ये इंदौर शहर है, दामन पे आए दाग को पसीने से धो रहे, किसी के हाथ फैले ना भी हों तो भी उसका झोला ख़ाली नहीं जाता


जिनका काम नफ़रत है,वो एकाध बार इंदौर बायपास हो आएं... उन्हें पता चल जाएगा, वो कितने थोड़े हैं और मोहब्बत करने वाले बहुत ज़्यादा. जिस तरह से मजदूरों के रेले आ रहे हैं और सिर्फ इंसान दिख रहे हैं, वैसे ही इनकी सेवा में जो इंदौरी डटे हैं,वो भी इंसान हैं. photoby Dr.ANAND RAI


आगरा-मुंबई मार्ग पर बसे इस शहर को देश का सबसे साफ़ शहर माना जाता है. कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में धर्म विशेष के लोगों को अफ़वाहों से भड़काया गया और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करवाया गया. शहर की पूरे देश में थू-थू हुई. अब उसी शहर से यह खबर है. सामान ख़रीद के बाँटने में शायद अब वो बात नहीं रह गयी हमारे पत्थर दिल में, लेकिन इस शहर की तासीर है कि इस शहर का दिल पूरे देश के दिल से बड़ा है. दामन पर आए दाग को लोग अपने हाथों से और पसीने से धो रहे हैं. किसी के हाथ फैले ना भी हों, तो भी उसका झोला ख़ाली नहीं जाता. ये शहर इंदौर है.



रजनी बैरागी  

शहर इंदौर से लोगों की मदद के इतने ख़ूबसूरत वीडियो आ रहे हैं कि गला भरा आता है. आप रो देते हैं. बोल नहीं फूटते! ज़ार-ज़ार आँसू बहते हैं और आप किसी को समझा भी नहीं पाते कि इस शहर में ये क्या है, जो आपको इतना भावुक कर देता है.

आगरा-मुंबई मार्ग पर बसे इस शहर को देश का सबसे साफ़ शहर माना जाता है. कोरोना संक्रमण के शुरुआती दौर में धर्म विशेष के लोगों को अफ़वाहों से भड़काया गया और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करवाया गया. शहर की पूरे देश में थू-थू हुई.




जज़्बा देखिए साहब शहर का. जज़्बा देखिए. आज कम से कम 250 छोटे छोटे समूह, उसी आगरा मुंबई मार्ग पर एक-एक दो-दो टेबल लगा कर खड़े हैं. पानी की बोतलें दी जा रही हैं. नाश्ता दिया जा रहा है. आगे के सफ़र के लिए खाना दिया जा रहा है. सैनिटायज़र और मास्क दिए जा रहे हैं. बच्चों के लिए दूध, फल और मिठाई भी उपलब्ध है. बिस्किट के पैकेट बँट रहे हैं. चिलचिलाती धूप में भूख से कुम्हलाए मेहनतकश के शरीर को लू ना लग जाए, इसलिए अमृतधारा/ पुदीन हरा की शीशी दी जा रही है. बीमारों के लिए दवाएँ उपलब्ध हैं. लोग गाड़ी में भर भर कर सामान ला रहे हैं कि कम ना पड़ जाए. खाना खिलाए बग़ैर जाने नहीं दे रहे.

बात यहाँ खतम हो सकती है. सामान ख़रीद के बाँटने में शायद अब वो बात नहीं रह गयी हमारे पत्थर दिल में, लेकिन इस शहर की तासीर है कि इस शहर का दिल पूरे देश के दिल से बड़ा है. 

पुलिस ने रास्तों में कैनपी सजायी है, जहां पिघलते डामर से सनी सड़कों पर अपने पैरों की नरम खाल को जलाते हुए चलने वाले ये धरतीपुत्र, अपने पैरों के लिए चप्पल और जूते ले सकते हैं, मुफ़्त में! और रास्ते से जाते ट्रक्स के पीछे बिठा कर इन सड़क के वीरों को जहां तक सम्भव है, वहाँ तक छुड़वाने की व्यवस्था की जा रही है.

ये शहर की तासीर है. ये शहर इंदौर है. इस शहर की दिल, पूरे हिंदुस्तान के दिल से भी बड़ा है. बात भावनात्मक तरीक़े से लिखी है मगर बात व्यावहारिक है. दामन पर आए दाग को लोग अपने हाथों से और पसीने से धो रहे हैं.

ख़ुशी है, गर्व भी है कि मेरा ही कोई दोस्त, मेरा ही कोई भाई मेरे शहर का रहने वाला हाथ नहीं फैलाता और किसी के हाथ फैलें ना भी हों, तो भी उसका झोला ख़ाली नहीं जाता. ये शहर की तासीर है. ये शहर इंदौर है.



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