सोने का सही तरीका बताने वाले रामदेव हलाल के चक्कर में खुद बदल रहे करवटें



पेट के रोगियों के लिए सोने का सही तरीका बताने वाले बाबा रामदेव 

इन दिनों हलाल के चक्कर में आकर खुद करवटें बदल रहे हैं..

आकाश नागर 
इस समय देश में कोरोना काल चल रहा है। चारों तरफ कोरोना महामारी से वचाव के रास्तों पर नई-नई रिसर्च की जा रही है, लेकिन वही दूसरी तरफ अचानक एक शब्द ‘हलाल’ सुर्खियों में आया है। इस हलाल पर तब से बवाल मच गया है, जब से इसे बाबा रामदेव की पतंजलि कंपनी ने इस्तेमाल करना शुरू किया है।


'हलाल' के बवाल में फंसे बाबा रामदेव, विवादों में पतंजलि को जारी सर्टिफिकेट?
दरअसल, हलाल एक सार्टिफिकेट होता है जिसे फूड्स मार्किट में बडा ब्रांड माना जाता है। खासकर मुस्लिम लोगों में। जिस तरह भारत के लोग किसी भी फूड्स ब्रांड पर ग्रीन डाट देखकर खरीददारी करते हैं उसी तरह मुस्लिम खासकर अरब देशों में ‘हलाल’ सर्टिफिकेट वाले फूड्स ब्रांड को जमकर खरीदा जाता है।
बहरहाल, भारत की खाद्य सामग्री के बडे बाजार पर कब्जा करने और 25 हजार करोड़ ट्रन ओवर की कंपनी बनने के बाद अब बाबा रामदेव की नजर भारत के अल्पसंख्यकों के साथ ही दुनिया के 57 मुस्लिम देशों पर है। खासंकर कतर,कुवैत,मलेशिया और लीबिया आदि जैसे देश।
गौरतलब है कि दुनिया में मुस्लिम लोगों की जनसंख्या 1.6 अरब है। दुनिया के 23 फीसदी फूड्स मार्किट पर मुस्लिमों का दबदबा है। इसी के साथ दुनिया के 12 फीसदी मुस्लिम ऐसे हैं जो अपने फूड्स में ‘हलाल’ ब्रांड को ही प्राथमिकता देते हैं।

हलाल ब्रांड का सर्टिफिकेट लेकर फिलहाल पतंजलि कंपनी दुनिया के 12 फीसदी मुस्लिम और 23 फीसदी बाजार पर कब्जा जमाने की योजना पर काम कर रही है। गौरतलब है कि दुनिया के 3.2 लाख करोड़ डॉलर के ग्लोबल हलाल मार्केट में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2 फीसदी है।
विदेशी फूड्स बाजार पर कब्जा जमाने की योजना के तहत ही पतंजलि योगपीठ के महामंत्री और सीईओ बालकृष्ण ने पूर्व में कहा था कि पतंजलि अब विदेशी मल्टी नेशनल कंपनियों के साथ करार के लिए तैयार है। लोगों ने इसका अर्थ ये लगाया कि पतंजलि अब उन्हीं विदेशी एमएमसी के साथ मिल कर कारोबार करेगी, जिनकी बाबा रामदेव शुरू से आलोचना करते रहे हैं।
‘स्वदेशी अपनाओ’ की बात करने वाले बाबा रामदेव को लेकर महिला कॉन्ग्रेस ने कहा कि पतंजलि और भाजपा, दोनों का ही दोहरा रवैया एक ही स्तर पर पहुँच गया है। कांग्रस ने आरोप लगाया कि राष्ट्रवाद और स्वदेशी की बात करने वाले बाबा रामदेव अब विदेशी एमएनसी के साथ डील कर रहे हैं।
विदेशों में पतंजलि कंपनी के कारोबार को बढावा देने के उद्देश्य से ही बाबा रामदेव ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी से सांठगांठ करके ‘हलाला सर्टिफिकेट’ पा लिया। दरअसल, मौलाना महमूद मदनी और बाबा रामदेव के नजदीकी रिश्ते रहे हैं। जिन रिश्तों का लाभ उठाते हुए बाबा रामदेव ने पंतजलि के लिए हलाला का सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है।
बताया जा रहा है कि बाबा रामदेव ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद से हलाला का सर्टिफिकेट तो पा लिया, लेकिन मुस्लिमों में इसका जबरदस्त विरोध हो गया। विरोध की वजह बना पिछले दिनों गुजरात में हुआ एक प्रकरण। जिसमें एक फल वाले ने ‘हिंदू फल वाला की दुकान’ के नाम से फल बेचने शुरू कर दिए। इसके बाद जब वह मामला विवादास्पद हो गया तो अचानक बाबा रामदेव का हलाला प्रकरण सामने आ गया।

