भेड़िया आया.. भेड़िया आया... अब तो सच में आ गया, 7 दिन में छतरपुर में कोरोना पाजीटिव का आंकड़ा 9 पर पहुंचा



कोरोना से निपटना चुटकी का खेल नहीं था, जब फैलारा फैल गया तो हाथ पैर फूले

छतरपुर मप्र / धीरज चतुर्वेदी

पुराना मुहावरा है कि ओंस चाटने से प्यास नहीं बुझती. सच है जब करोना जैसी महामारी विश्व-पटल पर तबाही का इतिहास लेख कर रही हो तो देर से जागने के बाद भी चौकन्ना रहना था. समझा जा रहा था कि इससे निपटना चुटकी का खेल है. एक छूमंतर का हाथ घूमायेगे और कोरोना भस्म हो जायेगा. प्रशासनिक अमला अपने पुराने भर्रे और ढर्रे पर ही चल रहा था, लेकिन मद्म-मद्म चाल से कोरोना के वायरस ने ग्रीन जोन छतरपुर को जकडना शुरू कर दिया है. संभावना जताई जा रही थी अपने शिखर स्तर पर कोरोना के छतरपुर जिले तक में लगभग चार हजार मामले पंहुच सकते है. तो क्या प्रशासन इन चार हजार के आंकडे को छूने की बेताबी में चिंताहीन था. तभी पहले से चेतना शक्ति का उपयोग नही किया, जिसके दिशा निर्देश गा-बजाकर प्रसारित किये जा रहे है. 


सरकारी अमला कहां था जो हर गांव में तैनात है. कहां गये वो क्वारटाईन सेंटर जिसमें प्रवासी मजदूरो को 14 दिन तक रूकवाने की व्यवस्था के कागज रंगे गये है. क्या कोरोना को  अवसर मान  ईमानदारी की परिभाषा में खोट का द्रव्य पी लिया था. लापरवाही के नमूने देखे तो एक जिम्मेदार डाक्टर के पांच सौ रूपये फीस के लालच ने वो फैलारा फैला दिया है कि प्रशासन को समेटना मुश्किल हो जायेगा. सीनियर डाक्टर ने उस मरीज का सरकारी अस्पताल के बजाय अपने नर्सिग होम में ईलाज करना क्यो उचित समझा जो मरीज अब कोरोना पाजीटिव पाया गया है.

प्रवासी मजदूरो की घर वापसी के साथ ही माना जा रहा था कि कोरोना मरीजो की संख्यां में तेजी से ईजाफा होगा. जब सचेत रहने का समय था. जब जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी ना जाने कौन सी दुनिया में खोये हुये थे. सरकारी स्याही से इंतजामो के कागज भरे जा रहे थे. जमीन पर यह कागजी रंग के निर्देश नजर नही आ रहे थे. जो अंदेशा था वो 19 मई को हकीकत बन सामने आया जब नौगांव नगर के बजरंग नगर निवासी दिल्ली से आये एक युवक को करोना पाजीटिव की पुष्टि हुई. फिर हरपालपुर के कैथोकर गांव से खतरे की घंटी बजी. जहां एक युवक ने दिल्ली से आकर सुरा पार्टी कर जुआं के फड पर हाथ अजमाये. यह युवक भी करोना पाजीटिव निकला. इसकी पत्नी और साथियो के सेम्पल लिये गये तो पत्नी सहित दो अन्य भी वायरस से ग्रसित पाये गये. 

24 मई को छतरपुर नगर के नजदीकी ग्राम कालापानी में जिस युवक का सेम्पल पाजीटिव पाया गया है. उसके पीछे की कहानी ने तो अधिकारियो की सांसे फूला दी है. एक सीनियर डाक्टर के लालच ने वो करिश्मा कर दिखाया है. जिसके नतीजे क्या होगे यह सोचना ही गंभीर है. जानकारी अनुसार 14 मई कालापानी गांव के कुछ लोग अन्य गांव के लोगो के साथ दिल्ली से ट्रक में सवार होकर आये थे. इसमें से एक युवक को सर्दी इत्यादि के लक्षण थे. 


सरकारी अस्पताल में पदस्थ सीनियर डाक्टर  ने इस युवक को अपने नर्सिग होम में ईलाज देना उचित समझा. युवक की खून की जांच छत्रसाल चौराहा स्थित पैथालाजी में और उसकी एक्सरे जांच निजी एक्सरे सेंटर में हुई. हालात बिगडने पर जब इस युवक का सेम्पल जांच हेतु भेजा गया तो रविवार को उसकी रिपोर्ट पाजीटिव आई. अब सोमवार की सुबह से हलाकान की स्थिति बनी. प्रशासन ने तत्काल डाक्टर के नर्सिंग होम, पैथालाजी लैब और एक्सरे सेंटर को सील कर दिया है. मुसीबत बना है कि इन ठिकानो पर पाजीटिव मरीज का किस किस से संपर्क हुआ यह तलाशना टेढा है. कुल मिलाकर 500 रूपये फीस के लालच में वो कारनामा सामने आया है जिसके परिणाम घातक हो सकते है. 

आज रविवार को ही लवकुशनगर के वार्ड क्रमांक 2 के निवासी दो भाईयो की रिपोर्ट पाजीटिव आई जो 21 मई को ही लवकुशनगर आये थे. यह दिल्ली में सब्जी बेचने का काम करते थे. बताया गया कि इसी लवकुशनगर से एक वाहन बुकिग पर उत्तराखंड गया हुआ था. जिसका चालक लवकुशनगर के उसी मुहल्ले का निवासी है जिसमे यह दोनो भाई निवास करते है. इन दोनो भाईयो ने इस चालक से संपर्क किया तो वह दिल्ली के बाहर नोयडा के यमुना एक्सप्रेस से इन भाईयो को वाहन में बैठा लवकुशनगर ले आया. वाहन चालक व अन्य पारिवारिक सदस्यो के सेम्पल भी जांच हेतु भेजे जाने की तैयारी है. 

एक अन्य मामला छतरपुर जनपद के ग्राम कूड का प्रकाश  में आया जहां दिल्ली में बढई का काम करने वाला एक परिवार अपने गांव कूड 21 मई को आ गया था. दिल्ली से आने वालो में इस श्रीवास परिवार के 13 व एक अन्य था. बताया गया कि श्रीवास परिवार के गावं में कुल सदस्यो की संख्यां लगभग 45 है. जिन्हे गांव के बाहर स्कूल में क्वारटाईन कर दिया गया है. प्रशासन ने जिन स्थानो और गांवो में मरीज मिले है उन्हे कन्टेनमेंट एरिया घोषित कर दिया है. 

इधर छतरपुर नगर में संभावना को देख अति आवश्यक वस्तुओ की दुकाने छोड अन्य को तत्काल प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी कर दिये गये है. साफ है कि जब चीडिया ने खेत चुगना शुरू कर दिया है तब जाकर खेत में खडे होने वाले बिजूका को तैयार किया जा रहा है. 



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