राष्ट्र निर्माता प्रवासी मजदूरों की जान इतनी सस्ती क्यूँ?



रास्ता तय करते करते न जाने कितने मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे बच्चों ने भी अपनी जान गवाँ दी है. आखिर सरकारें इन दुःखद घटनाओं से सीख क्यूँ नहीं ले रही हैं. मीडिया इन मजदूर भाइयो के दर्द व इनके साथ घटने वाली दुःखद घटनाओं को टीवी पर दिखा तो रही है, लेकिन सरकारों से सवाल क्यूँ नहीं पूछ पा रही है कि भारत के राष्ट्र निर्माता प्रवासी मजदूरों की जान इतनी सस्ती क्यूँ है. 


आकाश निगम 

देश ने मजदूरों के साथ जो किया, वैसा ...

लॉकडाउन का चौथा अलग रंग रूप वाला चरण भी ख़त्म होने को है, लेकिन कोरोना का कहर बजाय ख़त्म होने के बढ़ता ही जा रहा है. कोरोना के कारण बन्द पड़ी अर्थव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर किसानों, गरीबों व प्रवासी मजदूर भाइयों पर पड़ रहा है, जो भारत के राष्ट्रनिर्माता हैं, जो भारत का भविष्य हैं, जो भारत के विकास की रीढ़ हैं. आज उनके साथ देश की सरकार व राज्यों की सरकारें वो मदद नहीं कर पा रही हैं, जितनी मदद की आशा वो अपनी सरकारों से कर रहे थे. 

रोटी, कपड़ा, मकान और मोबाइल रिचार्ज ...

आज भारत के राष्ट्रनिर्माताओं का दुःख देखते नहीं बन पा रहा है, जो भी इनकी समस्या को देख रहा है वो भावुक हो जा रहा है. कोई रोड पर पैदल चल रहा है, कोई रेलवे का ट्रैक का सहारा लेके अपने घर को जा रहा है, तो कोई नदी के रास्ते अपने घर को जा रहा है. पिछले कई दिनों से हमारे प्रवासी भाइयों के साथ कितनी दुःखद घटनाये घट रही हैं, चाहे वो सागर की घटना हो, गुना की घटना हो, रेलवे ट्रैक पर मजदूरों की मौत की घटना हो, चाहे औरैया में ट्रक पलटने से 24 मजदूरों की मौत की घटना हो. प्रवासी भाइयो के साथ साथ छोटे छोटे बच्चे व बच्चियां भी हजारों किलोमीटर का रास्ता तय करने को मजबूर हो रहे है. प्रवासी भाई- बहन के साथ छोटे छोटे बच्चे भी भूख से प्यास से तड़प रहे हैं, रो रहे हैं, और दर्द से कराह रहे हैं, लेकिन कोई भी इनकी सुनने वाला नहीं है.


Covid-19 Lockdown: Migrants Issue in India- Child Sleeps On ...

रास्ता तय करते करते न जाने कितने मजदूर भाई, बहन, साथ ही छोटे छोटे बच्चो व बच्चियों ने भी अपनी जान गवाँ दी है. आखिर सरकारें इन दुःखद घटनाओं से सीख क्यूँ नहीं ले रही हैं. सरकारें प्रवासी भाइयो के लिए कोई ठोस योजना क्यूँ नहीं अमल में ला पा रही हैं. आज अर्णब गोस्वामी "पूछता है भारत" एपिसोड में प्रवासी मजदूर भाइयों की दुर्दशा के बारे में सरकार से सवाल क्यों नहीं पूछ पा रहे हैं. आज मीडिया इन मजदूर भाइयो के दर्द व इनके साथ घटने वाली दुःखद घटनाओं को टीवी पर दिखा तो रही है, लेकिन मीडिया भारत के प्रत्येक राज्यों की सरकारों से सवाल क्यूँ नहीं पूछ पा रही है कि भारत के राष्ट्र निर्माता प्रवासी मजदूरों की जान इतनी सस्ती क्यूँ है. 

आखिर भारत का प्रवासी मजदूर अपने घर जाने को क्यूँ मजबूर है. आखिर इनका धैर्य क्यूँ टूट रहा है. आखिर सरकारें इस पलायन को रोकने में क्यूँ असफल हो रही है. इतनी बड़ी समस्या के पीछे बहुत कारण होंगे क्यूँ कि प्रवासी मजदूर ऐसे ही अपने घर आने को मजबूर नही है. सरकारें प्रवासी, गरीब, मजदूर व किसान भाइयो की समस्याओं के बारे में अध्ययन करके इनकी मदद करें, जिससे भारत का भविष्य अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके और देश के विकास में फिर से अपना अहम योगदान दे सके.





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