बैड पॉलिटिक्स के शिकार बने विश्नोई, सुसाइड केस बना गहलोत सरकार के लिए गले की हड्डी




कोरोना संकट के बीच राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार, एक इस्पेक्टर के सुसाइड केस में फंसती हुई नजर आ रही है. यह केस गहलोत सरकार के लिए गले की हड्डी बनता जा रहा है. कारण इस केस में गहलोत सरकार की एक विधायक का नाम आ रहा है. सवाल है क्या इस्पेक्टर को बैड पॉलिटिक्स के भंवर में फंसाया जा रहा था? फिलहाल बीजेपी ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है.



आकाश नागर 

पार्टी के सांसद और विधायक के साथ ही राजस्थान के अधिकतर लोगों ने इस्पेक्टर विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है. यही नहीं बल्कि इसके लिए आज से मिनी सचिवालय पर धरना भी शुरू हो गया है. पूरे प्रदेश भर में दिवंगत इंस्पेक्टर विष्णुदत्त विश्नोई को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर जस्टिस फोर विष्णु दत्त विश्नोई  के नाम से  बकायदा अभियान शुरू कर दिया गया है.


राजस्थान के चूरू में राजगढ़ थाना आजकल मीडिया की सुर्खियों में है. यह वही थाना है जहां 23 मई को थानाध्यक्ष विष्णुदत्त विश्नोई ने आत्महत्या कर ली थी. विष्णुदत्त विश्नोई अपनी ईमानदारी और लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे. वह पिछले दिनों से अपने क्षेत्र में हुए एक मर्डर के मामले में तहकीकात कर रहे थे. यह मर्डर लारेस विश्नोई गैंग के द्वारा किया गया था. बताया जा रहा है कि इस मामले में सत्ता पक्ष की एक विधायक का बार-बार हस्तक्षेप उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ.

आत्महत्या करने से पहले विष्णुदत्त विश्नोई ने दों पत्र लिखे, जिनमें उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी को भी जिम्मेदार नहीं माना, लेकिन एक दिन पहले ही उनकी अपने एक अधिवक्ता मित्र से सोशल मीडिया पर चैटिंग भी हुई थी. जिसमें उन्होंने अपने ऊपर प्रेशर की बात कही थी. आखिर वह कौन सा प्रेशर था, जिसमें उन्हें अपनी जान देनी पडी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि वह नौकरी से स्वैच्छिक विदाई ले लेंगे.




हालांकि इस मामले में राजनीतिक दल एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. सत्ता पक्ष की सादुलपुर विधायक कृष्णा पूनिया पर आरोप लगा है कि वह प्रेशर में लेकर विष्णु दत्त विश्नोई से कुछ नियम विरुद्ध काम कराना चाह रही थी. जिसके चलते उन्हें रात को 2 बजे थाने पहुंचना पड़ा. हालांकि विधायक कृष्णा पूनिया ने इसे भाजपा की ओछी राजनीति करार दिया है.



इसी के साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि विश्नोई अपने कुछ सिपाही साथियों के अनावश्यक ट्रांसफर को लेकर भी परेशान थे. यह ट्रांसफर कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से कहकर कराए थे. हालांकि इस मामले पर उनके भाई ने रिपोर्ट दर्ज करा दी है. साथ ही प्रदेश की गहलोत सरकार ने जांच क्राइम ब्रांच को सौप दी है. लेकिन लोग इस जांच से संतुष्ट नहीं है. पूर्व में भी एक बार सीबीआई जांच को लेकर धरना दिया गया था.


लेकिन इस बार फिर 5 दिन बाद श्रीगंगानगर में धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है. जिसमें राजसमद सांसद दिव्या कुमारी तथा माडलगढ विधायक गोपाल खंडेलवार ने सीबीआई की जांच की मांग की है. जबकि विधायक बलवीर सिंह लूथरा और पूर्व विधायक दौलतराम के नेतृत्व में आज से धरना शुरू हो गया है. लोगों की मांग है कि इस मामले की जब तक सीबीआई जांच नहीं होगी वह धरने से नहीं उठेंगे.

