TV फोड़ने वाली ड्रामेबाज़ी नहीं चलेगी, जनता मास्टर स्ट्रोक के इंतज़ार में है


चीन से व्यापार बंद कर देने से भारत पर ...

इन दिनों TV फोड़ने वाली वीडियो जम कर वायरल हो रही है इसी के साथ, चीनी सामान तोड़ना, चीनी सामान न ख़रीदना बेवक़ूफ़ी से ज़्यादा कुछ नहीं है. बताते हुए यह मैसेज भी सोशल मीडिया पर जम कर वायरल हो रहा है. 


मैसेज में कहा जा रहा है 
''चीनी सामान तोड़ना, चीनी सामान न ख़रीदना बेवक़ूफ़ी से ज़्यादा कुछ नहीं है. भावना में लोगों को बहाकर बेवक़ूफ़ बनाना बहुत हो चुका, अब यह छोड़ा जाना चाहिए, यह नहीं चलेगा. जो सामान में ख़रीद चुका हूँ, उसको तोड़कर में चीन का नुक़सान करूँगा या अपना? जो सामान चीन से आयात होकर भारत आ चुका है, उसका बहिष्कार करके आप चीन का नुक़सान करेंगे या उन छोटे दुकानदारों का, जिन्होंने अपनी रोज़ी रोटी के लिए यह सामान ख़रीदा है? 

अगर चीन के सामान का बहिष्कार करना है तो प्रधानमंत्री जी TV पर आकर एलान करें कि आज रात 12 बजे के बाद से चीन से व्यापारिक रिश्ते भारत ख़त्म कर रहा है. चीन से कोई सामान आज के बाद आयात नहीं होगा. चीन की जितनी भी कम्पनी भारत में काम कर रही हैं, उनका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से आज, अभी से कैन्सल किया जाता है. चीन का सामान आयात नहीं होगा तो भारत ''आत्मनिर्भर'' भी बन जाएगा और चीन को सबक़ भी मिल जाएगा. TV फोड़ने वाली ड्रामेबाज़ी नहीं चलेगी, जनता मास्टर स्ट्रोक के इंतज़ार में है..''

गलवान घाटी में चीन की हरकत देखने के बाद वहां की खूनी वामपंथी सत्ता के खिलाफ देश का उबलना बहुत ही स्वाभाविक है। लेकिन, कूटनीति सिर्फ भावनाओं का खेल नहीं है। इसकी हकीकतों से भी पूरी तरह से मुंह मोड़े रखना सही नहीं होगा। ये बात इसलिए हो रही है कि देश भर में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांगें उठ रही हैं। चाइनीज कंपनियों के कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने की खबरें सुनाई पड़ रही हैं। गलवान में देश के जवानों के साथ चीन ने जो खूनी खेल खेला है, उसके बाद ऐसा गुस्सा लाजिमी है। लेकिन, तात्कालिक तौर पर ऐसी प्रतिक्रिया सही भी है और होनी भी चाहिए, ताकि चीन को भी एहसास रहे कि कुछ ही समय बाद भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला उसका तमगा भी छीनने के लिए तैयार है। ऐसे में भारतीयों को नाराज करके वह भी सुखी नहीं रह सकता। 


लेकिन इसी के साथ हमें यह भी जान लेना होगा कि 
सवाल है कि अगर व्यापारिक संबंध तोड़ने का फैसला लिया जाता है तो नुकसान ज्यादा किसको होगा? घाटे में ज्यादा कौन रहेगा?

हम आगे चर्चा करें उससे पहले एक नजर इस पर डाल लेते हैं कि अभी भारतीय अर्थव्यस्था में चीन ने कितना पैसा लगा रखा है। एक अपुष्ट आंकड़ों के मुताबिक चाइनीज कंपनियों ने भारत में 800 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश कर रखा है। भारत के स्मार्टफोन के बाजार में चाइनीज कंपनियों का 75 फीसदी मार्केट शेयर है। भारत की स्टार्टअप कंपनियों में चीन का निवेश करीब 550 करोड़ अमेरिकी डॉलर का है। ये सिर्फ वो फिगर हैं, जो हमें यह विचार करने के लिए मजबूर करते हैं कि क्या हम चीन से व्यापारिक रिश्ते बंद करने के बाद पैदान होने वाली स्थितियों के लिए तैयार हैं? वैसे आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से चीन ने भारत में 234 करोड़ डॉलर का एफडीआई कर रखा है। इसके अतिरिक्त 55 करोड़ डॉलर सालाना चीन से पर्यटकों के जरिए भारत पहुंचता है। व्यापार बंद करने से चीन को कितना नुकसान होगा ? यही नहीं द्विपक्षीय व्यापार में चीन हमेशा से हमसे आगे रहा है। मसलन, 2018 में भारत का व्यापार घाटा 5,786 करोड़ अमेरिकी डॉलर का था। रिपोर्ट बताती हैं कि 2019 में चीन ने भारत को 6,800 करोड़ डॉलर का निर्यात किया, जबकि भारत से उसका आयात 1,632 करोड़ डॉलर का रहा। 

इस हिसाब से 2019 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 5,200 करोड़ डॉलर का रहा। हालांकि, ये सही है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इस अंतर को पाटने की बहुत कोशिश की है। चीन से व्यापार बंद करने के पक्ष में ये दलील दी जा रही है कि इससे इतने बड़े व्यापार घाटे को पाटा जा सकेगा। लेकिन, सवाल ये भी उठता है कि इससे चीन को कितनी मार पड़ेगी? अमेरिकी डॉलर में भारत के कुल व्यापार का चीन सिर्फ 5 फीसदी ही आयात करता है, जबकि, भारत के आयात में उसकी 14 फीसदी हिस्सेदारी है। जबकि, चीन के कुल निर्यात में भारत का हिस्सा महज 3 फीसदी ही है; और सबसे बड़ी बात चीन जो भारत से आयात करता है, वह उसके कुल आयात का मात्र 1 फीसदी ही है। यानि, अगर भारत उससे व्यापारिक रिश्ते तोड़ लेता है तो इन आंकड़ों से नहीं लगता है कि उसे कोई ज्यादा बड़ा झटका दिया जा सकता है।
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मोदीजी भाजपा के लद्दाख से सांसद ही कह रहै हैं कि चीन हमारी सीमा के अँदर आ गया है, और आप यह क्या कह रहे हैं?
 




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