क्या हम मुस्लिम देश की मदद नहीं लेंगे? लिखने वाली पत्रकार रिजवाना चरित्र लांछन न सह सकी, झूल गई फंदे पर




रिजवाना की आत्महत्या की खबर इसलिए भी चौंकाती है, क्योंकि 3 मई को प्रेस दिवस पर उन्होंने अपने फेसबुक पर जो स्टेटस लिखा था, उससे कहीं से भी आभास नहीं होता कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाला इंसान ऐसा स्टेटस लिख सकता है, जिसमें समाज की चिंता निहित हो। सवाल उठ रहे हैं कि जो लड़की रात 10 बजे तक स्टोरी पर डिस्कस कर रही थी वो एकाएक खुदकुशी जैसा कदम कैसे उठा सकती है।



आकाश नागर 

यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात मध्य-पूर्व एशिया में स्थित एक छोटा-सा देश है। इस देश ने हमारे लिए, हमारे डॉक्टरों के लिए और हमारे देश के लिए जो किया है, उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए। कोरोना वायरस महामारी से मुकाबला कर रहे भारत की सहायता के लिए इस देश ने शनिवार को सात मीट्रिक टन चिकित्सीय सामग्री भारत भेजी।


नई दिल्ली स्थित यूएई के दूतावास ने एक वक्तव्य जारी कर कहा कि विमान के जरिए भेजी गई सामग्री से लगभग सात हजार चिकित्सा कर्मियों के लिए सहायक होगी। एक तरफ हम अपने देश में हिन्दू-मुस्लिम करने पर लगे हुए हैं, मुस्लिमों से सब्जियाँ नहीं खरीदी जा रही है, मुसलमान कोरोना फैला रहे हैं, वही दूसरी तरफ एक मुस्लिम देश ही हमारी मदद कर रहा है, क्या हम उसकी मदद नहीं लेंगे? या उससे इलाज नहीं होगा?

काशी नगरी वाराणसी की स्वतंत्र पत्रकार रिजवाना तबस्सुम का सोशल मीडिया फेसबुक पर यह आखिरी स्टेट्स था। इसके बाद उसने आत्महत्या कर ली। रिजवाना की आत्महत्या की खबर इसलिए भी चौंकाती है, क्योंकि 3 मई को प्रेस दिवस पर उन्होंने अपने फेसबुक पर जो स्टेटस लिखा था, उससे कहीं से भी आभास नहीं होता कि आत्महत्या जैसा कदम उठाने वाला इंसान ऐसा स्टेटस लिख सकता है, जिसमें समाज की चिंता निहित हो।

सोशल मीडिया पर कई अन्य लोग भी रिजवाना की आत्महत्या की बातों पर यकीन करना मुश्किल बता रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि जो लड़की रात 10 बजे तक स्टोरी पर डिस्कस कर रही थी वो एकाएक खुदकुशी जैसा कदम कैसे उठा सकती है।


सरोकारी पत्रकारिता का जुनून हो गया ठंडा 
चेहरे को हिजाब से ढक कर रखने वाली रिजवाना कुत्सित समाज का आवरण हटाने का काम करती थी। उसे सरोकारी पत्रकारिता करने का जुनून था। लेकिन समाजवादी पार्टी के एक नेता शमीम नोमानी के द्वारा लगाए गए चरित्र के आरोपों से वह आहत हो गई और रात में ही आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया।


पत्रकार रिजवाना तबस्सुम द वायर, न्यूज़क्लिक, द प्रिंट, एशिया लाइव तथा बीबीसी समेत कई पत्रिका और न्यूज़ वेबसाइट पर समसामयिक मुद्दों पर बेबाक खबर लिखती थी। उसके लिखने के अंदाज का हर कोई दीवाना था। वाराणसी के लोहता थाना क्षेत्र के हरपालपुर की रहने वाली रिजवाना ने आत्महत्या से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था। जिसके आधार पर पुलिस ने सपा नेता समीम नोमानी के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना) का मुकदमा दर्ज करते हुए उसकी गिरफ्तारी कर ली है।

दोस्तों से बात करना खल गया उसे 
नोमानी समाजवादी पार्टी का जिला कार्यकारिणी सदस्य है और आगामी विधानसभा चुनाव में वह सपा से टिकट का दावेदार था। अभी कुछ दिनों पहले रिजवाना और शमीम नोमानी दोनों मिलकर गरीब लोगों के लिए खाना बांटते देखे गए थे। वह दोनों मिलकर अक्सर समाज सेवा का भी काम करते थे। रिजवाना और नोमानी दोनों के गहरे संबंध थे और वह एक दूसरे से शादी करना चाहते थे। रिजवाना अपने करियर पर ध्यान दे रहे थी जबकि समीम का उसके दोस्तों से बात करना उसको अच्छा नहीं लगता था।

सुसाइड नोट में सपा नेता शमीम नोमानी जिम्मेदार
शायद यही वजह थी कि दोनों में तकरार होती रहती थी। जिस दिन रिजवाना में आत्महत्या की उस दिन उसने पांच पत्र लिखें। जिसमें समीम को अपनी हत्या के लिए दोषी ठहराया। बताया जाता है कि तबस्सुम ने यह कदम तब उठाया जब समीम ने उस पर चरित्रहीन के आरोप लगाए थे। रिजवाना के परिजनों की माने तो समीम ने उस रात रिजवाना को फोन किया और उस पर झूठे लांछन लगाए। जिसको रिजवाना बर्दाश्त नहीं कर सकी और उसमें 4 शब्दों का सुसाइड नोट लिखा। जिसमें उसने कहा कि शमीम नोमानी जिम्मेदार है। इस नोट को उसने अपने बिस्तर के पास लगे बोर्ड पर लगा दिया। बाद में अपनी चुनरी से वह फांसी के फंदे पर झूल गई।

कहा था ‘कल तुम पछताओगे’
बताया जा रहा है कि रिजवाना ने आत्महत्या करने से पहले देर रात समीम को करीब 125 कॉल किए थे। लेकिन शमीम ने फोन रिसीव नहीं किया था। पुलिस के समक्ष शमीम ने कहा कि उसने मोबाइल पर ध्यान नहीं दिया और इस कारण वह फोन नहीं उठा सका। समीम ने बताया कि उसने बाद में फोन किया तो रिजवाना शादी के लिए दबाव बना रही थी। जबकि वह इंकार कर रहा था। उसके इंकार करने पर वह बोली थी कि ‘कल तुम पछताओगे’।




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