सोचने से कहाँ मिलते है तमन्नाओं के शहर, चलने की जिद्द भी जरुरी है मंजिल के लिये, बात आइडिया मेन SDM स्वप्निल वानखेड़े की



यथा नाम तथा गुण. जैसा नाम है वैसे ही गुण से छतरपुर जिले के राजनगर अनुभाग एसडीएम स्वप्निल वानखेड़े ने कोरोना से लड़ाई के लिये अपने नये आइडिया जमीन पर उतारे. संजीविनी वाहन, संजीवनी कवच जैसी योजनाओं से आमजन और कोरोना योद्धाओं को लड़ने का हथियार दिया. वहीं सबसे लोकप्रिय "काम मांगो अभियान" की शुरुआत की. इस योजना में ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने की गारंटी दी गई. 


छतरपुर मप्र / धीरज चतुर्वेदी  

स्वप्निल का अर्थ होता है स्वप्न के समान. राजनगर अनुभाग एसडीएम स्वप्निल वानखेड़े ने सपनो को ही हकीकत बनाकर जमीन पर उतारा. कोरोना आपदा में जब  संक्रमण को रोकने का मंथन चल रहा था, तब इस अधिकारी ने अपने आइडिया को मथ आम लोगों की सुरक्षा के लिये अमृत निकला.


 3 मई को संजीवनी वाहन को एसडीएम वानखेड़े ने मैदान में उतारा. मध्यप्रदेश में पहली ऐसी पहल की गई है जिसके अंतर्गत संजीवनी वाहन के द्वारा स्वास्थ्य कर्मी किसी भी कोरोना संदिग्ध के संपर्क में आए स्क्रीनिंग जांच करते है.  मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य कर्मी लगातार कोरोना संक्रमित के संपर्क में आने के कारण कोरोना से संक्रमित हो रहे हैं इसके अलावा बहुत सारे जगहों पर स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले भी हुए हैं. इन्हे ध्यान में रख राजनगर प्रशासन एवं डॉक्टरों के शोध द्वारा संजीवनी वाहन की नई पहल शुरू की गई. 


राजनगर एसडीएम स्वप्निल वानखेडे का कहना था कि संजीवनी वाहन के द्वारा अब स्वास्थ्य कर्मी किसी भी क्षेत्र में अंदर तक जा पाएंगे और बिना गाड़ी के बाहर उतरे वह किसी भी संदिग्ध का टेंपरेचर और बाकी सब जानकारी ले पाएंगे. संजीवनी वाहन में बाहर से एक कैमरा और एक इंफ्रारेड टेंपरेचर सेंसर लगाया गया है जो संदिग्ध का फोटो लेगा और टेंपरेचर लेता है.  उसके पश्चात यह जानकारी  संजीवनी ऐप में भरी जाती है. संजीवनी वाहन से पी पी ई किट की जरूरत नहीं रहती. 

एसडीएम स्वप्निल ने प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान से प्रेरित होकर 15 मई को मिशन संजीविनी कवच कि शुरुआत की. संजीवनी कवच का मुख्य उद्देश्य पीपीई किट की उपलब्धता के लिये स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया जाये. वह भी स्वसहायता समूह की महिलाओं के माध्यम से जिससे उन्हें रोजगार भी मिल सके. एसडीमएम वानखेड़े के अनुसार निर्मित होने वाली पीपीई किट में डिस्पोजल गाउन, डिस्पोजल शू कवर, डिस्पोजल फेस मास्क, हाथ के दस्ताने तथा डिस्पोजल फेस शिल्ड दिया जायेगा.

इस किट का दाम मार्केट में आने वाले किट की दाम से आधा यानी मात्र 400 रूपए ही होगा.  जिसे स्थानीय स्तर पर ही लोगों से तैयार कराया जा रहा है.  राजनगर एसडीएम स्वप्निल वानखेड़े जी ने यह पीपीई किट की शुरुआत कर  जिला चिकित्सालय में 50 किट अपनी तरफ से प्रदान की.


यह बात तो कोरोना से सीधे जंग करने बचाव की थी. पूरे देश में प्रवासियों का अपने गांव कि ओर लौटना आज भी थमा नहीं है. गांव के लोगो खासकर प्रवासियों को रोजगार देना चुनौती के समान है. राजनगर एसडीएम ने इसका ना सिर्फ हल निकला बल्कि मजदूरो को मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने कि गारंटी भी दी. सीधे गरीबों को लाभ देने के लिये उन्होंने 18 मई को " काम मांगो अभियान' की शुरुआत की. इसके लिये राजनगर अनुभाग कार्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया. जिसका सम्पर्क नंबर जारी किया गया. इस अनूठे अभियान के तहत जनपद राजनगर अंतर्गत निवासी कोई भी भी ग्रामीण रोजगार की मांग कर सकता है. कंट्रोल रूम से सम्पर्क होने के बाद सम्बंधित ग्रामीण को तीन दिवस के अंदर रोजगार देने की गारंटी दी गई है. विधिवत रूप से इस अभियान को 25 मई से अमल में लाया गया. 

कंट्रोल रूम की प्रभारी मूलतः सहायक मानचित्रकार हूमा खान को बनाया गया है. हूमा खान बताती है कि अभी तक लगभग 50 से अधिक लोगो ने अभियान के तहत रोजगार कि कंट्रोल रूम के माध्यम से मांग कि है. जिसमें से 40 से अधिक लोगो को रोजगार मुहैया करा दिया गया है. हूमा खान बताती है कि कंट्रोल रूम पर कॉल आने पर पीसीओ या सचिव को रोजगार मांगने वाले के नाम ओर सम्पर्क पते- नंबर से अवगत कराया जाता है.. जो उस ग्रामीण को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराते है. 

राजनगर एसडीएम स्वप्निल वानखेड़े के जमीनी हकीकत बन आइडिया कोरोना के दौर में अचूक अस्त्र है. खासकर काम मांगो अभियान तो पूरे देश में लागू करने जैसी सोच है. यह है स्वप्निल कि सपनों की उड़ान ही अपने लिये नहीं, बल्कि समाज की सुरक्षा के लिये उड़ी गई है.



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