पिता को साइकल से घर ले जाने वाली ज्योति की तारीफ़ में आगे आई ट्रंप की बेटी इवांका



पिता को साइकल पर बिठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा अपने घर पहुंची 15 साल की ज्योति लगातार सुर्खियों में हैं. ज्योति ने 7 दिनों में हरियाणा के गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक 1200 किलोमीटर का सफर ​साइकल से तय किया. ज्योति के इस साहसिक कदम को देखते हुए भारतीय साइकलिंग फेडरेशन ने उन्हें ट्रायल के लिए दिल्ली बुलाया है. यही नहीं ज्योति की मदद के लिए और कई हाथ उठने लगे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने भी ज्योति के इस कदम को सराहा है. 


लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान प्रवासी कामगारों के हौसले की ढेरों कहानियां सामने आ रही हैं. एक कहानी बिहार से भी सामने आई जब, हरियाणा के गुरुग्राम से ज्योति अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा के सिंहवाड़ा स्थित अपने गांव सिरहुल्ली ले आई. 15 साल की लड़की ज्योति को पिता ने 'श्रवण कुमार' नाम दिया है. 

Jyoti who took her father from gurugram to darbhanga gets trial ...
बिहार की इस लड़की की चर्चा सात समंदर पार भी होने लगी है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने अब ज्योति कुमारी को लेकर ट्वीट किया है. उन्होंने ट्विटर पर ज्योति कुमारी की खबर को शेयर किया है और भारतीयों की सहनशीलता को सराहा है.



उन्होंने ट्वीट किया कि 15 साल की ज्योति कुमारी ने अपने जख्मी पिता को साइकिल से सात दिनों में 1,200 किमी दूरी तय करके अपने गांव ले गई. इवांका ने आगे लिखा कि सहनशक्ति और प्यार की इस वीरगाथा ने भारतीय लोगों और साइकलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
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दरभंगा जिला के सिंहवाड़ा प्रखण्ड के सिरहुल्ली गांव निवासी, मोहन पासवान गुरुग्राम में रहकर टेम्पो चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण किया करते थे, पर इसी बीच वे दुर्घटना के शिकार हो गए. दुर्घटना के बाद अपने पिता की देखभाल के लिए 15 वर्षीय ज्योति कुमारी वहां चली गई थी पर, इसी बीच कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से देशव्यापी बंदी हो गई. आर्थिक तंगी के मद्देनजर ज्योति के साइकिल से अपने पिता को सुरक्षित घर तक पहुंचाने की ठानी.
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बेटी की जिद पर उसके पिता ने कुछ रुपए कर्ज लेकर एक पुरानी साइकिल खरीदी. ज्योति अपने पिता को उक्त साइकिल के कैरियर पर एक बैग लिए बिठाए, आठ दिनों की लंबी और कष्टदाई यात्रा के बाद अपने गांव सिरहुल्ली पहुंची.


ज्योति ने बताया कि 8 मई को वो अपने पिता के साथ गुरुग्राम से चले थे और 15 मई को बिहार पहुंच गए. इस दौरान रास्ते में लोग खाने-पीने को दे रहे थे. ज्योति ने बताया कि पापा ने भी साइकल से जाने के लिए मना किया, लेकिन हमने कहा कि नहीं पापा हम आपको ले चलेंगे. यहां आने पर हमें 20 हजार रुपये दिया गया, साथ ही कहा गया कि पढ़ाई का खर्चा उठाएंगे.

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सायकिलिंग के लिए मिला प्रस्ताव 
दिल्ली से भी फोन आया, उन्होंने साइकल पर रेस लगाने के लिए कहा, लेकिन मैंने कहा कि अभी मैं रेस नहीं लगा सकती हूं, मुझे थोड़ा समय चाहिए. उन्होंने मुझे एक महीने का समय दिया है. ज्योति ने बताया कि उन्होंने फोन पर कहा कि वो मुझे वहीं पर रखेंगे और वहीं पढ़ाएंगे-लिखाएंगे. हम पढ़ना भी चाहते हैं. मेरी पूरी इच्छा है कि मैं साइकल पर रेस लगाऊं. मैं कुछ बनना चाहती हूं. लगातार हो रही तारीफ से अच्छा लग रहा है. मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा दिन आएगा. 



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