अन्य राज्यों में तबाही के बाद बुंदेलखंड पर टिड्डी दल का अटैक



पाकिस्तान की सीमा से गुजरात, राजस्थान, उत्तप्रदेश के कुछ हिस्सो में तबाही मचाने के बाद टिड्डी दल ने बुंदेलखंड पर हमला कर दिया है. गुजरे दिन झांसी और सटे मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड ईलाके से निकल रहे टिड्डी दल ने कोहराम मचा रखा है. अच्छी बात यह है कि बुंदेलखंड के अधिकांश खेत रबी फसल की कटाई के बाद सूने हैं. इस कारण इसका ज्यादा असर दिखने की संभावना कम है. यह अवश्य है कि हवा का जिस तरह रूख है उससे प्रभावित होकर उसी बंबडर में समूचे बुंदेलखंड में टिड्डीयो का आक्रमण कई दिनों तक बुंदेलखंड में देखा जा सकता है.

छतरपुर /धीरज चतुर्वेदी

सामान्यतः पाकिस्तान सीमा से टिड्डीयो का झुंड मई महीने तक राजस्थान की सीमा में दाखिल होता है. इस बार 20 अप्रेल को ही टिड्डी दल राजस्थान सीमा पर हमला कर दिया था. विशेषज्ञों  का मानना है कि टिड्डयो का झुंड राजस्थान में आने वाली हवा या रेगिस्तानी तूफान की मदद के कारण भारत में फैलता है. 1950 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है कि अक्टूबर नवबंर के बाद भी टिड्डी दल भारत में बने हुये है. खाद्य और कृषि संगठन के साथ मिलकर टिड्डीयो पर अध्यन करने वाले क्रीथ क्रेसमेन के अनुसार जलवायु परिवर्तन के कारण भारत-पाकिस्तान में हवा के स्वरूप् में बदलाव तथा हिन्द महासागर में बार बार आने वाले चक्रवातो की वजह से टिड्डियो के प्रजनन के लिये परिस्थितियां बन रही है. 


इस संगठन के अनुसार टिड्डिया दुनियां की सबसे पुराना प्रवासी कीट है. जो एक वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करने वाला टिडिडयो का झुंड एक दिन में 35 हजार लोगो का भोजन चटकर जाता है. टिड्डियो का पनपना पूरी तरह से प्रकृति से जुडी घटना है. इनकी संख्यां और प्रकोप का क्षेत्र पूरी तरह मौसम और पर्यावरणीय बदलाव पर निर्भर करता है. मौसम वेज्ञानिको के अनुसार अगर कार्बन उत्सर्जन में वैश्विक स्तर पर कमी नही आई तो भविष्य में टिड्डी दल के हमले ओर अधिक बढेगे और विश्व व्यापी खतरा मंडराता रहेगा. 

जानकारी के अनुसार औसत एक झुंड में 80 लाख टिड्डी होती है. जो एक दिन में 2500 आदमी या दस हाथी खुराक बराबर फसल को हजम कर जाती है. 0.5 से 3 इंच की साईज और 1.9 ग्राम तक कि छोटी सी दिखने वाली टिड्डी अपने वजन से दो से ढाई गुना तक खा जाती है. टिड्डी तेजी से बढने वाला कीट है. पहली पीढी 20 गुणा बढती है तो दूसरी 400 गुणा तक और तीसरी पीढी 16 हजार गुना तक बढ जाती है. टिडडीयां 6 से 12 किमी प्रतिघंटा रफतार से उडती है. जो एक दिन में 150 किमी तक का सफर तय कर लेती है. खाने को भरपूर फसल हो और नमी वाला मौसम हो तो टिडडीयो की आबादी तेजी से बढती है. 

जानकारो के मुताबिक टिडडी दल अंधेरा छाते ही पेडो इत्यादि पर अपना डेरा डाल देता है और सुबह के बाद अपना डेरा बदलता है. धूप में इनकी उडान की क्षमता अधिक असरदायक और तेजी से बढ जाती है. यूएनओ ने पहले से ही विश्व स्तर पर चेतावनी जारी कि थी कि दक्षिण अफ्रीका के इथोपिया-सोमालिया से पनपने वाली टिड्डयो की नई पीढी अप्रेल माह से हमले को तैयार हो चुकी है. यूएनओ के अनुमान के मुताबिक जून माह तक इनकी आबादी अभी के 360 अरब की तुलना में 500 गुना होगी. भारत में समय से पूर्व ही राजस्थान सीमा पर अटेक कर टिडडीयो ने अन्य राज्यो में फैलना शुरू कर दिया था. 

मध्यप्रदेश के मंदसौर नीमच क्षेत्र में तो इन दिनो टिडडीयो के कारण किसान को बेहद नुकसान का सामना करना पढ रहा है. तीन दिन पहले 20 मई को मध्यप्रदेश के देवास श हर पर टिडडीयो के हमले ने कोहराम मचा दिया था. तेज हवा और आंधी के कारण टिडडी दल दो भागो में विभक्त हो गया था. हवा के रूख के साथ एक दल निमाड क्षेत्र की ओर उड गया था. 

वर्तमान में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक हवा का रूख है. हवा की रफतार 30 किमी प्रति घंटा की औसत है. भीषण गर्मी में हवा का रूख जिस ओर हो जाता है टिडडीयो का दल उस ओर ही अपना रूख कर रहा है. शुक्रवार 22 मई को उत्तरप्रदेश  के झांसी शहर पर टिडडीयो का अटेक था. सीमावर्ती मध्यप्रदेश  की रामनगरी के समीप शनिवार की सुबह प्रतापपुरा ईलाके में टिडडीयो के झुंड देखे गये. जो बरूआसागर की ओर रूख कर गये थे. जहां से दक्षिण दिशा की ओर टिडडीयो के दल का देखा गया. यानि टिडडीयो ने बुंदेलखंड में प्रवेश कर दिया है. 

सुखद है कि रबी की फसल के बाद खेत सूने है जिस कारण किसानो को नुकसान की संभावना बेहद कम है. उन किसानो के लिये टिडडीयो का आक्रमण नुकसानदायक हो सकता है जिन्होने खेतो में सब्जी इत्यादि लगा रखी है. चूंकी लाकडाउन के कारण सब्जी की खपत और ढुलाई में भारी गिरावट आई है. इस कारण सब्जी पर निर्भरता वाले किसानो के खेतो में सब्जी उगी हुई है. इसके लिये ऐसे किसानो को सचेत रहने की जरूरत है. क्योकि टिडडी दल दिनभर तो हवा के रूख के साथ उडता है लेकिन शाम होते ही अपना डेरा डाल लेता है. जिस स्थान पर इसका डेरा होता है वहां के पत्ते, फूल, फल, बीज, तने इत्यादि सभी चटकर जाते है. ताजा खाने की आदत वाले टिडडी दल के नाम से दहशत फैलना वाजिब है क्योकि इनके द्धार फैलाई जाने वाली क्षति का दायरा बढा होता है.

लेख सामग्री संकलन /आस्था चतुर्वेदी एवं ईशान चतुर्वेदी
वीडियो / जगदीश तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार ओरछा, झाँसी





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