चीन-पाकिस्तान मिलकर कर रहे प्लानिंग, रात्रि में कर सकते हैं आक्रमण


बड़ी साजिश! चीन और पाकिस्तान एकसाथ ...

भारत के ताकतवर मित्र राष्ट्र युद्ध को विश्व युध्द की धमकी देकर शांत कर देंगे. इस प्रकार एक मोर्चे पर ही लड़कर भारत को युध्द लम्बा खींचना है. विश्व समुदाय, परमाणु बम के घातक परिणामों से डरकर शांति की पहल करे और युध्द समाप्त करने की बात करे. इस बीच जैसे चीन ने नेपाल को भड़काया है वैसे ही यदि हम वियतनाम, जापान, इंडोनेशिया, ताइवान से चीन पर आक्रमण करा दें तो भारत की जीत पक्की है. यह रणनीति बगैर अमेरिका के सपोट की है. यदि अमेरिका सपोट करता है तो इजरायल, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान आदि के सपोट मिलने से भारत न केवल 100% विजयी होगा और एशिया में शांति दूत बन कर उभरेगा, बल्कि पृथ्वी पर कई वर्षों की शांति को स्थापित करेगा. यदि भारत दोनो मोर्चो चीन और पाकिस्तान से लड़ने का प्रयास करेगा तो हार जाएगा. ऐसे में क्या हो हमारी रणनीति? 



संजय सक्सेना 

भारत की युद्ध की रणनीति क्या होना चाहिए केवल विजयी रणनीति. जब चीन भारत पर आक्रमण करता है तो एक मोर्चे पर पाकिस्तान भी आक्रमण करेगा. दोनो से हमे निपटना है. पाकिस्तान का कुछ दिन पहले रात्रि में युध्याभास यह दर्शाता है कि दोनों रात्रि में आक्रमण करेंगे, उनकी यह प्लानिग है. भारत को युद्ध का आगाज होने से पहले अपनी सेटेलाइट नष्ट करने वाली मिशाइलों  को पाकिस्तान और चीन की सीमा पर निगरानी करने वाली इन देशों की सेटेलाइट को नष्ट करने के लिए सेट कर देना चाहिए. 


युद्ध प्रारम्भ होते ही सबसे पहले सेटेलाइटों को नष्ट करना चाहिए. इससे दुश्मन के विमानों ओर मिशाइलों को दिशा निर्देशों का अभाव हो जाएगा और 20 %युद्ध हमारे पक्ष में आ जायेगा. तत्पश्चात पाकिस्तान पर कम से कम 10 हाइड्रोजन बमों का इस्तेमाल करना होगा, इससे आक्रमण केवल एक पक्षीय (चीन) की तरफ का रह जायेगा. चायना की सीमा से 150 किलोमीटर अंदर भारत चीन सीमा पर 5 परमाणु बमों को गिराना होगा. जिससे चीनी पैदल सैनिकों का भारत में मार्ग अवरुध्द हो जाये. नुकसान कम होने पर चायना परमाणु बमों का उच्च स्तर पर प्रयोग नहीं करेगा. चीनी थल सेना का प्रवेश हवाई जहाजों से भारत में कम हो पायेगा और भारत में उसकी पकड़ न हो पायेगी. 

बात करें हवाई लड़ाई की तो हवाई लड़ाई में हो सकता है हमारा नुकसान हो, हम पर भी परमाणु बम गिरे, किन्तु ब्रह्मोस मिसाइल का चायना के पास तोड़ नहीं रूस का एस 400 भारतीय विमानों को नुकसान पहुचा सकता है. अतः भारतीय विमान अपने क्षेत्र की सीमा पर तैनात रहे, किसी चीनी विमान को न घुसने दे, मिराज जैसे विमान तेजस जैसे विमान चायना का नुकसान करते रहे. इससे विमानों को नुकसान कम होगा, चीन आक्रमण करेगा तो उसे नुकसान ज्यादा होगा. सेटेलाइटों के नष्ट होने से भारत में टारगेट हिट नहीं होंगे. सूर्या, पृथ्वी आदि जितनी मिसाइल हैं, एस 400 न रोक पायेगा, इससे युद्ध लम्बा खिंच जाएगा. इस बीच अमेरिका की एंट्री भारत के पक्ष में हो जाये तो सोने पे सुहागा किन्तु ऐसा होना मुश्किल लगता है, क्योंकि अमेरिका रूस को भारत का पक्ष लेने से रोक सकता है. उसने रूस को कवर कर रखा है यदि दोनों तटस्थ रहते हैं, और युद्ध ज्यादा दिनों तक चलता है तो विश्व समुदाय शांति की बात करेगा. 


भारत के ताकतवर मित्र राष्ट्र युद्ध को विश्व युध्द की धमकी देकर शांत कर देंगे. इस प्रकार एक मोर्चे पर ही लड़कर भारत को युध्द लम्बा खींचना है. विश्व समुदाय, परमाणु बम के घातक परिणामों से डरकर शांति की पहल करे और युध्द समाप्त करने की बात करे. इस बीच जैसे चीन ने नेपाल को भड़काया है वैसे ही यदि हम वियतनाम, जापान, इंडोनेशिया, ताइवान से चीन पर आक्रमण करा दें तो भारत की जीत पक्की है. यह रणनीति बगैर अमेरिका के सपोट की है. यदि अमेरिका सपोट करता है तो इजरायल, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, जापान आदि के सपोट मिलने से भारत न केवल 100% विजयी होगा और एशिया में शांति दूत बन कर उभरेगा बल्कि पृथ्वी पर कई वर्षों की शांति को स्थापित करेगा. यदि भारत दोनो मोर्चो चीन और पाकिस्तान से लड़ने का प्रयास करेगा तो हार जाएगा. 

यदि सेटेलाइटों को नष्ट नहीं करता है और चायना ऐसा करता है तब भारत हार सकता है, चायना की थल सेना को न रोका गया तो वह भी भारी नुकसान कर सकती है. इसमें नेवी मिशाइलों के सपोर्ट से काफी सहयोग हो सकता है. भारत के अमेरिका से लिये गार्जियन, रोमियो आदि शानदार काम करेंगे. यहां हमें यह भी देखना होगा कि पाकिस्तानी, किसी सुरंग से भारतीय क्षेत्र में दाखिल हो सकते हैं, क्योंकि सीमा पर तार फेंसिंग के बाद, इतने सैनिकों के बाद आतंकवादी आ जाते हैं, मतलब सुरंग के बिना सम्भव नहीं. किन्तु यदि पाकिस्तान चीन का साथ नहीं देता है तो वही बहादुरशाह जफर के समय की एकता दिखाकर हिन्दू मुस्लिम खत्म करके उसे छोटे भाई के अधिकार से नवाजना चाहिए, फिर भारतीय भूखा सो ले किन्तु पाकिस्तानी नहीं, फिर मुसलमानों पर शक करना अपने भाई पे अविश्वास करना होगा. 

चीन के युध्द हारने पर पाकिस्तान कर्ज से मुक्ति और गुलामी से स्वतंत्र होगा. भारत से अलग हुवे पाकिस्तान को चीनी साहूकार से मुक्ति मिल जाएगी. इसके बाद भारत में साम्प्रदायिक की जगह भाई भाई का नारा बुलंद करना होगा, क्योंकि आदमी दुसरों से तो जीत लेता है, किंतु अपनों से हार जाता है. अतः हिन्दू-मुस्लिम, सिख्ख-ईसाई सब मिलकर रहें तो एक बार तो अमेरिका को भी जीत लें हम. 



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