ठनी तो ऐसी कि सरकार शराबी हो गई




'जनता मेरी जिन्दगी', 'हर संकट में जनता के साथ हूँ', और 'शराब की एक भी नई दुकान मत खुलने देना, यदि दुकान खुले तो डंडे उठा लेना', जैसी बातें करने वाले शिवराज की सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए अब उसी जनता को शराब बेंचेगी. असल में सरकार और शराब कारोबारियों में विवाद के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि जो लोग सरकार की शर्त मानने को तैयार हैं, वे शपथ पत्र पेश करें और दुकानें खोलें और जो लोग सरकार से सहमत नहीं है, वे दुकानें सरेंडर कर दें. इसके बाद प्रदेश के 67 प्रतिशत शराब कारोबारियों ने दुकानें सरेंडर कर दी हैं. अब  प्रदेश के भोपाल, इंदौर समेत 12 जिलों में सरकार खुद शराब बेचेगी.
- हृदेश धारवार


मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार इन दिनों आर्थिक संकट से जूझ रही है. 2 महीने के लॉक डाउन ने अर्थ व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है. अब सरकार किसी भी तरीके से राजस्व जुटाना चाहती है. सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व शराब, खनिज और पेट्रोल से मिलता है. बारिश शुरू होने वाली है, इसलिए खनिज का काम अभी बंद रहेगा. मध्यप्रदेश में पेट्रोल के दाम अन्य राज्यों की तुलना में अधिक है. ऐसे में पेट्रोल के दाम बढ़ाने का विकल्प भी सरकार के पास नहीं है. अब सरकार के पास राजस्व बढ़ाने का एक मात्र विकल्प शराब ही है. 

मध्यप्रदेश में शराब कारोबारियों और सरकार के बीच  पटरी नहीं बैठ पाई है. हाई कोर्ट ने भी सरकार और शराब कारोबारियों के पाले में गेंद फेंक दी है. कोर्ट ने स्पष्ट कहा है जो लोग सरकार की शर्त मानने को तैयार हैं वे शपथ पत्र पेश करें और दुकानें खोलें और जो लोग सरकार से सहमत नहीं है, वे दुकानें सरेंडर कर दें. अब स्थिति यह है कि प्रदेश के 67 प्रतिशत शराब कारोबारियों ने दुकानें सरेंडर करने का मन बना लिया है. प्रदेश सरकार के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार किसी के दबाव में आने वाली नहीं है. सरकार और शराब कारोबारियों में ऐसी ठनी कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए शराब बेचनी पड़ रही है. अब  प्रदेश के भोपाल, इंदौर समेत 12 जिलों में सरकार खुद शराब बेचेगी.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान हमेशा से शराब बिक्री का विरोध करते रहे हैं. पिछले कार्यकाल में उन्होंने जब नर्मदा सेवा यात्रा निकाली थी. तब नर्मदा जी किनारे से 1 किलो मीटर के क्ष्रेत्र में शराब की दुकानें बंद करने का निर्णय लिया था. इतना ही नहीं कमलनाथ सरकार ने जब शराब की नई दुकानें खोलने  और बार लाइसेन्स देने की घोषणा की थी तब शिवराज सहित पूरी भाजपा ने जमकर विरोध किया था.


शिवराज ने  प्रदेश की माता- बहनों से कहा था कि शराब की एक भी नई दुकान मत खुलने देना,यदि दुकान खुले तो डंडे उठा लेना. अब शिवराज सरकार खुद शराब बेचने जा रही है. 

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 9 हजार करोड़ रुपये प्रति वर्ष के शराब व्यवसाय को 13 हजार करोड़ का व्यवसाय बनाने की दिशा में काम किया. इसके लिए उन्होंने होटल, रिसोर्ट को भी लाइसेंस देने की योजना बनाई थी. इसके अलावा महिला वाइन शॉप खोलने की भी खूब चर्चा रही. 
सरकार को शराब से 10 हजार 600 करोड़ रुपये का राजस्व प्रति वर्ष मिलता है. शराब ठेकेदार इस बढ़ी हुई  राशि मे 20 से 25 प्रतिशत की छूट मांग रहे हैं . लेकिन सरकार ने छूट देने से साफ इंकार कर दिया. शराब कारोबारियों का मत है कि लॉक डाउन की वजह से दुकानें बंद रही. ऐसे में बढ़ी हुई राशि देना शराब  कारोबारियों को मंजूर नहीं है. 

इतना ही नहीं शराब कारोबारी सरकार की मनमर्जी के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गए. कोर्ट ने बगैर हस्ताक्षेप के सरकार और शराब ठेकेदारों पर निर्णय छोड़ दिया. सरकार को यह उम्मीद है कि यदि शराब की दुकानों की फिर से नीलामी की जाती है , तो उन्हें और अधिक राशि मिल सकती है.  वहीं शराब कारोबारियों का मत है कि दोबारा नीलामी करने में सरकार को कम से कम  3 से 4 हजार करोड़ रुपये का घाटा होगा. खरगोन का ताजा उदाहरण सामने है.  जहां शराब की दुकान की दोबारा नीलामी की गई. खरगोन से पिछली बार की तुलना में कम राजस्व प्राप्त हुआ है. यही वजह है कि शराब कारोबारी बढ़ी हुई राशि जमा करने के पक्ष में नहीं है. ऐसे में सरकार की जो मंशा है वो कैसे पूरी होगी? यह एक बड़ा सवाल है.



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