जरुरी हैं कमीने टाइप के दोस्त भी


Sushantsinghrajput | LIVE: सुशांत सिंह राजपूत के ...

इसके लिए आपके पास कुछ वो क्या कहते हैं कमीने टाइप के दोस्त होने चाहिए, जो आप कहो कि मुझे अकेले रहना है, तब भी आप को छोड़ के न जायें. 
- लक्ष्मी गामड़

कहते हैं जब परिस्थितियों से पार न पा सको तो उन्हें कुछ देर वैसे ही छोड़ देना चाहिए, क्योंकि वक्त बड़े से बड़े बिगड़े हालातों को सामान्य कर देता है. आज जैसे ही सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु वाली न्यूज सुनी तो यकीन नहीं हुआ. बस मन को समझाने के लिए बार-बार चैनल बदल-बदल के देखा कि काश ये न्यूज़ झूठी हो पर... वो काश एक बहुत बड़ा खालीपन को रचता हुआ एक प्रश्न छोड़ गया. 


क्या सच में इतनी ऊंचाइयों पे जाने के बाद लोग इतने अकेले हो जाते हैं कि वो पलट के देखते ही नहीं कि कोई उनका सच्चा दोस्त हो सकता है, जो उसके डिप्रेशन से बाहर आने में मदद कर सकता है. न जाने कौन सा दबाव था उस पर जो वो किसी के साथ बयां नही कर पाया. सच में हर व्यक्ति के जीवन में कभी न कभी ऐसे हालात आते ही हैं, जब वो डिप्रेशन में चला जाता है और यही वो वक्त होता है जब कोई उसे अपना हाथ थाम के उन हालातों से बाहर निकाल सकें. 

इसके लिए आपके पास कुछ वो क्या कहते हैं कमीने टाइप के दोस्त होने चाहिए, जो आप कहो कि मुझे अकेले रहना है, तब भी आप को छोड़ के न जायें. ऐसे हालत में हमें अवसाद में घिरे लोगों को कभी अकेला नहीं छोड़ना चाहिए. सबसे बड़ी बात अगर आप परेशान हो तो आपको अपनी परेशानी बगैर हिचकिचाहट के अपने खास दोस्त से बाँट लेना चाहिए और जिंदगी के प्रति हमेशा सकारात्मक नजरिया रखने का हौसला बनाये रखना चाहिए. जिंदगी खत्म कर लेना कभी भी सही हल नहीं हो सकता. तुम बहुत याद आओगे सुशांत. ऐसा लग रहा जैसे किसी बहुत अपने को खो दिया.

और जाने से पहले
ये हालात तो बिगड़ते ही इसलिए है कि आप उनसे पार पा सकते हो या नही ये जानने के लिए,हारने के डर से भागों मत डटकर मुकाबला करो.




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