जिन्दगी की बात करने वाला सुसाइड नहीं कर सकता, फिर क्या है बजह?





सुशान्त सिंह की सुसाइड की खबर अगर सच है तो रील लाइफ की चमक धमक के पीछे रियल लाइफ में व्यक्तिगत परेशानियां अकेलेपन का अन्धेरा कितना खतरनाक होता है, यह एक बार फिर सामने आ गया है. साथ ही यह भी कि जिसके आज देश भर में करोड़ों फेंस हैं, असल जिन्दगी में वह कितना अकेला था.. 
  @ मुकुट सक्सेना 

अभी सुसाइड कहना भी जल्दबाजी होगा
सुशान्त सिंह की मृत्यु त्रासद और अत्यंत दु:खद है. साथ ही कई सवाल भी खड़े करती है. आखिर कोई ऐसे ही कैसे आत्महत्या कर सकता है, कोई ऐसी बजह तो दिखनी चाहिए जो कि अभी तक तो नहीं दिख रही है? 

पैसा, सोहरत, खुबसूरती और एक बेहतरीन केरियर, पूरा भविष्य सजा पड़ा था जिसके सामने, आखिर वह सुसाइड कैसे कर सकता है? हालांकि अभी तक सुसाइड की पुष्टि नहीं हुई है. सुसाइड नोट भी नहीं मिला है. मामले की मुम्बई क्राइम ब्रांच जांच कर रही है. PM रिपोर्ट भी कल आयेगी. ऐसे में अभी सुसाइड कहना भी जल्दबाजी होगा. 


8 जून को सुशांत सिंह की मैनेजर दिशा सानियाल की भी 14वें मंज़िल से गिरने से मौत हो गई थी, जिसे सुसाइड माना जा रहा है, लेकिन आज 6 दिन बाद तक भी उसके पीछे की सही बजह सामने नहीं आ सकी है. यह भी साफ़ नहीं हुआ है कि उसने आत्महत्या की. 

मनोवैज्ञानिक बताते हैं आत्महत्या के पीछे सबसे बड़ी बजह होती है सब ओर से निराशा, सब ओर से हताश हो जाना. कहीं कोई एक छोटी सी भी उम्मीद की कोई किरण का नहीं दिखना, लेकिन ऐसी स्थिति भी नहीं दिख रही है. करीबी लोग बता रहे हैं सदा जिन्दगी की बात करने वाला सुशांत सुसाइड तो नहीं कर सकता. 

खैर हम इतना ही कहेंगे चाहे कितनी भी विकट समस्या हो, हर समस्या का समाधान अवश्य होता है, और कभी भी मरने से कोई प्रॉब्लम सॉल्व नहीं होती, हाँ सिर्फ़ तुम नहीं होते, उस खेल में.. यूं हार कर मौत को गले लगाना अच्छा नहीं लगा. 

और अंत में 
ये अलग बात है दिखाई न दे, मगर शामिल ज़रूर होता है
ख़ुदकुशी करने वालों का भी, कोई क़ातिल ज़रूर होता है..



Depression in Your Twenties Linked to Memory Loss in Later Life ...

जब आप बहुत अवसाद में हों

सुदर्शन शर्मा
डिप्रेशन Depression यानि कि अवसाद कभी न कभी हर किसी के जीवन में आता ही है और जब आता है, तब उस व्यक्ति के सर्वाधिक भरोसेमंद व्यक्ति के द्वारा विश्वास टूटता है या कोई ऐसी परिस्थिति बनती है, जिसका कोई हल न दिख रहा हो, पर इसका मतलब ये नहीं होता है कि व्यक्ति की दुनिया ही खत्म हो गई. ऐसे में अपने जीवन का अंत करना तो कोई रास्ता नही होता.


समय परिवर्तनशील होता है, आज बुरा तो कल अच्छा भी होगा और हो सकता है कि फिर से खराब भी हो. ये तो समय चक्र है इससे आप भाग नहीं सकते और इससे भागने वाले को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जैसे कि चमकते सितारे सुशांत को करना है. इस सम्बंध में एक बात तो है कि जब आप बहुत अवसाद में हों तो किन्ही ऐसे लोगों के जीवन के बारे में सोच सकते हैं, जिन्हें आप जानते हैं कि उन्होंने किस प्रकार अपने जीवन को लाचारी और परेशानी से जीते हुए जीया है और उन से बाहर आये हैं. हो सकता है आपको उससे बल मिले और आप उन कठिन परिस्थितियों से बाहर आ जाएँ..




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