इसके अलावा ज़ोमैटो को लेकर खड़ा हुए हालिया विवाद ने हलाल शब्द को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया। दरअसल ज़ोमैटो ने एक मुस्लिम यूजर से हलाल मीट न दे पाने के कारण खेद जताया था। जिसके बाद लोगों ने ज़ोमैटो के दोहरे रवैये पर सवाल उठाये और देश में हलाल शब्द को लेकर बहस छिड़ गई। उसके बाद द प्रिंट की जर्नलिस्ट जैनब सिकंदर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 2018 का एक आर्टिकल शेयर किया।
जिसमें लिखा था कि पतंजलि के प्रोडक्ट को क़तर में हलाल सर्टिफिकेट मिला है। जैनब सिकंदर का ये ट्वीट दरअसल दक्षिणपंथियों को चिढ़ाने के लिए था। डेक्कन क्रोनिकल के आर्टिकल को शेयर करने हुए जैनब ने लगभग तीन लाइनों में hahaha लिखा।
बताया जा रहा है कि पतंजलि कंपनी को दिए गए हलाला सर्टिफिकेट का बहुत कम लोगों को पता था, लेकिन कुछ राजनीतिक हलाला प्रकरण पर हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की राजनीति का प्रयोग करना चाहते थे, जिसके चलते उन्होंने पंतजलि को मुस्लिम संस्था द्वारा दिया गया हलाला सर्टिफिकेट मामला उछाल दिया।
देखते ही देखते यह मामला चर्चा का विषय बन गया। फिलहाल इस मामले एक तरफ जहां पतंजलि योगपीठ के महामंत्री बालकृष्ण को सफाई देनी पडी, वही पर मुस्लिमो ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी की घेराबंदी कर दी है। इसके साथ ही पतंजलि को भी कटघरे में खड़ा कर दिया गया है।
जबकि मुसलमानों के एक समूह ने जमीयत की नीयत पर सवाल उठाया है। बताया जा रहा है कि यह सर्टिफिकेट 3 साल के लिए जारी किया गया है। सर्टिफिकेट के मुताबिक कंपनी पतंजलि आयुवेद लिमिटेड के फूड प्रोडक्ट पर अब हलाल सर्टिफाइड लिखा होगा।

