कोरोना के गंभीर मामलों में हो सकता है 'डेक्सामेथैसन' का इस्तेमाल, स्वास्थ्य मंत्रालय ने दी मंजूरी



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कोविड-19 के संक्रमण के उपचार के संबंध में दिन ब दिन बढ़ते चिकित्सीय ज्ञान के साथ कदमताल करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने संक्रमण के हल्के गंभीर से लेकर अधिक गंभीर मामलों में मिथाइलप्रेडीनिसोलोन के विकल्प के रूप में डेक्सामेथैसन के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी है। 


मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी कि कोरोना संक्रमण के उपचार के क्लीनिकल प्रबंधन प्रोटोकॉल को अद्यतन करते हुए डेक्सामेथैसन के इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है। यह परिवर्तन विशेषज्ञों की रायशुमारी और उपचार में इसके लाभ के पयार्प्त सबूत मिलने पर किया गया है। इससे पहले 13 जून को प्रोटोकॉल अद्यतन हुआ था। 

डेक्सामेथैसन एक 'स्टेरायड' है और इसका इस्तेमाल रोगप्रतिरोध तथा सूजन से संबंधित समस्याओं में किया जाता है। रिकवरी क्लीनिकल ट्रायल में कोविड-19 के मरीजों को यह दवा दी गयी। इस ट्रायल में यह पाया गया कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को इससे लाभ पहुंचता है तथा वेंटिलटर पर के मरीजों की मृत्युदर एक तिहाई और ऑक्सीजन थेरेपी के मरीजों की मृत्युदर करीब 2० प्रतिशत घट गयी। यह दवा जरूरी दवाओं की राष्ट्रीय सूची(एनएलईएम) का हिस्सा है और आसानी से उपलब्ध है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव प्रीति सूदन ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अद्तन प्रोटोकॉल की जानकारी दे दी है, ताकि इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करने की तैयारी की जा सके और कोरोना संक्रमितों पर आधिकारिक रूप से इसका इस्तेमाल हो सके।




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