‘मोदी के गोद लिए गांव में लोग मर रहे भूखे’ सच्चाई बयाँ की तो पत्रकार पर FIR



नज़र आती नहीं मुफ़्लिस की आँखों में तो ख़ुशहाली, कहाँ तुम रात-दिन झूठे उन्हें सपने दिखाते हो…

कुछ ऐसा ही हुआ है देश के प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी की लोकसभा वाराणसी में। उक्त लाइन देश के प्रधानमंत्री द्वारा गोद लिए हुए गांव की सच्चाई बयाँ करती है। हालांकि इस सच्चाई को जब दिल्ली की एक पत्रकार ने दुनिया के सामने उजागर किया तो सत्ता के अलंबरदारो को यह सच हजम नहीं हुआ। फलस्वरूप चौथे स्तम्भ की घेराबंदी कर दी गई। जिस पत्रकार ने यह सच उजागर किया कि मोदी के द्वारा गोद लिए गांव में लोग भूखे मर रहे हैं उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया।


आकाश नागर     

“वाराणसी के जिस गांव को पीएम मोदी ने गोद लिया था वहां के लोग लॉकडाउन में भूखे”। इसी शीर्षक से खबर लिखी थी दिल्ली की पत्रकार सुप्रिया शर्मा ने। सुप्रिया वेबसाइट ‘स्क्रोल’ की संपादक है। पत्रकार सुप्रिया शर्मा पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है। यह मुकदमा सुप्रिया शर्मा पर इसलिए दर्ज किया गया है कि उसने मोदी के गोद लिए गांव की धरातलीय रिपोर्टिंग की थी।


स्क्रोल की संपादक सुप्रिया शर्मा पर मानहानि का मुकदमा दर्ज किया गया है। उनके खिलाफ वाराणसी के रामनगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार यह प्राथमिकी वाराणसी के डोमरी गांव निवासी माला देवी द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है। डोमरी गांव को प्रधानमंत्री ने आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया है।

पत्रकार सुप्रिया शर्मा ने कोविड-19 लॉकडाउन के असर पर एक खबर के लिए माला देवी का इंटरव्यू लिया था। खबर में कहा गया कि माला देवी ने बताया कि वह एक घरेलू कामगार हैं और उनके पास राशन कार्ड न होने की वजह से लॉकडाउन के दौरान उनको राशन की समस्या उत्पन्न हुई है।

पुलिस के अनुसार एफआईआर में माला देवी ने आरोप लगाया है कि सुप्रिया शर्मा ने उनके बयान को गलत तरीके से तोड मोड कर पेश किया है। वह घरेलू कामगार नहीं हैं, बल्कि वह आउटसोर्सिंग के माध्यम से वाराणसी नगरपालिका में स्वच्छता कार्यकर्ता के रूप में काम करती थीं और लॉकडाउन के दौरान उनको या उनके परिवार को कोई भी समस्या नहीं हुई है। ना वह भूखी मरी और ना ही उसका परिवार।

इसी के साथ मुकदमे में माला देवी ने आरोप लगाया है कि सुप्रिया ने लॉकडाउन के दौरान उनके और उनके बच्चों के भूखे रहने की बात कहकर उनकी गरीबी और जाति का मजाक उड़ाया है। रामनगर पुलिस ने इस मामले में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, आईपीसी की धारा 501 और 269 के तहत केस दर्ज किया है।

हालांकि, दूसरी तरफ चर्चा यह भी है कि वाराणसी पुलिस ने माला देवी पर दबाव देकर पत्रकार के खिलाफ यह मुकदमा दर्ज कराया है। क्योंकि पत्रकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा गोद लिए हुए गांव का सच उजागर किया और पूरे देश को बताया कि एक प्रधानमंत्री के गोद लिए हुए गांव में किस तरह से लोग भूखे मर रहे हैं। यह खबर जब देश-दुनिया में चली तो पीएम नरेंद्र मोदी लोगों के निशाने पर आ गए। बताया जा रहा है कि इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस हरकत में आई और पुलिस में माला देवी को दबाव बनाया कि वह पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कराएं।




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