चौंकाने वाली बात यह है कि पतंजलि 'हलाल इंडिया' से लगातार हलाल सर्टिफिकेट मांग रही थी। मगर वहां से उन्हें कामयाबी नही मिली थी। हलाल इंडिया भारत में जारी तमाम फूड प्रोडक्ट को शरीयत के मुताबिक प्रमाण पत्र जारी करता है और वो ऐसे सर्टिफिकेट प्रदान करने की मुख्य संस्था है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट ख़ासकर मलेशिया, इंडोनेशिया के अलावा मिडिल ईस्ट में प्रभाव रखता है और पतंजलि को इस देशों में निश्चित तौर पर व्यापारिक लाभ होगा।
हालांकि, जमीयत उलेमा ए हिन्द हलाल ट्रस्ट इस तरह के सर्टिफिकेट जारी करने की पहली पसंद वाली संस्था नहीं है, बल्कि भारत में चार संस्थाएं हैं, जो हलाल सर्टिफिकेट जारी करती है। ये संस्थाएं हैं हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हलाल सर्टिफिकेशन सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जमीअत उलम-ए-महाराष्ट्र और जमीअत उलमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट। दुनियाभर में हलाल इंडिया को तमाम कंपनी पहली पसंद मानती है। केएफसी, मेकडोनल्ड और वेंगीस, हल्दीराम जैसी संस्थाओं को हलाल इंडिया ने सर्टिफाइड किया है।
बताया जा रहा है कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने पहले हलाल इंडिया में सर्टिफिकेट लेने के लिए आवेदन किया था। वहां से इन्हें सर्टिफिकेट जारी नही किया गया। जानकारी के अनुसार, हलाल सर्टिफिकेट के लिए सबसे पहले ये देखा जाता है कि उसके पास एफएसएसए आई का लाइसेंस है या नहीं। उसके बाद कंपनी की डीटेल्स ऑडिट टीम को बढ़ाई जाती हैं। इसके बाद टीम वापस आकर रिपोर्ट जमा करती है। सब कुछ संतोषजनक होने के बाद ही सर्टिफिकेट दिया जाता है। इस पूरी सर्विस के लिए फीस ली जाती है। सर्टिफिकेशन का कोई चार्ज नहीं होता।
हलाल इंडिया से जुड़े सरफ़राज़ आलम के मुताबिक किसी भी कंपनी को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए आवदेन पर विचार किया जाता है। इसके लिए इस्लामिक जानकार लोगो की एक टीम इसका आंकलन करती है। पूरी तरह जांच पड़ताल और प्रोडक्ट से तसल्ली के बाद ही उसे मान्यता दी जाती है।
हलाल इंडिया शरीयत और क़ुरआन की रोशनी में प्रोडक्ट को खाने की परमिशन देती है। तमाम जांच पड़ताल के बाद ही बताया जाता है कि यह प्रोडक्ट खाने योग्य है। सरफराज आलम की माने तो हमारे यहां स्पष्ट है कि अगर किसी प्रोडक्ट में किसी जानवर का पेशाब इस्तेमाल हो रहा है तो वो उसकी परमिशन नही दे सकते। जबकि पतंजलि साफ तौर पर कहती है कि वो अपने कुछ प्रोडक्ट्स में गोमूत्र का प्रयोग करती है इसी लिए उन्हें हलाल इडिया की तरफ से परमिशन नही दी गई।
यह सर्टिफिकेट शाकाहारी प्रोडक्ट पर जारी किए जाते हैं जैसे हल्दीराम को हलाल सर्टिफिकेट है। बाज़ार में मिलने वाले आटा और बेसन जैसे खाने के सामान पर भी अब हलाल सर्टिफाइड लिखा होता है। बाबा रामदेव की पतंजलि ने जमीयत उलेमा हलाल ट्रस्ट में भी आवेदन किया, जहां से उन्हें परमिशन मिल गई। बस इसलिए जमीयत के हलाल ट्रस्ट की आलोचना की जा रही है।

