडियो बनाने का ऑप्शन पता चल गया, उस समय फिर से मुझे लगा मुझसे नही होगा, पर सोचा कोशिश करने में क्या जाता है, चलो बनाते है... ओऊऊऊऊ ममम्मा एक ही बार मे इत्ता मजेदार.... बस्स जनाब घर बैठे बैठे लिपसिंक करके हेमामालिनी, रेखा जैसी फीलिंग महसूस होने लगी, अरे वहाँ पर रेखा जी की एक दीवानी तो ऐसी मिली उसका साइड पोज डिट्टो रेखा जैसा, एक ठो अमिता बच्चन के री भी मिल गयी... गले मा मफलर लटकाए हांय विजय दीना नाथ चौहान बनी, कसम से का बताये करेजा पे कटार मारे वाली एक्टिंग करे वाले सब जने दिखाई परे.....अच्छा ड्रामेबाजी के साथ साथ ज्ञानी लोग भी हुआ रहय, बोले तो दिलजले आसिक मल्लब कुल जमा टोटल मसाला रहय.  


अच्छा एक बात और सुन लेव... फिल्टर बड़े लल्लन टॉप रहय टिकटोक मा. हम रोज याक फिल्टर लगाय के वीडियो बनाय लेते रहे और व्हाट्सअप स्टेटस पर अपडेट कर देत रहन, बस जरे वाले सुलग जाय. पहले देखे वीडियो फिर लप्प से कूद के इनबॉक्स आवैं और कहै जिज्जी लिपस्टिक का शेड बताय देव नही तो मैं छीन लूंगी, हमहू कह देई अरे परेसान न हो फिल्टर है, अच्छा एक प्रॉब्लम बड़ी थी हुआ बिना पोस्ट किए वीडियो गैलरी में सेव नहीं होता था. शुरुआत में बहुत डर लगे इस चक्कर मे वीडियो अपलोड होते ही डिलीट मार देते थे, मगर फिर प्राइवेसी सेटिंग किये और पोस्ट कर देते थे, व्हाट्सअप के स्टेटस पर लगाए लगाय खुद ही खुश होते रहे, एक रोज गद्य पद्य लिख लिख के जी जब एक ही टेस्ट का हो गया तो मूड बदलने की खातिर मार डरते डरते दुइ चार वीडियो fb पर हम पोस्ट कर दिए. सच बताए उस दिन लगा शायद मुझे ये पोस्ट डिलीट करनी पड़ेगी,लोग टोकेंगे, नसीहत देंगे,पर ऐसा नहीं हुआ, सभी को वो पुराने गानों पर छोटी छोटी वीडियोज बहुत पसंद आई. 

उस दिन एक बात समझ आयी कोई भी सोशल साइट का प्लेटफार्म बुरा नहीं होता,सब कुछ आप पर डिपेंड करता है आप किसी प्लेटफार्म को कैसे यूज करते हो, खैर लगभग पिछले दस महीने मैंने भी टिकटोक ऐप यूज किया मगर इधर जबसे गलवान घाटी वाला झगड़ा स्टार्ट हुआ, fb स्टोरी पर लगी मेरी टिकटोक वीडियोज पर मेरे इनबॉक्स मेरे कई अच्छे मित्रों के कमेंट्स आने लगे. वत्सला जी ये चाइनीज ऐप है इसे यूज करना बंद कीजिए. 