राजस्थान और हरियाणा के लोगों ने फिलहाल विष्णुदत्त विश्नोई न्याय संघर्ष समिति का गठन कर धरना प्रदर्शन चला दिया है. दूसरी तरफ विश्नोई की मौत के बाद चुरू जिले का राजगढ़ थाना भयभीत हो गया है. थाने के समस्त अधिकारी और कर्मचारियों में सामूहिक स्थानांतरण के लिए प्रदेश के आईजी को पत्र लिखा है.

पुलिस थाने के स्टाफ की ओर से आईजी को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि आए दिन ड्यूटी करते वक्त छोटी-छोटी बातों को लेकर सादुलपुर विधायक और उनके कार्यकर्ता हमारी झूठी शिकायत उच्च अधिकारियों से करते हैं. पिछले दिनों हेड कांस्टेबल सज्जन कुमार, हेड कांस्टेबल इंद्रसिंह, कांस्टेबल चालक राजेश व कांस्टेबल मनोज की ऐसी झूठी शिकायतें करके उन्हें चूरू लाइन हाजिर करवा दिया था. जिससे हम सभी भयभीत व व्यथित हैं. अब थानाधिकारी के सुसाइड के बाद हमारा मनोबल पूरी तरह से टूट गया है. इसलिए हम सबका राजगढ़ से दूसरी जगह ट्रांसफर कर दिया जाए.

कहा जाता रहा है कि राजस्थान में सिपाही से लेकर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तक की नियुक्ति राजनेताओं की सिफारिश पर होती है. सत्तारुढ़ दल के विधायक या सत्ता के नजदीक रहने वाले विधायक अपनी जाति, अपने नजदीकी अथवा अपने लिये लाभकारी अधिकारी की नियुक्ति करवाते हैं. इस तरह से विधायक अपने इलाके में अपनी शक्ति प्रदर्शित करता है.

हालात यह होते हैं कि विधायक की आज्ञा के बिना अधिकारी मुकदमा तक दर्ज करने की हिम्मत नहीं रखते. जांच के लिए भी कोई निर्धारित मापदण्ड नहीं होने के कारण जांच को भी विधायक के हुकमनामे के अनुसार ही घुमाया जाता है. संगठित अपराधियों को भी राजनीतिक संरक्षण के कारण पुलिस का भय भी कम हो जाता है. विधायक भी जब अमीर बनने के लिए निकलते हैं तो उनको भी सबसे सरल उपाय यही लगता है कि अपराधियों को संरक्षण और अधिकारियों को दबाव में लेकर जायज व नाजायज हर कार्य करवाया जा सकता है.


विष्णुदत्त की ईमानदार व कर्त्तव्यनिष्ठ छवि के कारण उनके पक्ष में जब भी स्थानांतरण किए जाने की चर्चा उठी तो दर्जनों व्यापारिक संगठनों व सामाजिक संगठनों ने विभिन्न स्तर पर ज्ञापन देकर उन्हें स्थानांतरित नहीं किए जाने की मांग इस बात को प्रमाणित करती है कि वो अत्यन्त जनप्रिय व निष्पक्ष पुलिस अधिकारी थे.

एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में जनमानस में बेहद लोकप्रिय छवि के पुलिस अधिकारी विष्णुदत्त का स्थानांतरण किए जाने पर राजनीतिक दबाव पिछले दो माह से पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ था. अपराधियों से गठजोड़ व कमजोर प्रशानसिक क्षमता वाले अधिकारियों के कारण दो दिन पूर्व ही विष्णुदत्त के मातहत काम करने वाले चार कांस्टेबल को लाइन हाजिर करने व विगत एक माह में 7 कांस्टेबल व हैड कांस्टेबल को अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करने पर अकारण हटाये जाने से विष्णुदत्त काफी व्यथित थे. जिसकी चर्चा आम थी तथा अपनी मौत से एक दिन पहले ही उनके द्वारा किए गए वाट्सएप चैट के प्रमाणित दस्तावेज इसकी पुष्टि भी करते हैं.

