कोरोना को मिल रहा मनचाहा मौसम, विशेषज्ञों का कहना 'विकरालता अभी बाकी है' कैसे बचें?


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वर्तमान में कोरोना संक्रमण के समय चिकित्सा क्षेत्र में चिकित्सा, बचाव और सलाह की अचानक बाढ़ सी आ गयी है, जिससे जन सामान्य दिग्भ्रमित हो गया है या हो जाता है, जो कि स्वाभाविक है, लेकिन इस बात पर भी ध्यान दें कि जो भी बातें बताई जाती हैं, वह लोकहित में होती हैं. हो सकता है कि बहुतों को यह पसंद न हो, पर लेखन का उद्देश्य यह होता है कि लोकहित की बात/ जानकारी अधिकतम लोगों तक पहुंचे और एक भी उसका अनुपालन कर ले, तो लेखन सफल मान लिया जाता है. इस समय मोबाइल /इंटरनेट द्वारा अधिकतम जानकारी मिल रही हैं, पर किसी के द्वारा भेजी या लिखी जा रही हैं तो वह अपना कार्य/ कर्तव्य कर रहा है. यह भूमिका जरुरी इस लिए भी है कि यह समय कोरोना के साथ अन्य बीमारियों के प्रकोप का समय है. इस समय की गयी सावधानी आपके लिए हितकारी हो सकती है, सो अवश्य ध्यान दें. 

डॉक्टर अरविन्द प्रेमचंद जैन भोपाल


हाल में निसर्ग तूफ़ान के बाद देश भर में हल्की कहीं कहीं भारी बारिश हो गई. अब इसके बाद धूप निकलना भी शुरू हो गया है. निश्चित ही यह अब यह चिपचिपे और उमस भरे मौसम में कोरोना से बचकर रहना थोड़ा अधिक मुश्किल होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि नमी के महौल में कोरोना वायरस गर्म मौसम की तुलना में अधिक समय तक सक्रिय रहता है, जैसा कि विशेषज्ञ बता रहे हैं. वायरस कितनी तेजी से फैल रहा है और कितना घातक है, यह हम इसी बात से समझ सकते हैं कि अब जब देश में एक दिन में कोरोना के लगभग 10 हजार पॉजिटिव केसेज आ रहे हैं, तब भी विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस से होने वाले संक्रमण का विकराल रूप अभी आना बाकी है. 


कोरोना को मिल रहा मनचाहा मौसम!
इस समय जून के महीने की गर्मी और बारिश के कारण बढ़ रही उमस ने जीना मुश्किल कर रखा है. कभी बेतहाशा लू चलने लगती है. तो कभी पसीने और उमस के कारण शरीर चिपचिपाने लगता है. ऐसा होता तो हर साल है. लेकिन कोरोना काल में इस तरह के मौसम ने डर कहीं अधिक बढ़ा दिया है. हमेशा की तरह हम आज भी आपसे यही कहेंगे कि किसी भी मुसीबत का सामना उससे डरकर नहीं किया जा सकता, बल्कि बुद्धि और विवेक के साथ उससे लड़कर ही जीता जा सकता है.

नमी में अधिक समय तक सक्रिय रहता है कोरोना
कई अलग-अलग अध्ययनों में चिकित्सक इस बात को बता चुके हैं कि ठंडी और नमीवाली जगह पर कोरोना अधिक समय तक जीवित और सक्रिय रहता है. जबकि गर्मी और धूप में इस वायरस के ऊपर बनी प्रोटीन परत विघटित होने लगती है और यह कुछ ही घंटों में प्रभावहीन हो जाता है.

गर्मी में ऐसे बढ़ाएं शरीर की मजबूती
गर्मी के मौसम में पसीने के कारण शरीर में बहुत जल्दी पानी की कमी होने लगती है. इससे हमें थकान अधिक महसूस होती है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है. इसलिए जरूरी है कि गर्मी के मौसम में आप बिना प्यास के भी हर आधा-से एक घंटे में पानी पीते रहें.

अपनी भोजन में तरल चीजों और ताजे फलों को अधिक से अधिक मात्रा में शामिल करें. ताकि गर्मी के कारण शरीर से निकल रहे सोडियम और ग्लूकोज का स्तर शरीर में बना रहे. साथ ही शरीर बिल्कुल भी कमजोर ना हो ताकि मौसमी फ्लू या कोरोना वायरस आप पर हावी हो सके.

ये तरल पदार्थ उत्तम
गर्मी और उमस के इस मौसम में चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स के विकल्प छोडकर अगर आप घरेलु नुस्खे को अपनाएंगे तो ज्यादा स्वस्थ रहेंगे. इसके लिए आपको अपनी तरल आहार में छाछ, लस्सी, दही, आम का पना, जलजीरा और काढ़ा जैसे शुद्ध भारतीय पेय पदार्थो का सेवन करें.
ऐसा करने की सलाह के पीछे चिकित्सकों का मकसद आपको देसी तरीकों से वायरस की जद में आने से बचाना है. ताकि दवाओं पर खर्च भी ना हो, आपको पोषण भी मिले और बेकार की परेशानी से आप बचे रहें.

इन फलों का सेवन है जरूरी
-गर्मी के मौसम में तरबूज, खरबूजा, आम, पपीता और केला ऐसे फल हैं, जो हर जगह आसानी से मिल जाते हैं. इनके साथ ही बेल भी मार्केट में आसानी से उपलब्ध रहता है. आपकी जानकर हैरानी हो सकती है कि यदि आप हर दिन इनमें से एक फल का सेवन भी करेंगे तो शरीर को जरूरी पोषण मिलता रहेगा और आपकी इम्युनिटी बढ़ी रहेगी.


स्वच्छता का पूरा ध्यान
चिपचिपे मौसम में घर और आस-पास के माहौल में यदि कोरोना का संक्रमण आ जाए तो इसे पनपने के लिए जरूरी स्थितियां ना मिल पाएं, इस बात पर पूरा ध्यान दें. इसके लिए घर में हर दिन सफाई करें.

फर्श को साफ रखें और जिन चीजों को बार-बार हाथ लगाया जाता है, जैसे घर के दरवाजों के कुंडे, फ्रिज का हैंडल, फोन, टीवी का रिमोट आदि को हर दिन सैनिटाइज जरूर करें.

दिन में दो बार नहाएं, सरसों तेल जरूर लगाएं   
आप स्वयं दिन में दो बार नहाएं. यदि नहाना संभव ना हो तो हाथ-पैर धोकर और कपड़े बदलकर सोएं. इसके साथ ही पैर के तलुओं, नाक के सुरों और नाखूने के आस-पास सरसों तेल जरूर लगाएं. यह वायरस और बैक्टीरिया को मारने में बहुत उपयोग होता है.

दुरी बनाकर रहना और जोश में होश न खोना इस समय की समझदारी है, क्योकि इस रोग का इलाज़ न होने से हम अदृश्य भय से भयभीत हैं, जो स्वाभाविक है.

इसलिए बचाव ही इलाज़ है और प्रत्येक व्यक्ति मूल्यवान है. सामान्य उपचार एवं बचाव से आप सुरक्षा कवच में रहेंगे.




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