थोड़ी सी तकलीफ हुई, तकलीफ इस बात की यार ऐप चाइनीज है यूज करने से पहले नही पता था, पर जो बात वीडियो में है वो सब तो हिंदुस्तानी है न..... खैर मित्रों का प्यार होता है वो स्वतंत्र होते है कुछ भी कहने और समझाने के लिए, पर उस दिन से टिकटोक पर ड्रामेबाजी में कमी आ गयी थी, व्हाट्सअप के स्टेटस भी बनाना बन्द कर दिया था.... एक तो कौरौना की दहशत, ऊपर से लोकडाउन का मानसिक दबाव ऊपर से फेसबुक का ये चलन है कि यहां एक विषय पर पोस्ट आती है कि भर भर उसी विषय के सभी ज्ञाता बन जाते है. कुल मिलाकर ये समझिये ऐसे उबाऊ माहौल में हमसे एक भी गीत न लिखा जा रहा था,पर खुद को अवसादमुक्त रखने के लिए ये टिकटोक ऐप अच्छा जरिया मुझे महसूस हुआ था. टिकटोक के कुछ यूजर्स की एक्टिंग इतनी लाजवाब थी कि उनके नाम याद हो गए. 


एक रचना नाम की मोटी लेडी इतनी लाजवाब फनी एक्ट करती थी कि उसे देख टुनटुन की याद आ जाती थी,सोनी रावत के सांग्स का कलेक्शन ब्यूटीफुल रहता था उनके सेलेक्ट किये कई सांग्स पर मैंने भी रिपीट किया, कुछ यूजर्स तो बाक़ायदा मेकअप करके इस तरह वीडियो पोस्ट करते कि देखते रह जाइए, पर ये सच्चाई है चाइनीज चाइनीज सुन सुनकर ऐप से मन उचट रहा था,पिछले थर्सडे को फेसबुक पर एक वीडियो देखा किसी फौजी का था पूरा नही देखा बस इतना ही देखा कि वो घाटी के उन रास्तों की तरफ दिखाते हुए कहता है कि देखिये ये रास्ते है यहां सड़के नही है इन्ही दुर्गम पहाड़ी रास्तो पर हमें आगे बढ़ना है, मौसम,भी खराब है पर कोई नही आप सब बेफिक्र होकर टिकटोक चलाइये.... इसके बाद मैंने उसका वीडियो नही देखा, तुरन्त ऐप अनइंस्टाल किया. ऐप को डिलीट करने का ऑप्शन नही था, थर्सडे से ऐप डिलीट कर चुकी थी, कोई अफसोस नही था, न कोई बेचैनी थी. 

पर आज जैसे ही ऐप पर प्रतिबंध की खबर आई....फेसबुक पर टांग खींचने वालों की दुकान चल निकली,अरे कमाल है क्या क्या पोस्ट आ रही है.. टिकटोक चलाने वाले बेरोजगार हो गए, गन्ध मचाने वाले ऐप बन्द,अब क्या करेंगे टिकटोक वाले, कसम से कितनी चिंता है लोगो को दूसरों की. ऐसे लोगो को कुछ नहीं कहना चाहती हाँ इतना जरूर कहूंगी,एक बार झांकिए अपने अपने मन मे और देखिये कितनी बेड़ियों में आपने खुद को बांध रखा है, आपने अपने अंदर छुपी उस नाज़ुक तितली से मन को झूठी मोटे ऐनक वाली जबरदस्ती की इमेज में बांध रखा है,आप सबके भीतर जो छुपा हुआ है उसे खुलकर सांस लेने दीजिये.

स्वागत जरूर कीजिये सरकार के इस फैसले का. पर वो लोग जो अपनी शुष्क ज़िन्दगी में मस्ती भरी अदायगी की चन्द बूंदों से ज़िन्दगी की हरीतिमा को बरकरार रखे थे उनके अंदाज़ पर अपनी कुंठाये मत निकालिए बल्कि सैल्यूट कीजिये उन्हें, हजारों की संख्या के फालोर्स वाले अकाउंट्स के बन्द होने के बाद उनमे से बहुत लोग सच में अवसाद में आ गए होंगे पर देश सर्वोपरि है. 

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी.. माता और मातृभूमि स्वर्ग से भी सुंदर है उसके खातिर एक नही सैकड़ो चाइनीज ऐप कुर्बान हैं. अब तो टिकटोक पर लग गया ताला, पर इस विदाई पर आखिरी वीडियो बनता है. है न, तो पेश है. 
ये पश्चिम के चोर... 





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