इस मामले में बीकानेर के अधिवक्ता गौवर्द्धनसिंह ने सोशल मीडिया पर सनसनीखेज खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया है कि व्हाट्स एप पर उनके और एसएचओ विष्णु दत्त बिश्नोई के बीच एक दिन पहले चैट हुई थी. इस चैट को सार्वजनिक करते हुए कहा गया है जिसमें श्री बिश्नोई कह रहे हैं कि ऑफिसर कमजोर है. वह नौकरी नहीं करना चाहता. वह नौकरी छोड़ने का मन बना चुका है. जारी किये गये चैट के अनुसार, थानाधिकारी कह रहे हैं कि उनको बैड पॉलिटिक्स के भंवर में फंसाया जा रहा है.

इंस्पेक्टर विश्नोई ने मौत से पहले दो सुसाइड नोट लिखे थे. इनमें से एक पत्र एसपी चूरू तेजस्विनी गौतम और दूसरा परिजनों के नाम था. एसपी को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा था- मैडम, माफ करना, प्लीज, मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया. मैंने अंतिम सांस तक मेरा सर्वोत्तम देने का प्रयास किया. निवेदन है कि किसी को परेशान नहीं किया जाए. मैं बुजदिल नहीं था. बस तनाव नहीं झेल पाया. मेरा गुनाहगार मैं स्वयं हूं.

दूसरे सुसाइड नोट माता पिता, पत्नी उमेश के नाम में उन्होंने लिखा था- आदरणीय मां पापा, मैं आपका गुनाहगार हूं. इस उम्र में दु:ख देकर जा रहा हूं. उमेश, मन्कू और लक्की मेरे पास कोई शब्द नहीं है. आपको बीच मझधार में छोड़कर जा रहा हूं. पता है, ये कायरों का काम है. बहुत कोशिश की खुद को संभालने की, पर शायद गुरु महाराज ने इतनी ही सांस दी थी. उमेश, दोनों बच्चों के लिए मेरा सपना पूरा करना. संदीप भाई पूरे परिवार को संभाल लेना प्लीज, मैं खुद गुनाहगार हूं.


इंस्पेक्टर विष्णुदत्त बिश्नोई के छोटे भाई संदीप ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करवाया है. संदीप ने रिपोर्ट दी कि उनके भाई विष्णु दत्त बिश्नोई को गंदी राजनीति में फंसाने की साजिश रची जा रही थी. उन्हें अनुचित तरीके से परेशान किया जा रहा था. इसलिए दबाव में आकर उन्होंने आत्महत्या कर ली. वहीं, पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच के एसपी विकास शर्मा कर रहे हैं.

राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह के अनुसार उनकी नज़र में विष्णुदत्त राज्य के शीर्ष 10 एसएचओ में शामिल थे. बकौल डीजीपी, पुलिसकर्मियों के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक दबाव आम बात है, जो भर्ती होते ही शुरू हो जाता है. उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी सिफारिश करते थे कि अपराध को नियंत्रित करने के लिए उनके इलाक़े में विष्णुदत्त की पोस्टिंग की जाए.

वह कहते हैं कि चूरू के राजगढ़ में भी अपराध नियंत्रण के लिए ही विष्णुदत्त की पोस्टिंग की गई थी. वहाँ उन्होंने अच्छा काम किया था, लेकिन आत्महत्या के पहले कैसी परिस्थितियाँ बनीं, ये जाँच का विषय है. उन्होंने कहा कि विष्णुदत्त विश्नोई ऐसे अधिकारियों में से थे, जो हमेशा ईमानदारी से काम करते थे. साथ ही डीजीपी ने माना कि किसी भी अनुसन्धान के दौरान दोनों पक्ष दबाव बनाने के लिए तिकड़म आजमाते हैं और पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करने की चुनौती रहती है.



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