कहा जा रहा है रामदेव के मौलाना महमूद मदनी से अच्छे रिश्ते है। इस ट्रस्ट के पास प्रोडक्ट की वैज्ञानिक जांच करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रस्ट में मौलाना महमूद मदनी की मजबूत दखल मानी है। संस्था के सचिव मौलाना नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी है। इस सबके बाद आलोचना के घेरे में आए मौलाना नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी ने लंबी सफाई पेश की है।
मौलाना नियाज़ अहमद फ़ारूक़ी ने कहा है कि देश भर में कई संस्थाएं है जो हलाल सर्टिफिकेट जारी करती है। जमीयत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट भी यह करती है इसके लिए तमाम प्रक्रियाएं पूरी की जाती है। हमारे पास जानकार लोगों की टीम है हम पूरी तरह पड़ताल करते हैं। हमने यहां भी पूरी जांच की। सिर्फ उन्ही खाने की वस्तुओं को प्रमाण पत्र जारी किए गए जिनमे गोमूत्र प्रयोग नहीं होता है।
पतंजलि जिन खाने के सामान में गोमूत्र प्रयोग करती है उनको हमने सर्टिफाइएड नहीं किया है। इनमें आटा, बेसन, तेल जैसे खाने-पीने के प्रोडक्ट हैं। हमने यह निश्चित किया है कि पतंजलि के प्रोडक्ट इस्लामी सिद्धांतों का पालन करें और वो करते हैं।
कुछ लोगों को एतराज है कि हमने एक हिन्दू की कम्पनी को हलाल सर्टिफिकेट दे दिया है। हम साफ कर देना चाहते हैं कि हम हलाल सर्टिफिकेट देते समय किसी भी तरह का जाति और धर्म का भेदभाव नही करते हैं। दुनियाभर के लोग प्रमाणपत्र मांगते हैं, हम कसौटी पर तोलते हैं। ख़रा उतरने पर ही परमीशन देते हैं। कुछ लोग हलाल के ख़िलाफ़ हैं। हम उन्हें बताना चाहते है कि यह सबके स्वास्थ के लिए है और इसका मतलब है कि यह खाने योग्य है।
इससे पहले नवंबर 2017 में भी जमीयत उलेमा-ए-हिन्द हलाल ट्रस्ट ने इसी तरह का सर्टिफिकेट जारी किया था जिसका प्रयोग मिडिल ईस्ट में किया जा रहा था। इनमे क़तर में पतंजलि को प्रोडक्ट बेचने की अनुमति थी। मगर तब यह प्रमाण पत्र की अवधि सिर्फ एक साल की थी अब जारी किए गए सर्टिफीकेट की अवधि तीन साल रखी गई हैं।
जमीयत के इस क़दम की मुसलमानों के बुद्धिजीवी वर्ग में जमकर आलोचना हो रही है। ऑल इंडिया हलाल बोर्ड के दानिश रियाज़ ने कहा है कि वो इस मुद्दे को इसी साल मलेशिया में होने जा रही वर्ल्ड हलाल कॉन्फ्रेंस में उठाने जा रहे हैं।
उधर, हरिद्वार में योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ ने हलाल प्रमाणपत्र पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियां यह प्रचार कर रही हैं कि स्वामी रामदेव के पतंजलि प्रतिष्ठान ने हलाल मीट के निर्यात के लिए हलाल प्रमाणपत्र लिया है। वास्तव में यह दुष्प्रचार है। कंपनियां चाहती हैं कि भारत में पतंजलि के उत्पादन बिकने बंद हो जाएं। वास्तव में यह प्रमाणपत्र अरब देशों में आयुर्वेदिक दवाओं के निर्यात के लिए लिया गया है।
भारत में दवाओं के वितरण से इस प्रमाणपत्र का कोई संबंध नहीं। गत दिनों कनखल स्थित दिव्य योग मंदिर में पत्रकारों से बातचीत में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि दुनिया के किसी भी देश को यदि अरब देशों में कोई सामान बेचना हो तो उन देशों में इसके लिए हलाल प्रमाणपत्र अनिवार्य किया है। यह प्रमाणपत्र केवल हलाल मीट के लिए नहीं किसी भी पदार्थ या वस्तु के लिए होता है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि भारत में ‘हलाल’ शब्द का मतलब मीट या मीट प्रॉडक्ट्स से लगाए जाते हैं, लेकिन देश के कई पर्सनल केयर ब्रांड्स अपने प्रॉडक्ट्स के लिए हलाल सर्टिफिकेशन लेने में जुटे हैं। इस सर्टिफिकेशन का मतलब है कि उस खास प्रॉडक्ट को बनाने में किसी जानवर, केमिकल्स या अल्कोहल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
कंज्यूमर्स के एक वर्ग के बीच ऐसे प्रॉडक्ट्स की डिमांड बढ़ रही है, जिसे बनाने में जानवरों के साथ कोई बदसलूकी नहीं की गई हो और जो पूरी तरह सुरक्षित हो। कॉस्मेटिक कंपनियों में इबा, इमामी, केविनकेयर, तेजस नेचरोपैथी, इंडस कॉस्मेटिकल्स, माजा हेल्थकेयर और वीकेयर ने अपने कई प्रॉडक्ट्स के लिए हलाल सर्टिफकेशन लिया है।
हलाल सर्टिफिकेशन के तहत बनने वाले प्रॉडक्ट्स में एनिमल फैट या कीड़ों के रंग के अलावा दूध से बनी चीजों और बीवैक्स का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसके साथ ही वे इन कॉस्मेटिक की टेस्टिंग जानवरों पर नहीं कर सकते हैं। यानी जो प्रॉडक्ट्स हलाल सर्टिफिकेशन के तहत बनते हैं वो पूरी तरह शाकाहारी होते हैं।



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